Uttarakhand Glacier Disaster : लोहरदगा के 9 लोगों का नहीं चल रहा है पता, परिजनों ने CM हेमंत सोरेन से लगायी गुहार

Uttarakhand Glacier Disaster, Jharkhand News, Lohardaga News : लोहरदगा के बेठहठ गांव के ज्योतिष बाखला, मंजनू बाखला, उर्बनुष बाखला, सुनील बाखला, नेमहस बाखला, रवींद्र उरांव, दीपक कुजूर, विक्की भगत एवं प्रेम उरांव गत 23 जनवरी, 2021 को पॉवर प्रोजेक्ट में काम करने के लिए उत्तराखंड गये थे. इनलोगों को विक्की भगत द्वारा काम करने ले गया था, जो अब तक लापता है.
Uttarakhand Glacier Disaster, Jharkhand News, Lohardaga News, लोहरदगा (गोपी कुंवर) : उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने के बाद हुई तबाही से NTPC Power Project में काम कर रहे लोहरदगा जिला अंतर्गत किस्को प्रखंड के बेठहठ पंचायत स्थित महुरांग टोली, डाड़ी टोली एवं चोरटांगी के 9 लोगों के लापता होने के बाद परिवार वाले का रो- रोकर बुरा हाल है. ग्लेशियर टूटने के बाद प्रोजेक्ट में काम कर रहे लोगों का फोन स्विच ऑफ आने के बाद से उनके परिजन काफी परेशान हैं. परिजनों ने हेमंत सरकार से इन लोगों को खोजने की अपील की है.
जानकारी के अनुसार, बेठहठ गांव के ज्योतिष बाखला, मंजनू बाखला, उर्बनुष बाखला, सुनील बाखला, नेमहस बाखला, रवींद्र उरांव, दीपक कुजूर, विक्की भगत एवं प्रेम उरांव गत 23 जनवरी, 2021 को पॉवर प्रोजेक्ट में काम करने के लिए उत्तराखंड गये थे. इनलोगों को विक्की भगत द्वारा काम करने ले गया था, जो अब तक लापता है.
विक्की भगत पूर्व में ही कुछ दिनों काम करने के बाद अच्छी कमाई की बात कहते हुए 9 लोगों को गत 23 जनवरी, 2021 को उत्तराखंड ले गया था. परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण लोग दूसरे राज्यों में पलायन किये थे जो कि तबाही के बाद से लापता हैं.
परिवार वालों को समाचार के माध्यम से ग्लेशियर टूटने की बात की जानकारी हुई. इसके बाद परिवार वालों द्वारा काम करने गये अपने परिवार के पास फोन पर संपर्क साधने का प्रयास किया. लेकिन, फोन नहीं लगने से परिवार के माता- पिता, पत्नी और बच्चे काफी सदमे में हैं. वहीं, लोग अपनों से बिछुड़ने की दुख में कुछ भी बोल नहीं पा रहे हैं.
इस संबंध में परिजनों द्वारा जल्द तलाश करने की गुहार जिला प्रशासन समेत सीएम हेमंत सोरेन से कर रहे हैं. परिजनों ने प्रशासन द्वारा लोगों को काम नहीं दिये जाने एवं कम मजदूरी दर पर काम देने का आरोप लगाया है. परिवार के सदस्यों का कहना है कि लोगों को गांव में काम नहीं मिलने के कारण बाहर पलायन करना पड़ता है. काम मिलती भी है, तो कम मजदूरी दर के कारण पैसे नहीं बचते हैं. वहीं, राज्य से बाहर जाकर काम करने से जहां मजदूरी भी अच्छी मिलती है और पैसों की भी बचत होती है. यही कारण है कि लोग दूसरे राज्य में जाने को बाध्य होते हैं.
परिजनों का कहना है कि परिवार के सदस्यों के बाहर जाने के बाद हर वक्त डर लगा रहता है. बार- बार परिवार वालों द्वारा फोन पर बात होती रहती है, लेकिन ग्लेशियर टूटने के बाद बात नहीं होने से परिवार वाले अपने आप को रोक नहीं पा रहे हैं. लापता लोगों के परिजनों का कहना है कि रविवार को सुबह 9:00 से 10:00 बजे तक उत्तराखंड में काम कर रहे लोगों से बात हुई थी, उसके बाद से इन लोगों का मोबाइल स्विच ऑफ आ रहा है.
Posted By : Samir Ranjan.
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