राजधानी दिल्ली में धुंध का कहर जारी, सांस लेना अब भी मुश्किल

Updated at : 10 Nov 2017 11:22 AM (IST)
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राजधानी दिल्ली में धुंध का कहर जारी, सांस लेना अब भी मुश्किल

नयी दिल्ली : दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शुक्रवार को चौथे दिन भी धुंध की मोटी चादर से ढका हुआ है जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कतें आ रही हैं. मौसम विभाग के अनुसार, सुबह साढे पांच बजे दृष्यता सीमा 1000 मीटर की थी, लेकिन साढ़े आठ बजे तक वह घटकर महज 400 मीटर […]

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नयी दिल्ली : दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शुक्रवार को चौथे दिन भी धुंध की मोटी चादर से ढका हुआ है जिससे लोगों को सांस लेने में दिक्कतें आ रही हैं. मौसम विभाग के अनुसार, सुबह साढे पांच बजे दृष्यता सीमा 1000 मीटर की थी, लेकिन साढ़े आठ बजे तक वह घटकर महज 400 मीटर रह गयी. दिल्ली में न्यूनतम तापमान सामान्य से एक डिग्री नीचे 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. सुबह साढे आठ बजे आर्द्रता 93 प्रतिशत रही. मौसम विभाग का कहना है कि आज दिन में हल्की हवा चलने का अनुमान है जिससे धुंध छंटने में कुछ मदद मिलेगी. अधिकारी ने कहा, आज दिन में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है.

मामले में राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी), राष्ट्रीय मानवधिकार आयोग (एनएचआरसी) और दिल्ली हाइकोर्ट ने इस पर गुरुवार को सख्त रूख अपनाया. उधर, स्थिति से निबटने के तात्कालिक उपाय के तहत दिल्ली सरकार ने एनसीआर में 13 नवंबर से 17 नवंबर तक गाड़ियों के लिए ऑड इवन फॉर्मूला लागू करने का फैसला किया है. दोपहिया, सीएनजी वाहनों, महिलाओं और वीवीआइपी को इसमें छूट दी गयी है.

दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि ऑड-इवन योजना के एक दिन वे निजी वाहन चलेंगे जिनकी पंजीकरण प्लेट की आखिरी संख्या इवन (सम) होगी तथा दूसरे दिन उन वाहनों के चलने की इजाजत होगी, जिनकी संख्या ऑड (विषम) होगी. इन पांच दिनों तक सुबह आठ बजे से शाम आठ बजे तक ऑड-इवन लागू रहेगा. वर्ष 2016 में एक जनवरी से 15 जनवरी और 15 अप्रैल से 30 अप्रैल तक सम-विषम योजना दो चरण में लागू की गयी थी. मालूम हो कि दिल्ली में पीएम2.5 का स्तर सात गुना बढ़ चुका है. इससे लोगों को सांस लेने में भारी परेशानी हो रही है. गुरुवार की शाम में दृश्यता 800मीटर रही. प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए दिल्ली सरकार ने बाल दिवस के कार्यक्रम 14 नवंबर की बजाये 19 नवंबर को आयोजित करने का फैसला किया है.

एनजीटी ने कंस्ट्रक्शन पर रोक लगायी

एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने दिल्ली सरकार व नगर निकायों को फटकार लगाते हुए कहा कि सभी संवैधानिक प्राधिकरण और संस्थाएं अपना फर्ज निभाने में नाकाम रहे हैं. एनजीटी ने दिल्ली-एनसीआर में 14 नवंबर तक सभी कंस्ट्रक्शन कार्यों और औद्योगिक गतिविधियों पर प्रतिबंध और दिल्ली के भीतर या बाहर के किसी भी ट्रक के कंस्ट्रक्शन सामग्री लाने और ले जाने पर रोक लगा दी है. साथ ही 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाले ट्रकों के प्रवेश पर भी पाबंदी लगा दी गयी है.

कृत्रिम वर्षा पर विचार करें : हाइकोर्ट
दिल्ली हाइकोर्ट ने वातावरण में धूल की मात्रा कम करने के लिए पानी का छिड़काव करने सहित अन्य कई निर्देश दिये हैं. हालात को आपात स्थिति बताते हुए न्यायमूर्ति एस रविन्द्र भट और न्यायमूर्ति संजीव सचदेव की पीठ ने सरकार से कहा कि कृत्रिम वर्षा करवाने के लिए वह क्लाऊड सीडिंग के विकल्प पर विचार करे, ताकि वातावरण में मौजूद धूल और प्रदूषकों की मात्रा पर तुरंत काबू पाया जा सके. पीठ ने कहा, आज हम जिस स्थिति को झेल रहे हैं, लंदन उससे पहले गुजर चुका है. वह इसे पी सूप फॉग (काला धुंध) कहते हैं. यह जानलेवा है. पराली जलना इसमें प्रत्यक्ष विलेन हैं.

एनएचआरसी ने पूछा क्यों बने ऐसे हालात

मानवाधिकार आयोग ने केंद्र, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब सरकार से वायु प्रदूषण के बाबत दो हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है. आयोग ने कहा कि साफ हवा में सांस लेना और गरिमापूर्ण ढंग से जीने का अधिकार ही मानवाधिकार है. प्रदूषण पर सरकारों की लाचारी ने मानवाधिकार का हनन किया है. आयोग ने सरकारों से पूछा है कि आखिर ऐसे हालात कैसे बने और इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाये गये हैं?

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