ध्वस्त करने योग्य जलमीनार की करा दी गयी मरम्मति

1997 में जलमीनार को कराना था ध्वस्त, 2020 तक हुई आपूर्ति
1997 में जलमीनार को कराना था ध्वस्त, 2020 तक हुई आपूर्ति विभाग पर सवाल – भुगतान प्रक्रिया पर लगा दी गयी है रोक – 1967 में 30 वर्षों के लिए जलमीनार का हुआ था निर्माण – विकल्प के अभाव में 2020 तक जलमीनार से की गयी पानी की आपूर्ती पीयूष तिवारी, गढ़वा कार्यों को लेकर अक्सर विवादों में रहने वाला पेयजल एवं स्वच्छता विभाग एक बार फिर चर्चा में है. जिस जलमीनार को ध्वस्त किया जाना चाहिए था, उसकी विभागीय स्तर पर मरम्मति करा दी गयी. हालांकि मामला उजागर होने के बाद इसके प्राक्कलन को रद्द कर दिया गया और भुगतान प्रक्रिया रोक दी गयी है. यह मामला गढ़वा शहर के सबसे पुराने जलमीनार से जुड़ा है. सहिजना मोड़ स्थित विभागीय प्रांगण में बना यह जलमीनार वर्ष 1967 में निर्मित हुआ था. इसकी क्षमता 80 हजार गैलन है और इसका कूप दानरो नदी सहिजना में स्थित है, जो अब डेड हो चुका है. जलमीनार 30 वर्ष की अवधि के लिए तैयार किया गया था, लिहाजा इसे 1997 में ही खतरनाक घोषित कर ध्वस्त कर दिया जाना चाहिए था. लेकिन विकल्प के अभाव में वर्ष 2020 तक इसी से शहर को पानी की आपूर्ति की जाती रही. शहरी जलापूर्ति योजना (कोयल नदी से पानी आपूर्ति) शुरू होने के बाद से यह जलमीनार पूरी तरह बंद है और पिछले चार-पांच साल से इसमें पानी नहीं भरा गया है. इसके बावजूद वर्तमान वित्तीय वर्ष 2024-25 में इसकी मरम्मति करा दी गयी, जिसे कुछ माह पूर्व पूरा भी कर लिया गया. बताया जाता है कि मरम्मति के नाम पर करीब 20 लाख रुपये निकालने की तैयारी थी. हालांकि वर्तमान कार्यपालक अभियंता अजय कुमार सिंह ने भुगतान प्रक्रिया रोक दी. भूकंप या कंपन से गिर सकता है जलमीनार 1967 में बने इस जलमीनार की आयु 30 वर्ष थी, लेकिन यह करीब 58 वर्षों से खड़ा है. अब यह जर्जर व खतरनाक हो चुका है. इसके गिरने से जानमाल की बड़ी क्षति हो सकती है. कनिष्ठ अभियंता सिकंदर ने बताया कि इसे ध्वस्त करने के लिए विभाग को पत्र लिखा जा रहा है, क्योंकि विभागीय स्वीकृति और राशि आवंटन के बिना इसे गिराया नहीं जा सकता. उन्होंने चेतावनी दी कि भूकंप या किसी बड़े कंपन की स्थिति में यह ढह सकता है. उल्लेखनीय है कि इसके चारों ओर भीड़भाड़ वाला इलाका है, जिसमें सब्जी बाजार, डाकघर, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग का कार्यालय, जिला परिषद की दुकानें, नगर परिषद का पुराना कार्यालय और कई फुटपाथी दुकानें स्थित हैं. जलमीनार डेड होने की वजह से राशि का भुगतान नहीं होगा : कार्यपालक अभियंता कार्यपालक अभियंता अजय कुमार सिंह ने बताया कि मौखिक आदेश पर एक संवेदक द्वारा इसकी मरम्मति करायी गयी थी. लेकिन जलमीनार डेड घोषित है, इसलिए इसके भुगतान की कोई गुंजाइश नहीं है. यह मामला उनके पदभार ग्रहण करने से पूर्व का है.
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