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मौसम में उतार-चढ़ाव से धान के फसल में शीथ ब्लाईट रोग का प्रकोप

Updated at : 24 Sep 2025 7:07 PM (IST)
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मौसम में उतार-चढ़ाव से धान के फसल में शीथ ब्लाईट रोग का प्रकोप

शीथ ब्लाईट, लीफ ब्लाईट, शीथ राॅट, पत्र लक्षण व कीटों के प्रकोप से बर्बाद हो रही फसल, रोग के कारण व बचाव के उपाय साझा करते विशेषज्ञ

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शीथ ब्लाईट, लीफ ब्लाईट, शीथ राॅट, पत्र लक्षण व कीटों के प्रकोप से बर्बाद हो रही फसल

रोग के कारण व बचाव के उपाय साझा करते विशेषज्ञ

औरंगाबाद/अंबा. मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव होने से विभिन्न क्षेत्रों में धान की फसल में भयंकर रोग का प्रकोप दिख रहा है. ऐसे में खेतिहर काफी चिंतित हैं. पौधा का डंठल नीचे से भूरा, काला , नीला और चितकाबर होकर सड़ने लगा है. हरी-भरी फसल एकाएक बर्बाद होते देखकर किसानों के सूझबूझ काम नहीं कर रहा है. खासकर रोग व कीट व्याधि का प्रभाव एमटीयू 7029 धान में अधिक धान देखने को मिला है. हालांकि, इस बार मौसम अनुकूल रहने से धान की बेहतर उपज होने की संभावना जतायी जा रही थी. किसान अपने मन में कई तरह की अरमान संजोए हुए थे. अचानक मौसम के तापमान बढ़ने व उमस भरी गर्मी से फसल में भयंकर फफूंद जनित बीमारी व कीट व्याधि पनपने लगी है. किसान रसायनिक दवा विक्रेता से संपर्क साध कर कोई कारगर उपाय तलाश रहे हैं. अनबूझ दवा विक्रेता किसानो को कई तरह की दवाओं का प्रयोग करने का सुझाव दे रहे है. स्थानीय कृषक रामचंद्र सिंह, शिवनाथ पांडेय, सुदर्शन सिंह व अजीत कुमार तथा दुर्गेश यादव ने बताया कि उनके फसल का डंठल से नीचे से लेकर ऊपर तक सड़ रहा है. धान में फफूंद जनित रोग लगने से कुटुंबा के सुही, दुधमी, बुमरू, रामपुर, रसलपुर, झिकटीया देवरिया, दरियापुर, बाकन आदि गांव में फसल बर्बाद हो रही है. किसानो ने जिला कृषि पदाधिकारी का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराते हुए रोग पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए तत्काल ड्रोन से दवा छिड़काव करने की गुहार लगायी है.

क्या बताते हैं डीएओ

डीएओ संदीप राज ने बताया कि रोग ग्रस्त क्षेत्र में भ्रमण कर पौधा का निरीक्षण किया जायेगा. इसके साथ हीं किसान को उपयुक्त दवा छिड़काव करने की सुझाव दिया जायेगा. उन्होंने बताया कि धान के फसल में शीथ ब्लाईट गंभीर फंगल रोग है, जो पत्तियों और तना के आवरण को नुकसान पहुंचाता है. रोग पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए तत्काल दवा का प्रयोग करना जरूरी होता है. इसके लिए किसानों को विभाग से संपर्क कर तत्काल नियंत्रण के लिए उपाय करना चाहिए.

खेत में मेढ़ किनारे से शुरू होता है शीथ ब्लाईट रोग

अंन्नदाता परामर्श केंद्र अंबा के संचालक सह मौसम विशेषज्ञ डाॅ अनूप कुमार चौबे ने बताया कि शीथ ब्लाईट खेत के मेढ़ से शुरू होकर पूरे खेत में फैल जाता है. रोग लगने का मुख्य लगातार फसल लगे खेतो में जलजमाव, यूरिया का अत्यधिक प्रयोग व पौधा का अधिक घना होना माना जाता है. रोग लगने पर तुरंत खेत से पानी निकाल देना चाहिए.

