ePaper

तमिलनाडु : दिनाकरन समर्थक विधायकों ने की बगावत, द्रमुक ने की विश्वासमत की मांग

Updated at : 22 Aug 2017 9:16 PM (IST)
विज्ञापन
तमिलनाडु : दिनाकरन समर्थक विधायकों ने की बगावत, द्रमुक ने की विश्वासमत की मांग

चेन्नई/पुडुचेरी : तमिलनाडु में सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक के दो धड़ों मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी खेमा और ओ पनीरसेल्वम धड़े के विलय से नाखुश अन्नाद्रमुक नेताओं शशिकला और टीटीवी दिनाकरन के वफादार विधायकों ने मंगलवारको राज्यपाल से कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री पलानीस्वामी पर भरोसा नहीं रहा है, जिसके बाद विपक्षी द्रमुक ने विश्वासमत हासिल करने की मांग पेश […]

विज्ञापन

चेन्नई/पुडुचेरी : तमिलनाडु में सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक के दो धड़ों मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी खेमा और ओ पनीरसेल्वम धड़े के विलय से नाखुश अन्नाद्रमुक नेताओं शशिकला और टीटीवी दिनाकरन के वफादार विधायकों ने मंगलवारको राज्यपाल से कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री पलानीस्वामी पर भरोसा नहीं रहा है, जिसके बाद विपक्षी द्रमुक ने विश्वासमत हासिल करने की मांग पेश कर दी. दिनाकरन समर्थक और आंडीपट्टी से विधायक थांगा तमिल सेल्वन ने राज्यपाल सी विद्यासागर राव से मुलाकात के बाद संवाददाताओं से कहा, ‘हम हमारा समर्थन करनेवाले विधायकों की मदद से एक नये मुख्यमंत्री को लाने के प्रयास शुरू कर रहे हैं.’ इससे एक दिन पहले ही पलानीस्वामी और बागी नेता पनीरसेल्वम के धड़ों का आपस में विलय हो गया था.

दिनाकरन का समर्थन कर रहे विधायक बाद में पुडुचेरी के एक रिसाॅर्ट के लिए रवाना हो गये. पुडुचेरी के रिसाॅर्ट में तमिल सेल्वन ने कहा, ‘हम यहां आराम करने आये हैं.’ उन्होंने यह नहीं बताया कि विधायक वहां कब तक रहेंगे. रिसाॅर्ट में कितने विधायक ठहरे हुए हैं, इस बारे में अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है. दिनाकरन खेमे ने सोमवार को 25 अन्नाद्रमुक विधायकों के समर्थन का दावा किया था. राजभवन के सूत्रों ने इस बात की पुष्टि की कि दिनाकरन के करीबी विधायकों ने मंगलवारको राज्यपाल से मुलाकात की, लेकिन उन्होंने इसका ब्योरा नहीं दिया. उन्होंने प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्यों की संख्या और राव के साथ हुई बातचीत की प्रकृति पर भी कुछ नहीं कहा.

जेल में बंद अन्नाद्रमुक महासचिव वीके शशिकला के भतीजे दिनाकरन के करीबी विधायकों की राव से मुलाकात के बाद सेल्वन ने कहा था, ‘हमने राज्यपाल को बताया है कि हमें मुख्यमंत्री पर भरोसा नहीं है.’ इस घटनाक्रम के बाद पलानीस्वामी ने उप-मुख्यमंत्री पनीरसेल्वम और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों के साथ विचार-विमर्श शुरू कर दिया. तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में अन्नाद्रमुक के 134 विधायक हैं. दिवंगत मुख्यमंत्री जयललिता की आरके नगर विधानसभा सीट अब भी खाली पड़ी है. द्रमुक के पास 89 सीट हैं और उसकी सहयोगी कांग्रेस के पास आठ तथा आइयूएमएल के पास एक सीट है.

घटनाक्रम को भुनाने का प्रयास करते हुए मुख्य विपक्षी द्रमुक ने राज्यपाल को पत्र लिखकर विधानसभा सत्र बुलाने और पलानीस्वामी को सदन में बहुमत साबित करने का निर्देश देने की मांग की. पलानीस्वामी सरकार के सामने शक्ति परीक्षण की संभावना के सवाल पर सेल्वन ने कहा कि हमारी मंशा तो यही है. उन्होंने दावा किया, ‘हमारा इरादा है कि विश्वास मत होना चाहिए ताकि उसके बाद नये मुख्यमंत्री की ताजपोशी हो.’ दिनाकरन का समर्थन करनेवाले विधायकों ने पलानीस्वामी के नेतृत्ववाले अम्मा खेमे और पनीरसेल्वम की अगुवाईवाले पुरची तलाइवी अम्मा धड़े के सोमवार को हुए विलय पर सवाल खड़ा करते हुए मुख्यमंत्री के खिलाफ जंग छेड़ दी है. तमिल सेल्वन ने पनीरसेल्वम के साथ विलय पर पलानीस्वामी की निंदा की.

