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गुरमीत राम रहीम मामले के बाद मनोहर लाल खट्टर के राजनीतिक भविष्य पर उठे गंभीर सवाल

Updated at : 26 Aug 2017 1:31 PM (IST)
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गुरमीत राम रहीम मामले के बाद मनोहर लाल खट्टर के राजनीतिक भविष्य पर उठे गंभीर सवाल

नयी दिल्ली : हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम के समर्थकों द्वारा शुरू की गयी हिंसा व आतंक को रोकने में पूरी तरह विफल रहे हैं. इससे पहले वे जाट आंदोलन के दौरान शुरू हुई हिंसा को रोकने में भी विफल हो गये थे. उनकी इन विफलताओं […]

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नयी दिल्ली : हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम के समर्थकों द्वारा शुरू की गयी हिंसा व आतंक को रोकने में पूरी तरह विफल रहे हैं. इससे पहले वे जाट आंदोलन के दौरान शुरू हुई हिंसा को रोकने में भी विफल हो गये थे. उनकी इन विफलताओं के बाद अब उनके राजनीतिक भविष्य पर सवाल उठ खड़ा हुआ है. इस चुनौती से निबटने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के अतिरिक्त दोनों जगहों पर सत्ता में कायम भारतीय जनता पार्टी के अंदर भी बैठकों का दौर जारी है. हरियाणा में हिंसा भड़कने के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने नरेंद्र मोदी से भेंट की है. समझा जाता है कि इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने राज्य के हालात पर चर्चा की है. दोनों खट्टर की कार्यशैली से नाराज बताये जा रहे हैं. अमित शाह ने मनोहर लाल खट्टर को दिल्ली भी तलब किया है.

यह कयास लगाया जा रहा है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की जोड़ी मनोहर लाल खट्टर को और अधिक समय तक हरियाणा में मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बनाये रखेगी? मोदी-शाह की चुनौती मौजूदा शासन के साथ पौने दो साल बाद शुरू होने वाली लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया हो लेकर भी है, जिसके लिए उन्होंने 350 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है. ऐसे में वे कोई ऐसी चूक नहीं करना चाहेंगे या फिर कोई ऐसी कमजोर कड़ी को साथ नहीं बनाये रखेंगे जो उनके लिए परेशानी का सबब बने. मनोहर लाल खट्टर ने यह स्वीकार किया है कि स्थिति को नियंत्रण में करने में चूक हुई है, लेकिन हालात काे पटरी पर लाने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं.

जल्द ही नरेंद्र मोदी केंद्रीय कैबिनेट में फेरबदल करने जा रहे हैं. यह फेरबदल चुनाव के मद्देनजर होगा. इस दौरान इस बात की मजबूत संभावना है कि राज्य से भी कुछ चेहरों को केंद्र सरकार में लाया जाये.कैबिनेटमें राज्य के कुछ चेहरों को शामिल किया जासकताहै और केंद्रकेकुछ चेहरों को राज्य में भेजेजाने की संभावना को भी खारिज नहीं किया जा सकता है.इसबदलावमें चुनाव को ध्यानमेंरखा जायेगा. कुछ नये राजनीतिक सहयोगियों को भी कैबिनेट में जगह दी जायेगी.

नरेंद्र मोदी-अमित शाह की जोड़ी की अबतक की राजनीतिक शैली पूर्ववर्ती से अलग रही है. पूर्व में केंद्र में सरकार में रहे दल व नेता केंद्र व राज्य के चेहरों में बार-बार बदलाव करती रही है. मुख्यमंत्रियों को केंद्रीय मंत्री बनाना या राज्यपाल बनाना आम बात रही है. लेकिन, मोदी-शाह ने अबतक सिर्फ अपने गृहप्रदेश गुजरात में मुख्यमंत्री में बदलाव किया है.वहपटेलअांदोलन के कारणभाजपा कीराज्य में बिगड़ीस्थितिके कारण किया गया है.लेकिन,अब चुनाव के करीब पहुंचनेपर ऐसे संभावना अधिक मजबूत है कि वह कुछ राज्यों मेंफेर-बदलकरे.

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