सरकारी कर्मचारियों को करने होंगे अब सप्ताह में छह दिन काम!

नयी दिल्ली:जल्दी ही केंद्र सरकार के कर्मचारियों के आराम भरे अच्छे दिन कामकाज वाले मेहनत के दिनों में बदल सकते हैं. राजीव गांधी सरकार का एक बड़ा फैसला बदल कर मोदी सरकार केंद्र सरकार के कार्यालयों में पांच दिन की जगह फिर छह दिन के काम का सप्ताह लागू करने पर विचार कर रही है. […]
नयी दिल्ली:जल्दी ही केंद्र सरकार के कर्मचारियों के आराम भरे अच्छे दिन कामकाज वाले मेहनत के दिनों में बदल सकते हैं. राजीव गांधी सरकार का एक बड़ा फैसला बदल कर मोदी सरकार केंद्र सरकार के कार्यालयों में पांच दिन की जगह फिर छह दिन के काम का सप्ताह लागू करने पर विचार कर रही है. मोदी सरकार के इस विचार से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी सहमत है.
संघ नेतृत्व मानता है कि राजीव गांधी ने यह व्यवस्था पश्चिमी देशों के मॉडल से प्रभावित होकर की थी, जिसे बदला जाना चाहिए. यह जानकारी देने वाले सूत्रों का कहना है कि इसके लिए सरकारी दफ्तरों के खुलने का समय सुबह साढ़े नौ बजे से बढ़ा कर दस बजे और बंद होने का समय शाम छह बजे से घटा कर साढ़े पांच बजे करने या शनिवार को आधा दिन का कार्य दिवस करने या महीने में पहला और तीसरा शनिवार पूरा अवकाश रखने के विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है. हालांकि इस व्यवस्था को बदलने में अभी कुछ वक्त लगेगा.
राजीव गांधी के समय में लागू हुआ था नियम
1984 में जब राजीव गांधी चुनाव जीत कर आये, तो उन्होंने यूरोप और अमेरिका की तर्ज पर भारत में भी केंद्र सरकार के दफ्तरों में सप्ताह में पांच दिन के कामकाज की व्यवस्था लागू की. इसके लिए सरकारी दफ्तरों में सुबह दस की बजाय साढ़े नौ बजे कामकाज शुरू होने और शाम साढ़े पांच बजे की बजाय छह बजे काम बंद होने का समय कर दिया गया. इससे सप्ताह में काम के कुल घंटों पर फर्कनहीं पड़ा लेकिन कर्मचारियों को एक दिन की जगह सप्ताह में दो दिन का अवकाश मिलने लगा. राजीव सरकार का तर्कथा कि इससे कर्मचारियों की काम की क्षमता बढ़ेगी, क्योंकि एक दिन के साप्ताहिक अवकाश में कर्मचारी छह दिन के काम के बोझ से इतना थक जाते हैं कि अवकाश का दिन उनके आराम में निकल जाता है और वह अपने पारिवारिक व घरेलू काम के लिए समय नहीं निकाल पाते. तब दफ्तरों से गायब होकर निजी काम करने की प्रवृत्ति बढ़ती है.
क्या चाहते हैं मोदी
इस व्यवस्था के खिलाफ तर्क यह है कि दफ्तर खुलने का समय सुबह 9.30 बजे होने के बावजूद आमतौर पर कर्मचारी सुबह दस बजे ही पहुंचते हैं और शाम को छह बजे से पहले ही दफ्तर से निकलने लगते हैं. साथ ही शुक्र वार को दोपहर बाद से ही दफ्तर खाली होने लगते हैं और अगर शुक्र वार को कई सरकारी अवकाश हो गया तो गुरु वार से ही दफ्तरों के ज्यादातर कर्मचारी आकस्मिक अवकाश लेकर तीन चार दिनों के लिए बाहर निकल जाते हैं. ऐसे में कई बार सप्ताह में सिर्फदो या तीन दिन ही काम हो पाता है. इसलिए पांच दिन का सप्ताह होने से कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ने और सरकारी काम जल्दी निबटाने की बजाय काम लंबित रखने की प्रवृत्ति ज्यादा बढ़ गयी है. मोदी चाहते हैं कि केंद्र सरकार के कामकाज में चुस्ती लाने और क्षमता बढ़ाने के लिए कुछ व्यवस्थागत परिवर्तन जरूरी हैं. इनमें से एक सप्ताह के कार्य दिवस बढ़ाने का भी सुझाव है.
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