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नोटबंदी के बाद कालाधन पूरी तरह समाप्त हो गया, ऐसा कोई नहीं कह रहा : अरुण जेटली

Updated at : 31 Aug 2017 12:35 PM (IST)
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नोटबंदी के बाद कालाधन पूरी तरह समाप्त हो गया, ऐसा कोई नहीं कह रहा : अरुण जेटली

नयी दिल्ली : नोटबंदी पर हमेशा सवाल होते रहे हैं. कितना कालाधन वापस आया? कितने जाली नोट बंद हुए. विपक्ष हमेशा से इस सवाल को लेकर मुखर रहा है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि नोटबंदी का असर अनुमान के अनुरुप ही रहा है और इससे मध्यम और दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था को फायदा […]

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नयी दिल्ली : नोटबंदी पर हमेशा सवाल होते रहे हैं. कितना कालाधन वापस आया? कितने जाली नोट बंद हुए. विपक्ष हमेशा से इस सवाल को लेकर मुखर रहा है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आज कहा कि नोटबंदी का असर अनुमान के अनुरुप ही रहा है और इससे मध्यम और दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचेगा. रिजर्व बैंक के यह कहने के एक दिन बाद कि बंद किये गये 500, 1000 रुपये के करीब करीब सभी नोट बैंकिंग तंत्र में लौट आये हैं, जेटली ने कहा कि पैसा बैंकों में जमा हो गया है इसका मतलब यह नहीं है कि यह पूरा धन वैध है.

उन्होंने कहा, यह कोई नहीं कह रहा है कि नोटबंदी के बाद कालाधन पूरी तरह से समाप्त हो गया है. ‘ ‘ वित्त मंत्री ने कहा कि नोटबंदी के बाद जीएसटी लागू होने से प्रत्यक्ष कर राजस्व को अच्छा बढावा मिलेगा, क्योंकि इसके बाद कई नये लोग कर के दायरे में आये हैं. उन्होंने कहा कि नोटबंदी के बाद काफी नकदी बैंकों में जमा की गई. यह सरकार के लिये चिंता की बात नहीं है क्योंकि यह अर्थव्यवस्था के लिये अच्छा है कि अधिक से अधिक धन औपचारिक तंत्र में आया है.

रिजर्व बैंक ने कल कहा कि 500 और 1,000 रुपये के पुराने 15.44 लाख करोड नोटों में से करीब 99 प्रतिशत धन बैंकिंग तंत्र में आ चुका है. माल एवं सेवाकर (जीएसटी) के मामले में जेटली ने कहा इससे पडने वाले मुद्रास्फीतिक प्रभाव से बचा गया है और आने वाले समय में विभिन्न वस्तुओं की कर दरों में बेहतर तालमेल की गुंजाइश है.

वित्त मंत्री ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का एकीकरण का मामला सरकार के एजेंडे में है. देश को कम लेकिन मजबूत बैंकों की जरुरत है. बैंकों के फंसे कर्ज का समाधान करने के मुद्दे पर जेटली ने कहा कि इसमें समय लगेगा. इसके लिये कोई सजर्किल समाधान नहीं हो सकता है. उन्होंने कहा कि यदि निजी क्षेत्र अपने कर्ज का भुगतान नहीं कर पाता है तो किसी अन्य को इसके अधिग्रहण का अवसर मिलना चाहिये. रिजर्व बैंक पहले ही कर्ज लेकर उसे लौटाने में अक्षम बडे-बडे डिफाल्टर की सूची जारी कर चुका है और बैंकों को उनके खिलाफ दिवाला कारवाई शुरु करने की सिफारिश कर चुका है.

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