क्या है वैक्टिरियल लीफ ब्लाईट रोग

मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि वैक्टिरियल लीफ ब्लाईट को हीं जीवाणु झुलसा रोग भी कहा जाता है. यह बीमारी धान के फसल में जीवाणु के कारण होती है. रोगग्रस्त पौधा की पत्तिंया पीली पड़कर उपर से सुखने लगती है. इससे कृषक को भारी नुकसान होता है. रोग पर नियंत्रण स्थापित करने के लिए किसान को स्ट्रैपटोसाईक्लिन 1 ग्राम दवा 6 से 10 लीटर पानी और काॅपर ऑकक्सिक्लीराइड रसायनिक दवा तीन ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर फसल पर स्प्रे करना चाहिए. उन्होंने बताया कि एक हेक्टेयर जमीन में लगे फसल के लिए कम-से-कम 500-600 लीटर पानी जरूरी है.

शीथ ब्लाईट रोग को प्रेपिकैनाजोल है कारगर दवा

मौसम वैज्ञानिक ने बताया कि पर्ण झुलसा रोग को शीथ ब्लाईट के नाम से किसान जानते है. कई किसान इस बीमारी को कोढिया रोग भी कहते है. समान्तयः यह रोग जहां से पत्तियों को निकलना शुरू होता है, वहीं पर से इसका प्रकोप दिखता है. इस रोग के रोकथाम के लिए वेलिडामाईसीन या प्रोपिकोनाजोल दवा को दो एमएल प्रति लीटर पानी में छिड़काव करने से शीथ ब्लाईट रोग पर नियंत्रण स्थापित किया जा सकता है.

उपज करता है प्रभावित

प्रधान वैज्ञानिक डाॅ नित्यानंद ने बताया कि शीथ ब्लाईट रोग में फसल के पत्ते और डंठल पर काले धब्बे बनने लगते है. इससे गाभा में हीं बाली सड़ जाता है. इसके लिए भी प्रेपिकोनाजोल कारगर दवा है. पत्र लक्षण में पत्तियों पर टिकुली के जैसा काला भूरा धब्बा बन जाता है. अगर ससमय उपचार नहीं किया गया तो कई धब्बे आपस में मिलकर पूरी पत्तियों में फैल जाता है. उन्होंने बताया कि मौसम के न्यूनतम व अधिकतम तापमान में कमी आने से पौधा ज्यादा कोमल हो गया था. बारिश के बाद तापमान बढ़ने से रोग का प्रकोप हुआ है.

ओरडीह पहाड़ के समीप ब्रह्मस्थान से देसी शराब जब्त

कुटुंबा.

कुटुंबा थाने की पुलिस ने थानाक्षेत्र के ओरडीह पहाड़ के समीप से देसी महुआ चुलाई शराब बरामद की है. यह कार्रवाई एएसआइ पंकज कुमार ने बुधवार की सुबह के पहर में की है. उन्होंने बताया कि पुलिस को गुप्त रूप से सूचना मिली कि शराब ब्रह्मस्थान के आसपास मेें उगी झाड़ी मेें छिपा कर रखा हुआ है. पुलिस जब वहां पहुंची तो झाड़ी से प्लास्टिक की पन्नी में करके बोरी में रखी हुई 75लीटर महुआ चुलाई शराब जब्त हुई. हालांकि, धंधेबाज पुलिस को पहुंचने से पहले हीं फरार हो गये थे. थानाध्यक्ष ने बताया कि धंधेबाज को पत्ता लगाने में पुलिस जुट गयी है. मामले में अज्ञात धंधेबाज के एफआईआर दर्ज कर बिहार राज्य मद्यनिषेध उत्पाद अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू कर दी गयी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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