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करम पर्व प्रकृति, पर्यावरण और सामाजिक समरसता से जुड़ा हुआ है : सुखदेव भगत

Updated at : 31 Aug 2025 10:06 PM (IST)
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करम पर्व प्रकृति, पर्यावरण और सामाजिक समरसता से जुड़ा हुआ है : सुखदेव भगत

करम पर्व प्रकृति, पर्यावरण और सामाजिक समरसता से जुड़ा हुआ है : सुखदेव भगत

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लोहरदगा़ सदर प्रखंड परिसर स्थित न्यू नगर भवन में आदिवासी कर्मचारी समिति लोहरदगा के बैनर तले करम पूर्व संध्या समारोह का आयोजन धूमधाम से किया गया. कार्यक्रम की शुरुआत आदिवासी रीति-रिवाज से हुई. प्रार्थना, अन्ना अर्पण और कलश पर दीप प्रज्ज्वलित कर सांसद सुखदेव भगत, अपर समाहर्ता जितेंद्र मुंडा, आइटीडीए परियोजना निदेशक सुषमा नीलम सोरेंग, एलआरडीसी सुजाता कुजूर एवं पंचायती राज पदाधिकारी अंजना दास ने संयुक्त रूप से उद्घाटन किया. मंच संचालन आदिवासी कर्मचारी समिति के अध्यक्ष किशोर उरांव ने किया. समारोह में पहुंचे सभी अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ और आदिवासी शॉल भेंटकर किया गया. इस मौके पर सांसद सुखदेव भगत ने कहा कि करम पर्व प्रकृति, पर्यावरण और सामाजिक समरसता से गहराई से जुड़ा हुआ है. आदिवासी समाज प्रकृति का पूजक है और करमा डाली को देवता मानकर पेड़-पौधों, जंगलों और फसलों की रक्षा व उन्नति की कामना करता है. उन्होंने कहा कि करमा त्योहार में पूरा खेत हरियाली से लहलहाता है. पूर्वजों की परंपरा के अनुसार खेतों में भेलेवा डाली गाड़ने से फसल में कीटों का प्रकोप नहीं होता और अच्छी पैदावार होती है. आदिवासी समाज कृषि आधारित जीवन व्यतीत करता है और करम पर्व इसी जीवन पद्धति का प्रतीक है. इस दौरान उन्होंने सभी को करमा पर्व की शुभकामना दीं. करमा त्योहार सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश देता है : अपर समाहर्ता जितेंद्र मुंडा ने कहा कि करमा त्योहार सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश देता है. गीत, नृत्य और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से समाज में मेल-जोल और एकजुटता बढ़ती है. करम वृक्ष की टहनी की पूजा करना पर्यावरण संरक्षण और संतुलित जीवन का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि यह त्योहार धरती, प्रकृति और समृद्धि की प्रार्थना करने का अवसर है. इस मौके पर सुषमा नीलम सोरेंग, सुजाता कुजूर और अन्य अधिकारियों ने भी करमा पर्व को सामाजिक व सांस्कृतिक धरोहर बताया और सभी को शुभकामना दीं. गौरतलब है कि करमा पर्व भादो मास की एकादशी को मनाया जाता है. इस दिन माताएं और बहनें उपवास रखकर करमा डाली की पूजा करती हैं और आने वाले वर्ष में अच्छी फसल, धन और समृद्धि की कामना करती हैं. समारोह में आदिवासी परंपरागत गीत-संगीत और नृत्य का मनमोहक प्रदर्शन हुआ, जिसमें काफी संख्या में लोगों ने भाग लिया. कार्यक्रम में आदिवासी समाज के लोगों के साथ-साथ विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी एवं स्थानीय ग्रामीणों की भी काफी उपस्थिति रही. पूरा माहौल उत्सवधर्मी और सांस्कृतिक रंग में रंगा रहा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SHAILESH AMBASHTHA

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