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जीवन दर्शन का आधार हैं पौराणिक ग्रंथ

Updated at : 08 Jan 2026 7:23 PM (IST)
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जीवन दर्शन का आधार हैं पौराणिक ग्रंथ

डी-18 विवि के संस्कृत विभाग में हुए व्याख्यान में उभरे विचार वक्ताओं ने कहा-पुराणों के बिना वेदों को समझना कठिन उप मुख्य संवाददाता, मुजफ्फरपुर बीआरएबीयू के संस्कृत विभाग

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डी-18 विवि के संस्कृत विभाग में हुए व्याख्यान में उभरे विचार वक्ताओं ने कहा-पुराणों के बिना वेदों को समझना कठिन उप मुख्य संवाददाता, मुजफ्फरपुर बीआरएबीयू के संस्कृत विभाग में पुराणों की प्रामाणिकता एवं प्रासंगिकता विषय पर विशिष्ट व्याख्यान हुआ. विवि के 75वें वर्ष (अमृत महोत्सव) के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में विद्वानों ने वर्तमान जीवन में पौराणिक ज्ञान की अनिवार्यता पर विचार रखा. मुख्य वक्ता वाराणसी के सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो राजीव रंजन सिन्हा ने कहा कि यद्यपि सनातन समाज की वेदों में अटूट आस्था है, किंतु जन-सामान्य के लिए उन्हें समझना कठिन है. पुराण इसी कमी को पूरा करते हैं. ये वेदों के गूढ़ रहस्यों को सरल कथाओं के माध्यम से समझाते हैं और मनुष्य को क्या करना चाहिए और किन बुराइयों से बचना चाहिए, इसका स्पष्ट मार्गदर्शन करते हैं. कार्यक्रम के संरक्षक व मुख्य अतिथि कुलपति प्रो दिनेश चन्द्र राय ने कहा कि ये आयोजन शैक्षणिक गरिमा को बढ़ाते हैं. विभागाध्यक्ष प्रो श्यामबाबू शर्मा, प्रो निभा शर्मा, प्रो मनोज कुमार, प्रो संगीता अग्रवाल, डॉ मनीष झा, प्रो वीणा मिश्रा, प्रो राजीव, प्रो श्रीप्रकाश पांडेय, प्रो अमरेन्द्र ठाकुर आदि उपस्थित थे.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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SUNIL KUMAR

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