तेल कंपनियों को सालाना 10,700 करोड़ का नुकसान

पेट्रोलियम कंपनियों के एक रुपये लीटर का बोझ वहन करने के निर्देश को पेट्रोल-डीजल पर फिर से सरकारी नियंत्रण स्थापित करने के तौर पर देखा जा रहा है. अभी इनकी कीमतें बाजार के आधार पर तय होती हैं. सरकारी कंपनियों की आय पर एक रुपये प्रति लीटर कीमत वहन करने का सालाना बोझ 10,700 करोड़ […]
पेट्रोलियम कंपनियों के एक रुपये लीटर का बोझ वहन करने के निर्देश को पेट्रोल-डीजल पर फिर से सरकारी नियंत्रण स्थापित करने के तौर पर देखा जा रहा है. अभी इनकी कीमतें बाजार के आधार पर तय होती हैं.
सरकारी कंपनियों की आय पर एक रुपये प्रति लीटर कीमत वहन करने का सालाना बोझ 10,700 करोड़ रुपये होगा. इसमें करीब आधा बोझ इंडियन ऑयल पर और बाकी का बोझ हिस्सेदारी हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम पर जा सकता है.
10,500 करोड़ रुपये के टैक्स राजस्व का नुकसान होगा डेढ़ रुपये एक्साइज कटौती से चालू वित्त वर्ष की बाकी अवधि में
21,000 करोड़ रुपये का नुकसान होगा, पूरे साल में पेट्रोलियम उत्पादों की रिटेल कीमत में आधा हिस्सा करों का है.
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