नगर निगम : होल्डिंग टैक्स कलेक्शन में तेजी, सर्वे का कार्य सुस्त

Published by : VINAY PANDEY Updated At : 01 Sep 2025 7:04 PM

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होल्डिंग टैक्स कलेक्शन में काफी तेजी दिख रहा है, लेकिन होल्डिंग एवं ट्रेड सर्वे का काम काफी सुस्त है.

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सीतामढ़ी. नगर निगम का होल्डिंग टैक्स कलेक्शन में काफी तेजी दिख रहा है, लेकिन होल्डिंग एवं ट्रेड सर्वे का काम काफी सुस्त है. सर्वे का काम पिछले वर्ष तक पूर्ण होना था, लेकिन अब तक अधूरा है. होल्डिंग टैक्स कलेक्शन एवं सर्वे का काम देख रही स्पैरो सॉफ्टेक प्राइवेट लिमिटेड के स्थानीय प्रोजेक्ट मैनेजर चंदन प्रकाश से मिली जानकारी के अनुसार, सर्वे के कार्य में सुस्ती के पीछे का कारण कंपनी के कर्मचारियों को पहले जनगणना कार्य में लगाया गया था और बाद में अंचल में जमीन सर्वे से संबंधित कार्यों में लगाया गया था. इसको लेकर देरी हुई है, लेकिन अब सर्वे के कार्य में तेजी लायी जायेगी. वहीं, होल्डिंग टैक्स की बात करें, तो स्पैरो सॉफ्टेक द्वारा जब से जिम्मेवारी संभाली गयी है, तब से साल दर साल कलेक्शन का रिकॉर्ड बन रहा है. पिछले वित्तीय वर्ष यानी वर्ष 2024-25 में जहां करीब 14400 मकानों से पांच करोड़ 37 लाख 17 हजार 784 रुपये का कलेक्शन किया गया था. वहीं, फाइनेंशियल वर्ष 2025-26 में अगस्त तक 8037 घरों से दो करोड़ 57 लाख 47 हजार 569 रुपये बतौर होल्डिंग टैक्स के रूप में कलेक्शन किया गया है. चालू फाइलेंशियल वर्ष में अभी करीब सात महीने से अधिक का समय बांकी है. चालू वित्तीय वर्ष में भी पांच करोड़ से अधिक टैक्स कलेक्शन की उम्मीद जतायी जा रही है. प्रोजेक्ट मैनेजर चंदन प्रकाश ने बताया कि इस दौरान करीब 600 घरों का नया कर निर्धारण भी करते हुए उनसे टैक्स की वसूली की गयी है. — होल्डिंग टैक्स पर एक अक्टूबर से लगेगी पेनाल्टी प्रोजेक्ट मैनेजर चंदन प्रकाश ने बताया कि सितंबर महीने तक होल्डिंग टैक्स अदा करने पर होल्डिंग धारियों को न तो कोई पेनाल्टी लगेगी और न ही छूट दी जायेगी. वहीं, एक अक्टूबर से पांच परसेंट पेनाल्टी लगना शुरू हो जायेगा. — 305 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के पास ही है ट्रेड लाइसेंस ट्रेड सर्वे के अधूरे रहने के चलते नगर निगम को राजस्व की हानि हो रही है. नगर निगम क्षेत्र में हजारों की संख्या में छोटे-बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान एवं दुकान चल रहे हैं, लेकिन इनमें से 305 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के पास ही ट्रेड लाइसेंस है और इनके द्वारा ट्रेड शुल्क अदा किया जा रहा है. शेष तमाम व्यावसायिक प्रतिष्ठान बगैर ट्रेड लाइसेंस और बगैर शुल्क के ही चल रहे हैं. हालांकि, हाल के वर्षों में जितने भी शॉपिंग मोल्स खुले हैं, उनके पास ट्रेड लाइसेंस है. वहीं, शहर के मुख्य पथ के कुछ बड़े शो-रूम वालों के पास भी ट्रेड लाइसेंस है और वे शुल्क अदा कर रहे हैं. स्पैरो के प्रोजेक्ट मैनेजर चंदन प्रकाश के अनुसार, इस वर्ष ट्रेड लाइसेंसधारियों से करीब एक लाख से अधिक की राशि की वसूली की गयी है.

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