अध्ययन से हुआ खुलासा, दुष्कर्म की पीड़िताओं की जांच में नहीं होता दिशानिर्देशों का पालन

नयी दिल्ली: अध्ययन में दावा किया गया है कि बलात्कार पीडतिाओं की चिकित्सा जांच स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरुप नहीं की जाती है. अध्ययन में इस प्रकार की चिकित्सा जांच करने के लिये स्वास्थ्य कर्मियों को समुचित प्रशिक्षण प्रदान करने की मांग की गयी है. यह अध्ययन कानून और न्याय मंत्रालय के न्याय […]
नयी दिल्ली: अध्ययन में दावा किया गया है कि बलात्कार पीडतिाओं की चिकित्सा जांच स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरुप नहीं की जाती है. अध्ययन में इस प्रकार की चिकित्सा जांच करने के लिये स्वास्थ्य कर्मियों को समुचित प्रशिक्षण प्रदान करने की मांग की गयी है. यह अध्ययन कानून और न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की सहायता से गैर सरकारी संगठन ‘पार्टनर्स फॉर लॉ इन डेवलपमेंट ‘ ने किया है.
इस अध्ययन में यह भी पाया गया कि कुछ बलात्कार पीडतिाओं को प्राथमिकी दर्ज कराने में पुलिस के हाथों उत्पीडन और अवरोध का अनुभव भी करना पडा. अध्ययन के मुताबिक प्राथिमिकी की प्रति तुरंत उपलब्ध नहीं करायी जाती है और अक्सर पीडतिाओं को इसकी प्रति हासिल करने के लिये पुलिस का चक्कर लगाना पडता है. हालांकि बाद में प्राथिमिकी की एक प्रति पीडतिों को भेज दी जाती है.
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