Political news : एसआइआर लाकर लोकतंत्र को खत्म करने में लगी है केंद्र सरकार : शिल्पी

Edited by RAJIV KUMAR
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असम पहुंचीं कृषि मंत्री शिल्पी, बीएलए ट्रेनिंग प्रोग्राम में हुईं शामिल

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रांची.

कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा है कि एसआइआर के माध्यम से केंद्र सरकार लोकतंत्र खत्म करने की साजिश कर रही है. आज वोट चोर, गद्दी छोड़ का नारा राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन का रूप लेता जा रहा है. राजनीति का स्तर या लक्ष्मण रेखा नाम की कोई चीज बची नहीं है. राजनीतिक लाभ लेने के लिए हर हथकंडा अपनाया जा रहा है. कृषि मंत्री दो दिवसीय असम दौरे पर हैं. वहां पार्टी द्वारा आयोजित बीएलए ट्रेनिंग कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचीं.

उन्होंने असम के सीएम का नाम लिये बगैर कहा कि जब राज्य की जनता बाढ़ से बेहाल थी, तब वो झारखंड में राजनीति कर रहे थे. लोगों को जाति और धर्म के नाम पर बांटने व समाज में नफरत फैलाने का काम कर रहे थे. लेकिन, राज्य की जनता ने लोकप्रिय सरकार का गठन कर मुंहतोड़ जवाब दिया. उन्होंने कहा कि बिहार के बाद असम में एसआइआर लाने की तैयारी है. संविधान को बदलने और कमजोर करने की हर कोशिश हो रही है. बिहार में एसआइआर के नाम पर 65 लाख लोगों के नाम कट चुके हैं. इसके लिए असम की जनता को तैयार रहना होगा. झारखंड ने जिस तरह से लोकप्रिय सरकार का गठन कर जवाब दिया, असम की जनता भी जरूर कल्याणकारी सरकार को चुन कर इनके सपनों को चकनाचूर कर देगी.

असम के डिब्रूगढ़ में जनी शिकार उत्सव में शामिल हुईं

कृषि मंत्री असम के डिब्रूगढ़ में जनी शिकार उत्सव में भी शामिल हुईं. ऑल आदिवासी वीमेंस एसोसिएशन ऑफ असम और ऑल आदिवासी स्टूडेंट एसोसिएशन ऑफ असम की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया गया था. मौके पर कृषि मंत्री ने कहा कि जनी शिकार उरांव जनजाति द्वारा हर 12 साल पर मनाया जाने वाला पारंपरिक उत्सव है. यह मुगलों के खिलाफ आदिवासी महिलाओं की रोहतासगढ़ किले की जीत की याद दिलाता है. यह महिलाओं की वीरता और साहस को प्रदर्शित करता है. परंपरा ऐसी विरासत है, जिसे हम पीढ़ी दर पीढ़ी छोड़ कर जाते है. मंत्री ने कहा कि 200 साल पुराने शोषण का दर्द असम के आदिवासी समाज से जुड़ा है. टी ट्राइब्स राज्य में लचर स्वास्थ्य व्यवस्था, बच्चों की शिक्षा, कम वेतन पर ज्यादा काम करने की मजबूरी और सबसे ज्यादा जरूरी एसटी की सूची में अपना नाम दर्ज कराने के दर्द से जूझ रही है. महिला सशक्तीकरण की दिशा में पिछले 200 सालों से संघर्ष चल रहा है. इस संघर्ष को मुकाम तक पहुंचाने के लिए हम सभी उनके साथ हैं.

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