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आज पुण्यतिथि: स्वामी विवेकानंद ने कहा था, देश के आर्थिक विकास के लिए तकनीकी शिक्षा जरूरी

Updated at : 04 Jul 2018 10:43 AM (IST)
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आज पुण्यतिथि: स्वामी विवेकानंद ने कहा था, देश के आर्थिक विकास के लिए तकनीकी शिक्षा जरूरी

आज चार जुलाई है. आज ही के दिन वर्ष 1902 में मात्र 39 साल की उम्र में स्वामी विवेकानंद इस दुनिया को अलविदा कह गये थे. लेकिन अपने इस छोटे से जीवनकाल में ही विवेकानंद ने मानवता की ऐसी सेवा की जिसे लोग वर्षों बरस जीकर भी नहीं कर पाते हैं. स्वामी जी ने सनातन […]

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आज चार जुलाई है. आज ही के दिन वर्ष 1902 में मात्र 39 साल की उम्र में स्वामी विवेकानंद इस दुनिया को अलविदा कह गये थे. लेकिन अपने इस छोटे से जीवनकाल में ही विवेकानंद ने मानवता की ऐसी सेवा की जिसे लोग वर्षों बरस जीकर भी नहीं कर पाते हैं. स्वामी जी ने सनातन धर्म और योग को अमेरिका यूरोप के देशों में फैलाया.

विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था. वे अपने गुरु स्वामी रामकृष्ण परमहंस से काफी प्रभावित थे जिनसे उन्होंने सीखा कि सारे जीव स्वयं परमात्मा का ही एक अवतार हैं; इसलिए मानव जाति की सेवा द्वारा परमात्मा की भी सेवा की जा सकती है. उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की और मानवता की सेवा में जुट गये.
जिस दिन उन्होंने महासमाधि ली, उस दिन भी उनकी दिनचर्या बहुत सामान्य थी. उनके शिष्यों के अनुसार स्वामी जी ने सुबह में दो तीन घंटे ध्यान किया. फिर दो-तीन घंटे ध्यान किया. फिर शुक्ल यजुर्वेद की व्याख्या की और कहा-‘एक और विवेकानंद चाहिए, यह समझने के लिए कि इस विवेकानंद ने अब तक क्या किया है.’ शाम सात बजे उन्होंने वैदिक कॉलेज की स्थापना पर चर्चा की और फिर ध्यान के लिए चले गये और कहा कि कोई उन्हें परेशान ना करे और 9.20 पर वे उन्होंने महासमाधि ले ली. बेलर में गंगा के तट पर उनका अंतिम संस्कार हुआ. स्वामी जी ने शिक्षा को मानव के विकास के लिए बहुत जरूरी बताया था. उनके अनुसार शिक्षा के आधार भूत सिद्धांत ऐसे होने चाहिए जो मानव का विकास करें, मसलन:-
शिक्षा ऐसी हो जिससे बालक का शारीरिक, मानसिक एवं आत्मिक विकास हो सके.
– शिक्षा ऐसी हो जिससे बालक के चरित्र का निर्माण हो, मन का विकास हो, बुद्धि विकसित हो तथा बालक आत्मनिर्भर बने.
– बालक एवं बालिकाओं दोनों को समान शिक्षा देनी चाहिए.
– धार्मिक शिक्षा, पुस्तकों द्वारा न देकर आचरण एवं संस्कारों द्वारा देनी चाहिए.
– पाठ्यक्रम में लौकिक एवं पारलौकिक दोनों प्रकार के विषयों को स्थान देना चाहिए.
– शिक्षा, गुरू गृह में प्राप्त की जा सकती है.
– शिक्षक एवं छात्र का संबंध अधिक से अधिक निकट का होना चाहिए.
– सर्वसाधारण में शिक्षा का प्रचार एवं प्रसार किया जाना चाहिए.
– देश की आर्थिक प्रगति के लिए तकनीकी शिक्षा की व्यवस्था की जाये.
– मानवीय एवं राष्ट्रीय शिक्षा परिवार से ही शुरू करनी चाहिए.
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