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कुमार विश्वास ने वंसुधरा पर साधा निशाना कहा, लोकतांत्रिक महारानी के आदेश पर मेरा कार्यक्रम रद्द

Updated at : 13 Oct 2017 7:30 PM (IST)
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कुमार विश्वास ने वंसुधरा पर साधा निशाना कहा,  लोकतांत्रिक महारानी के आदेश पर मेरा कार्यक्रम रद्द

नयी दिल्‍ली: कुमार विश्वास ने अपने फेसबुक पेज पर एक वीडियो शेयर करते हुए जानकारी दी कि किस तरह सरकारी दबाव के कारण उनका कार्यक्रम रद्द कर दिया गया. राजस्‍थान के डूंगरपुर जिले में चल रहे दीपावली मेले में आयोजित हुए कवि सम्‍मेलन में आयोजकों ने कुमार विश्वास को आने से मना कर दिया. कुमार […]

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नयी दिल्‍ली: कुमार विश्वास ने अपने फेसबुक पेज पर एक वीडियो शेयर करते हुए जानकारी दी कि किस तरह सरकारी दबाव के कारण उनका कार्यक्रम रद्द कर दिया गया. राजस्‍थान के डूंगरपुर जिले में चल रहे दीपावली मेले में आयोजित हुए कवि सम्‍मेलन में आयोजकों ने कुमार विश्वास को आने से मना कर दिया. कुमार ने कहा, आयोजकों ने फोन पर जानकारी देते हुए कहा कि उन पर सरकारी दबाव है.

आयोजकों द्वारा अपना नाम काटने के पीछे उन्‍होंने राजस्थान की मुख्यमंत्री वंसुधरा राजे पर भी निशाना साधा है. उन्होंने ‘महारानी’ कहकर उन्हें संबोधित करते हुए कहा, मैं इसी वंशवाद की राजनीति से लड़ता रहा हूं . मेरे कवि सम्मेलन में मेरी राजनीति में भी इसकी छवि दिखती है.

कुमार ने फेसबुक वीडियो में राजस्‍थान के कविता प्रेमियों से माफी मांगते हुए कहा, मुख्‍यमंत्री वसुंधरा राजे के आदेश के चलते आयोजकों को आखिरी वक्‍त में उनका नाम इस कवि सम्‍मेलन से हटाना पड़ा है. उनके नाम के पोस्टर और बैनर छप गये थे. कुमार ने अपने फेसबुक वीडियो में यह भी बताया कि कैसे कम पैसे पर उन्होंने कार्यक्रम के लिए हामी भरी थी.
उन्होंने कहा, डूंगरपुर में होने वाले इस कवि सम्‍मेलन के आयोजकों ने उदयपुर के कवि राव अजातशत्रु के माध्‍यम से उनसे संपर्क किया. एक महीने पहले नगर निगम को मैसेज आया कि आप आइये. परसों वहां से राजस्थान की लोकतांत्रिक महारानी गुजर रहीं थी उन्होंने पोस्टर देखे और मुख्‍यमंत्री के मुख्‍य सचिव ने कवि सम्‍मेलन के आयोजकों को फोन कर कहा कि यह कवि नहीं आना चाहिए.

इस वीडियो के साथ- साथ कुमार ने इस पर अपनी राय भी लिखी है उन्होंने लिखा, मुझे स्वयं भी इस बात का बेहद दुःख है कि दूर-दूर से आए आप सब कविता प्रेमी श्रोताओं को कविताएँ नहीं सुना पाया . लेकिन अहंकार तो किसी का भी नहीं रुकता है. आशा है कि जल्द ही यह योग बनेगा कि अहंकारी राजनीति को आईना दिखाते हुए मैं आपसे पुण्यभूमि वांगड में ही मिलूँगा.
मुझे कल ही यह भी ज्ञात हुआ कि कवि-सम्मलेन संस्थान और कविता पर राजसत्ता के इस ओछे हमले से क्षुब्ध हो कर कवि-सम्मलेन मंचों के आचार्य संचालक सत्य नारायण सत्तन जी (पूर्व विधायक भाजपा और वर्तमान में राज्यमंत्री समकक्ष), वीर रस के राष्ट्रजागरण-सिद्ध कवि चौधरी मदनमोहन समर, हास्य के गेय नवस्वर शम्भू शिखर, राजस्थान की वीर गाथा को दुनिया भर में बाँचने वाले प्रिय अनुज राव अजातशत्रु, समकालीन कवि मित्र यश भारती सम्मानित सर्वेश अस्थाना, लोकप्रिय कवयित्री सुश्री गौरी मिश्र और नवोदित कवि कानू पंडित भी वहाँ नहीं पहुँचे.
कवि-सम्मलेन और कविता पर राजनैतिक अंकुश के विरोध में आए सम्पूर्ण कवि समाज का मैं स्वागत करता हूँ और आभार व्यक्त करते हुए आशा करता हूँ कि किसी भी दल के सत्ता से उपजे अहंकार को यूँ ही आइना दिखाते रहेंगे. हालांकि इस मामले में अबतक आयोजकों का और राजस्थान सरकार का पक्ष सामने नहीं आया है.
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