मासिक कवि गोष्ठी में कवियों ने प्रस्तुत की अपनी नवीनतम रचनाएं
Edited by Rajeev Murarai Sinha Sinha
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स्थानीय प्रभात चौक स्थित एक होटल के सभागार में रामबालक सिंह उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में रविवार को कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया
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लखीसराय
. स्थानीय प्रभात चौक स्थित एक होटल के सभागार में रामबालक सिंह उपाध्यक्ष की अध्यक्षता में रविवार को कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया. जिसमें नवलकंठ पत्रिका के प्रकाशन पर भी विचार किया गया और चुनाव संबंधी भी बातें हुई. चुनाव का भी समय हो गया है. अब संगठन का चुनाव माह सितंबर में किया जाना है. कवि गोष्ठी में सभी कवियों ने अपनी अपनी कविताओं और रचनाओं से समाज और देश दुनिया की समस्याओं को रखा. रामबालक सिंह की रचना ‘चाटि गेलै दीमक कलियुग में, नेता के ईमान के’. सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह की रचना ‘गिरता स्तर, हालत बदतर’. जीवन पासवान की रचना ‘नेता के बाजार में वोटों की हो रही चोरी’. राजेश्वरी प्रसाद सिंह की रचना ‘सुनो, सुनो, सुनो, मेरी निहत्थी आवाज सुनो’. बलजीत कुमार की रचना ‘जहां तक मेरी नज़र जाती है, इंसान कम चील, गिद्ध, ज्यादा नजर आती है’. कामेश्वर प्रसाद यादव की रचना ‘लाखों कुर्बानी देकर हमने आजादी पायी है’. अंकित कुमार वत्स की रचना ‘हर दल दलदल में मुफ्त खोरी में लोकलुभावन ले संज्ञान’. गुलशन कुमार की रचना ‘राष्ट्र की है राजभाषा, भारत की परिभाषा हिंदी’ का पाठ किया गया. वहीं इस दौरान 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाने पर भी चर्चा हुई. नवलकंठ के प्रधान संपादक अरविंद कुमार भारती ने दूरभाष पर बताया कि हिंदी दिवस को ही नवलकंठ पत्रिका का प्रकाशन किया जायेगा.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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