#Article35A : सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई अब 27 अगस्त को

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 06 Aug 2018 7:27 AM

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श्रीनगर/नयी दिल्ली :अनुच्छेद 35ए की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गयी है. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई के लिए 27 अगस्त की तारीख मुकर्रर कर दी. इस अनुच्छेद के विरोध में अलगाववादियों ने रविवार को दो दिन का जम्मू-कश्मीर बंद का आह्वान किया, जिसके […]

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श्रीनगर/नयी दिल्ली :अनुच्छेद 35ए की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गयी है. सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इस मामले की सुनवाई के लिए 27 अगस्त की तारीख मुकर्रर कर दी.
इस अनुच्छेद के विरोध में अलगाववादियों ने रविवार को दो दिन का जम्मू-कश्मीर बंद का आह्वान किया, जिसके कारण पूरी घाटी में जनजीवन अस्त-व्यवस्त हो गया. हड़ताल के चलते जम्मू से अमरनाथ यात्रा स्थगित कर दी गयी. चेनाब घाटी के जिलों रामवन, डोडा और किश्तवाड़ से अनुच्छेद 35ए के समर्थन में आंशिक हड़ताल और शांतिपूर्ण रैलियां की गयीं. जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर स्पेशल चेक पोस्ट बनाये गये हैं.
नेशनल कॉन्फ्रेंस, पीडीपी, माकपा और कांग्रेस की राज्य इकाई सहित राजनीतिक दल और अलगाववादी अनुच्छेद 35ए पर यथास्थिति बनाये रखने की मांग कर रहे हैं. राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के पास एक आवेदन दायर किया था, जिसमें उसने सूचना दी थी कि वह आगामी पंचायत और शहरी स्थानीय निकाय एवं राज्य में नगरपालिका चुनावों के लिए चल रही तैयारी के कारण याचिका की सुनवाई स्थगित करने की मांग कर रही है.
इधर, कानून-व्यवस्था बनाये रखने के लिए श्रीनगर और कश्मीर में दूसरी अतिसंवेदनशील जगहों पर सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गयी है. बार एसोसिएशन, ट्रांसपोर्टर एवं व्यापारिक संगठनों सहित विभिन्न संगठनों ने जेआरएल के बंद का समर्थन किया है. जेआरएल में सैयद अली शाह गिलानी, मीरवाइज उमर फारुख और मोहम्मद यासिन मलिक शामिल हैं.

क्या है अनुच्छेद 35ए

अनुच्छेद 35ए के तहत जम्मू-कश्मीर सरकार और वहां की विधानसभा को स्थायी निवासी की परिभाषा तय करने का अधिकार मिल जाता है. इस अनुच्छेद के चलते जम्मू-कश्मीर से बाहर के लोग राज्य में कोई भी अचल संपत्ति नहीं खरीद सकते. 14 मई, 1954 को संविधान में एक नया अनुच्छेद 35ए जोड़ा गया.

क्या है नागरिकता की परिभाषा

1956 में जम्मू-कश्मीर का संविधान बनाया गया था. इसमें स्थायी नागरिकता को परिभाषित किया गया है. इस संविधान के मुताबिक, स्थायी नागरिक वह व्यक्ति है, जो 14 मई, 1954 को राज्य का नागरिक रहा हो या फिर उससे पहले के 10 वर्षों से राज्य में रह रहा हो साथ ही उसने वहां संपत्ति हासिल की हो.
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