तमिल सेल्वन ने 18 फरवरी को हुए विश्वास मत के संदर्भ में कहा, ‘122 अन्नाद्रमुक विधायकों ने पलानीस्वामी को मुख्यमंत्री इसलिए बनाया था, क्योंकि चिन्नम्मा (शशिकला) ने हमसे ऐसा करने को कहा था. पनीरसेल्वम ने सरकार के खिलाफ मतदान किया था.’ उन्होंने कहा, ‘वह पार्टी को अलग करना चाहते थे और सरकार गिराना चाहते थे. उसके बाद भी आपने उन्हें उप-मुख्यमंत्री का पद दे दिया. अब इसकी क्या जरूरत थी?’ उन्होंने पार्टी से शशिकला को हटाने के प्रयासों पर भी नाराजगी प्रकट करते हुए कहा कि फरवरी में पनीरसेल्वम की बगावत के बाद भी शशिकला की वजह से ही अन्नाद्रमुक सरकार चलती रही.

संबंधित घटनाक्रम में अन्नाद्रमुक (अम्मा) के उप-महासचिव दिनाकरन ने वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद आर वैथिलिंगम को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से हटाने की घोषणा की. एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी के विश्वासपात्र वैथिलिंगम ने कहा था कि जेल में बंद पार्टी प्रमुख शशिकला को अन्नाद्रमुक से हटाने के लिए कदम उठाये जायेंगे. इससे पहले विलय पर अपनी प्रतिक्रिया में दिनाकरन ने कहा कि यह पार्टी महासचिव शशिकला के साथ विश्वासघात है. सोमवार की रात ट्वीट करके उन्होंने इस व्यवस्था के ज्यादा समय तक चलने को लेकर भी आशंका जतायी. उन्होंने आरोप लगाया, ‘यह विलय नहीं है. यह स्वार्थ और पद की लालसा के लिए तथा पदों को बचाने के लिए हुई व्यावसायिक सहमति है.’ दिनाकरन ने यह दावा भी किया कि केवल अन्नाद्रमुक कार्यकर्ता ही नहीं, बल्कि जनता भी उन लोगों को माफ नहीं करेगी जिन्होंने जयललिता के निधन के बाद पनीरसेल्वम और पलानीस्वामी को मुख्यमंत्री बनानेवाली महासचिव के साथ धोखाधड़ी की. दोनों धड़ों के विलय के बाद ये ट्वीट आये.

दिनाकरन के करीबी विधायकों के राज्यपाल से मिलने पर प्रतिक्रिया देते हुए द्रमुक समेत विपक्षी दलों ने कहा कि पलानीस्वामी को अब बहुमत साबित करना चाहिए. द्रमुक के कार्यकारी अध्यक्ष और विधानसभा में विपक्ष के नेता एमके स्टालिन ने राव को लिखे पत्र में दावा किया कि 22 विधायकों द्वारा मुख्यमंत्री पर विश्वास नहीं होने की बात कहते हुए राज्यपाल को एक जैसे पत्र दिये जाने के बाद अभूतपूर्व संवैधानिक संकट खड़ा हो गया है. द्रमुक नेता ने कहा कि विधायकों द्वारा राव को पत्र दिये जाने के बाद पलानीस्वामी की अगुवाईवाली मौजूदा सरकार अपना बहुमत खो चुकी है. उन्होंने कहा कि कर्नाटक में ऐसे ही एक मौके पर राज्य के राज्यपाल ने तत्कालीन मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा को सदन में बहुमत साबित करने का निर्देश दिया था. स्टालिन ने बाद में संवाददाताओं से कहा कि उनकी पार्टी उचित समय पर विश्वास मत को लेकर सही फैसला करेगी. पीएमके नेता अंबुमणि रामदास ने भी कहा कि विधायकों के विद्रोह के बाद पलानीस्वामी सरकार को बहुमत साबित करना होगा.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola