Private अस्पताल की करतूत से खड़े हो जायेंगे आपके रोंगटे, जिंदा बच्चों को किया मृत घोषित

Updated at : 01 Dec 2017 6:30 PM (IST)
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Private अस्पताल की करतूत से खड़े हो जायेंगे आपके रोंगटे, जिंदा बच्चों को किया मृत घोषित

नयी दिल्ली : आम तौर पर देश के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकीय लापरवाही के मामले तो सामने आते रहे हैं और उनकी इस लापरवाही से मरीजों के परिजन अक्सर हंगामा करते पाये जाते हैं, मगर अब मोटी रकम वसूलने के बाद मरीजों में हाथ लगाने वाले प्राइवेट अस्पताल में भी लापरवाही के मामले सामने आने […]

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नयी दिल्ली : आम तौर पर देश के सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकीय लापरवाही के मामले तो सामने आते रहे हैं और उनकी इस लापरवाही से मरीजों के परिजन अक्सर हंगामा करते पाये जाते हैं, मगर अब मोटी रकम वसूलने के बाद मरीजों में हाथ लगाने वाले प्राइवेट अस्पताल में भी लापरवाही के मामले सामने आने लगे हैं.

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ऐसा ही एक रोंगटे खड़ा करने वाला मामला देश की राजधानी दिल्ली के शालीमार बाग इलाके में सामने आया है. यहां पर चलाये जाने वाले निजी अस्पताल मैक्स हॉस्पिटल ने दो बच्चों को मृत घोषित कर दिया. दुखद तो यह है कि अस्पताल के कर्मचारियों ने उन बच्चों को कागज और कपड़ों में लपेटकर परिजनों को दे दिया. वहीं, इस मामले में पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने के बजाय केस को मेडिकल लीगल सेल को भेज दिया है.

अस्पताल की ओर से बरती गयी भारी लापरवाही के बाद परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया. इस घटना के बाद मैक्स हॉस्पिटल ने बयान जारी कर कहा है कि वह बच्चे के परिजनों से अस्पताल लगातार संपर्क में है. मैक्स हॉस्पिटल ने कहा है, दोनों बच्चों का जन्म 30 नवंबर, 2017 को हुआ. डिलीवरी के वक्त बच्चों की उम्र 22 सप्ताह थी. हम इस दुर्लभ घटना से सदमे में हैं. हमने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है. जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, बच्चे को मृत घोषित करने वाले डॉक्टर को तत्काल छुट्टी पर जाने के लिए कह दिया गया है.

मीडिया में आ रही खबरों में बताया जा रहा है कि शालीमार बाग स्थित मैक्स हॉस्पिटल में गुरुवार को एक महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया. इनमें एक लड़का था और दूसरी लड़की. परिवार वालों ने बताया कि डिलीवरी के साथ ही बच्ची की मौत हो गयी. डॉक्टरों ने दूसरे जीवित बचे बच्चे का इलाज शुरू किया, लेकिन एक घंटे बाद अस्पताल ने बताया कि दूसरा बच्चा भी मर गया.

अस्पताल ने इसके बाद दोनों बच्चों के मृत शरीर को कागज और कपड़े में लपेटने के बाद टेप लगाकर परिजनों को सौंप दिया. दोनों बच्चों मृत शरीर को लेकर परिजन लौट रहे थे. दोनों पार्सलों को महिला के पिता ने ले रखा था. रास्ते में उन्हें एक पार्सल में हलचल महसूस हुई. उन्होंने तुरंत उस पार्सल को फाड़ा, तो अंदर बच्चा जीवित मिला. वे तुरंत उसे लेकर एक नजदीकी अस्पताल गये, जहां दूसरा बच्चा जीवित है और उसका इलाज चल रहा है.

इन बच्चों के परिजनों का कहना है कि रास्ते में हलचल महसूस हुई, तो हमने पार्सल फाड़ा तो देखा कागज और कपड़े के अंदर लपेटकर रखे बच्चे की सांसें चल रही थीं. हम तुरंत उस बच्चे को पास में ही मौजूद अग्रवाल अस्पताल ले गए. परिजनों का कहना है कि पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज नही की.

इस मामले में पुलिस का कहना है दिल्ली मेडिकल काउंसिल की लीगल सेल को मामला भेज दिया गया है, जो मामले की जांच करेगी. उसका कहना है कि उसके बाद ही आगे का मामला दर्ज होगा. इस मामले में उत्तर-पश्चिमी जिले के पुलिस उपायुक्त ने शहर से बाहर होने की बात बताकर मामले में किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

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