भारत को प्रौद्योगिकी वर्चस्व से मुकाबला करना सीखना चाहिए : राजगोपाला चिदंबरम
Author Prabhat khabar digital desk
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नयी दिल्ली : भारत को प्रौद्योगिकी वर्चस्व से मुकाबला करना सीखना चाहिए जिसकी जरूरत मानव जीनोमिक्स और परमाणु हथियार जैसे विभिन्न क्षेत्रों में है. यह बात सरकार के एक पूर्व प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ने कही है. डा. आर चिदंबरम ने बुधवार को एक कार्यक्रम में कहा कि प्रौद्योगिकी एक शक्ति के तौर पर देखा जा […]
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नयी दिल्ली : भारत को प्रौद्योगिकी वर्चस्व से मुकाबला करना सीखना चाहिए जिसकी जरूरत मानव जीनोमिक्स और परमाणु हथियार जैसे विभिन्न क्षेत्रों में है. यह बात सरकार के एक पूर्व प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ने कही है. डा. आर चिदंबरम ने बुधवार को एक कार्यक्रम में कहा कि प्रौद्योगिकी एक शक्ति के तौर पर देखा जा सकता है, यह निकट भविष्य में भी बनी रहेगी. जीनोमिक्स आनुवंशिक विज्ञान में एक ऐसा क्षेत्र है जो जीन के अनुक्रमण और विश्लेषण से संबंधित है.
चिदंबरम का संबोधन एक श्रृंखला ‘मेटामॉर्फोसेस’ का एक हिस्सा था जिसका उद्देश्य डिजिटल, स्मार्ट प्रौद्योगिकी की उन्नति और मनुष्यों द्वारा उसकी समझ के बीच अंतर को भरना है. इसका आयोजन पूर्व विदेश सचिव श्याम सरण की सक्रिय भागीदारी से हुआ था. चिदंबरम ने यहां इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में ‘आटोमेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड फ्यूचर आफ जॉब्स’ पर एक सत्र में अपने संबोधन में आटोमेशन, रोबोटिक्स, ह्यूमनॉड्स और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे विषयों पर प्रकाश डाला.
उन्होंने कहा, ‘‘फ्यूचरलॉजिस्ट एल्विन टॉफलर ने कहा है कि ‘कल हिंसा शक्ति थी, आज सम्पत्ति शक्ति है और कल ज्ञान शक्ति होगी.’ जिन लोगों में भी ज्ञान को प्रौद्योगिकी में परिवर्तित करने की क्षमता होगी उसके पास शक्ति होगी, इसलिए यह कहने के लिए टॉफलर को उद्धृत करूंगा कि प्रौद्योगिकी शक्ति है.”
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