उम्मीदों के साथ भूटान की यात्रा से लौटे

थिंपू :प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पहली विदेश यात्रा से वापस आ रहे हैं. उन्होंने भूटान यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंध को अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाने की कोशिश की. दो दिनों की यात्रा के दौरान मोदी के साथ विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी साथ थीं. दो दिन की यात्रा के दौरान मोदी ने […]
थिंपू :प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी पहली विदेश यात्रा से वापस आ रहे हैं. उन्होंने भूटान यात्रा के दौरान दोनों देशों के संबंध को अधिक मजबूत और विश्वसनीय बनाने की कोशिश की. दो दिनों की यात्रा के दौरान मोदी के साथ विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी साथ थीं. दो दिन की यात्रा के दौरान मोदी ने भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक से मुलाकात की और प्रधानमंत्री तोबगे के साथ बातचीत भी की.
मोदी ने भूटान की संसद के संयुक्त सत्र को भी संबोधित किया. प्रधानमंत्री ने भारत के सहयोग से निर्मित भूटान के उच्चतम न्यायालय की इमारत का उद्घाटन किया और 600 मेगावाट की खोलोगचू पनबिजली परियोजना की आधारशिला रखी जो भारत और भूटान का संयुक्त उद्यम है.
यात्रा समाप्त करते हुए मोदी ने बेहतर पडोसी संबंधों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता घोषित की और यह स्पष्ट संदेश दिया कि मजबूत और समृद्ध भारत क्षेत्र के छोटे देशों की मदद कर सकता है. मोदी ने हिमालयी देश को आश्वस्त किया कि पूर्व सरकार की सभी प्रतिबद्धताओं को उनकी सरकार पूरा करेगी.
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार बदलने से भारत.भूटान संबंधों में कोई बदलाव नहीं आयेगा. उन्होंने भूटान और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के बीच खेल महोत्सव आयोजित करने, संयुक्त शोध के लिए हिमालयी विश्वविद्यालय स्थापित करने जैसे नये प्रस्तावों के जरिये संबंधों को और प्रगाढ बनाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की.
प्रधानमंत्री की ओर से अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भूटान को चुनने का महत्व इसलिए बढ जाता है कि हाल में चीन ने भूटान के साथ संबंध बढाने के प्रयास किये है और थिम्पू के साथ पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित किये हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज कहा कि भारत अपने पडोसी देशों के साथ अच्छे रिश्ते के लिए प्रतिबद्ध है और उन्होंने भूटान को आश्वासन दिया कि सरकार में बदलाव से भारत-भूटान संबंधों में कोई बदलाव नहीं होगा.भूटान की संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा, ‘‘भारत अपने पडोसी देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है.’’ हिमालयी देश की दो दिवसीय यात्र के दूसरे दिन प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि भारत प्रगति करता है, तो इसका सीधा प्रभाव उसके पडोसियों के विकास पर पडेगा. हिंदी में दिए भाषण में मोदी ने कहा, ‘‘भारत में स्थिरता और विकास भूटान जैसे पडोसियों की मदद करेगा.’’
मोदी ने सात साल में राजतंत्र से लोकतंत्र में सरलतापूर्वक संक्रमण के लिए भूटान की सराहना की. यह सहज संक्रमण भूटान की शासन प्रणाली की परिपक्वता दर्शाता है. कल यहां पहुंचे 63 वर्षीय मोदी ने पिछले माह प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी। उसके बाद वह पहली बार किसी विदेश यात्रा पर आए हैं.भूटान के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंधों को याद करते हुए मोदी ने कहा कि उनकी सरकार दो पडोसियों के बीच संबंधों को मजबूत करने की दिशा में काम करेगी. आतंकवाद को विभाजनकारी और पर्यटन को जोडने वाला बताते हुए मोदी ने कहा कि भूटान में पर्यटन क्षेत्र से जुडी व्यापक संभावनाएं हैं.
मोदी ने कहा कि पर्यटन के विकास के लिए ज्यादा निवेश की जरुरत नहीं होती लेकिन इसके जरिए भारी मुनाफा हासिल किया जा सकता है और गरीब व्यक्ति को भी इससे लाभ मिलता है. हिमालय को साझी विरासत बताते हुए मोदी ने इस क्षेत्र के विकास की जरुरत पर जोर दिया और कहा कि भारत हिमालयी अध्ययन :हिमालयन स्टडीज: के लिए एक विश्वविद्यालय खोलने की योजना बना रहा है. उन्होंने पिछले माह दिल्ली में आयोजित अपने शपथ ग्रहण में शामिल होने के लिए भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे को धन्यवाद दिया.भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्येल वांग्चुक और तोबगे से व्यापक वार्ताएं करते हुए मोदी ने कल द्विपक्षीय संबंधों को बढावा देने के लिए प्रतिबद्धता जताई थी. इसे उन्होंने ‘बी4बी’ यानी ‘‘भारत फॉर भूटान और भूटान फॉर भारत’’ या ‘‘भूटान के लिए भारत और भारत के लिए भूटान’’ के रुप में परिभाषित किया था.
उन्होंने विकास सहयोग के तहत भारत द्वारा बनाए गए उच्चतम न्यायालय परिसर का उद्घाटन भी किया. वार्ताओं के दौरान, मोदी ने भूटानी नेतृत्व को आश्वासन दिया कि दिल्ली में सरकार बेशक बदल गई हो लेकिन भारत उसकी खुशियों और प्रगति के लिए प्रतिबद्ध है. भूटान के प्रधानमंत्री तोबगे की ओर से कल रात दी गई दावत में मोदी ने दोनों देशों के बीच ‘शानदार’ पारंपरिक संबंधों का उल्लेख करते हुए भारत और भूटान को ‘एक दूसरे के लिए बना हुआ’ बताया. इस दौरे पर मोदी के साथ विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और विदेश सचिव सुजाता सिंह भी हैं.
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