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चाचा शिवपाल से रस्साकशी के बीच मोहब्बत की नगरी में अखिलेश ने फिर पहना सपा का ताज

Updated at : 05 Oct 2017 11:53 AM (IST)
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चाचा शिवपाल से रस्साकशी के बीच मोहब्बत की नगरी में अखिलेश ने फिर पहना सपा का ताज

आगराः समाजवादी कुनबे की कमान संभालने के लिए चाचा शिवपाल यादव से चल रही रस्साकशी के बीच पिता मुलायम सिंह की सरपरस्ती में सपा प्रमुख आैर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को मोहब्बत की नगरी आगरा में गुरुवार को एक बार फिर निर्विरोध पार्टी का अध्यक्ष चुना गया. ताजनगरी आगरा में चल रहे […]

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आगराः समाजवादी कुनबे की कमान संभालने के लिए चाचा शिवपाल यादव से चल रही रस्साकशी के बीच पिता मुलायम सिंह की सरपरस्ती में सपा प्रमुख आैर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को मोहब्बत की नगरी आगरा में गुरुवार को एक बार फिर निर्विरोध पार्टी का अध्यक्ष चुना गया. ताजनगरी आगरा में चल रहे सपा के 10वें राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान उन्हें पार्टी का अध्यक्ष चुना गया. वह लगातार दूसरी बार पार्टी के अध्यक्ष चुने गये हैं.

इसे भी पढ़ेंः सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में आज अध्यक्ष चुने जायेंगे अखिलेश, मुलायम की मिल चुकी सरपरस्ती

निर्वाचन अधिकारी एवं सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने अखिलेश के निर्विरोध निर्वाचन की औपचारिक घोषणा की. इस घोषणा के दौरान सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव और उनके छोटे भाई व अखिलेश के प्रतिद्वंद्वी चाचा शिवपाल यादव मौजूद नहीं थे. इससे पहले पिछली एक जनवरी, 2017 को लखनऊ में हुए राष्ट्रीय अधिवेशन में अखिलेश को मुलायम सिंह यादव के स्थान पर सपा का अध्यक्ष बनाया गया था.

इस अधिवेशन में पार्टी की आेर से लिये गये फैसले के अनुसार, अखिलेश का कार्यकाल पांच वर्ष का होगा. उनके दोबारा अध्यक्ष बनने के साथ ही यह तय हो गया है कि वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव और 2022 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव उन्हीं के नेतृत्व में लड़ा जायेगा.

गौरतलब है कि सपा के 10वें राष्ट्रीय अधिवेशन से पहले गुरुवार को पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई, जिसमें अध्यक्ष के कार्यकाल की अवधि मौजूदा तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच साल कर दिया गया. अखिलेश का गुरुवार को सपा के अध्यक्ष पद पर दोबारा निर्वाचन महज औपचारिकता था, क्योंकि उन्हें चुनौती देने वाला कोई और उम्मीदवार नहीं था.
सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में देश भर से पार्टी के करीब 15,000 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं. इस अधिवेशन में विभिन्न राष्ट्रीय तथा स्थानीय मुद्दों पर विचार विमर्श किया जायेगा और आर्थिक तथा राजनीतिक प्रस्ताव पारित किये जायेंगे.

सपा का यह अधिवेशन ऐसे समय हो रहा है, जब पार्टी में अखिलेश और शिवपाल धड़ों में रस्साकशी का दौर जारी है. फिलहाल, हालात अखिलेश के पक्ष में नजर आ रहे हैं.

माना जा रहा था कि खुद को सपा के तमाम मामलों से अलग कर चुके मुलायम गत 25 सितंबर को लखनऊ में हुए संवाददाता सम्मेलन में अलग पार्टी या मोर्चे के गठन की घोषणा करेंगे, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर शिवपाल खेमे को करारा झटका दिया.

मुलायम के सहारे समाजवादी सेक्युलर मोर्चे के गठन की उम्मीद लगाये शिवपाल पर अब अपनी राह चुनने का दबाव है. शिवपाल के करीबियों का कहना है कि सपा के राष्ट्रीय अधिवेशन के बाद वह कोई फैसला ले सकते हैं.

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