उप मुख्य संवाददाता, मुजफ्फरपुर जिले के महान सपूत, प्रखर स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व मंत्री स्वर्गीय नवल किशोर सिन्हा की 104वीं जयंती पर जिले के शिक्षाविद व सामाजसेवियों ने उनके किये गये कार्यों व व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला. इसमें पूर्व सिनेटर प्रो. अरूण कुमार सिंह ने बताया कि पारू प्रखंड के धरफरी गांव के एक संभ्रांत परिवार में जन्मे ”नवल बाबू” का व्यक्तित्व भारतीय राजनीति में शुचिता और ईमानदारी का प्रतीक माना जाता है. उन्होंने उनके राजनीतिक सफर की जानकारी देते हुये बताया कि नवल बाबू ने 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान शहर के छाता चौक पर गिरफ्तारी दी और एक वर्ष की जेल काटी. आजादी के बाद वे 1952 के प्रथम आम चुनाव में पारू से विधायक चुने गए और डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के मंत्रिमंडल में मुख्य सचेतक रहे. उन्होंने 1952 से 1967 तक लगातार विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की और विभिन्न मंत्रालयों का कार्यभार संभाला. 1971 में वे मुजफ्फरपुर से सांसद चुने गए, जहां उन्होंने संसद में क्षेत्र के विकास की आवाज बुलंद की. सहकारिता और शिक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान उन्हें जिले में सहकारी आंदोलन का जनक माना जाता है. मुजफ्फरपुर सेंट्रल कोपरेटिव बैंक की स्थापना और विस्कोमान को ऊंचाइयों पर पहुंचाने में उनकी निर्णायक भूमिका रही. शिक्षा के प्रति उनका लगाव ऐसा था कि उन्होंने अपने पैतृक गांव में विद्यालय निर्माण के लिए स्वयं की जमीन दान कर दी. लंगट सिंह कॉलेज के छात्र रहे नवल बाबू ने शहर के एमडीडीएम कॉलेज और एमपी सिन्हा साइंस कॉलेज की स्थापना में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया. 12 मार्च 1982 को राजनीति के इस ”अजातशत्रु” का निधन हो गया, लेकिन उनके द्वारा स्थापित संस्थान और उनकी ईमानदारी आज भी भावी पीढ़ी के लिए प्रेरणापुंज बनी हुई है.
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