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नेताओं के दल-बदल से किशनगंज में विधानसभा चुनाव होगा रोचक

किशनगंज जिले में चार विधानसभा की है सीटें

-एनडीए और महागठबंधन की सीधी लड़ाई को एआईएमआईएम बना सकता है त्रिकोणीय

-जनसुराज भी राजनीतिक जमीन की तलाश में है जुटी

-किशनगंज जिले में चार विधानसभा की है सीटें

किशनगंज . पश्चिम बंगाल के मुहाने पर अवस्थित किशनगंज जिले में विधानसभा चुनाव की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है. जिले में चार विधानसभा सीट है चारों पर महागठबंधन के सिटिंग विधायक है. पिछले विधानसभा चुनाव में बहादुरगंज और कोचाधामन सीट पर एआईएमआईएम ने जीत दर्ज की थी हालांकि उनके दोनों विधायक बाद में राजद में शामिल हो गए. वहीं ठाकुरगंज सीट पर राजद ने और किशनगंज सदर सीट पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी. पिछले पांच साल में जिले के राजनीतिक परिदृश्य में काफी कुछ बदल गया है. नेताओं के दल बदलने से इस बार का चुनाव काफी रोचक और रोमांचक होने के आसार हैं. जनता दल यूनाइटेड से राजनीतिक पारी की शुरुआत करने वाले कोचाधामन विधानसभा के पूर्व विधायक मास्टर मुजाहिद आलम ने पिछले ही महीने जेडीयू को छोड़ राजद का दामन थाम लिया है. जबकि एआईएमआईएम के टिकट से विधानसभा चुनाव जीतकर बाद में राजद का दामन थामने वाले मो. इजहार अशफी अभी कोचाधामन के सीटिंग विधायक है. ऐसी स्थिति में सबसे बड़ा सवाल है कि राजद किसे अपना उम्मीदवार बनाती है. मास्टर मुजाहिद आलम को या फिर इजहार अशफी हालांकि जेडीयू किसी नए चेहरे को वहां से मैदान में उतार सकती है, जबकि बहादुरगंज विधानसभा में भी स्थिति कमोबेश उसी तरह के हैं. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम के टिकट पर साल 2020 के चुनाव में विधानसभा पहुंचने वाले मो अंजार नईमी भी पाला बदलकर राजद में शामिल हो गए. वहीं बहादुरगंज सीट पर चार बार जीत दर्ज करने वाले मो तौसीफ आलम ने कांग्रेस को छोड़ इस बार असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी में शामिल होकर मैदान में ताल ठोक रहें है. वहीं भाजपा यहां से किसे उम्मीदवार बनाएगी यह अभी तय नहीं है. नेपाल सीमा से सटे ठाकुरगंज विधानसभा की स्थिति भी कुछ बदले बदले से हैं. दिवंगत सांसद और कांग्रेस के कद्दावर नेता मौलाना असरारुल हक कासमी के पुत्र सऊद आलम वर्तमान में यहां से राजद के विधायक हैं और उनकी टिकट पक्की मानी जा रही है लेकिन पूर्व विधायक गोपाल अग्रवाल के जेडीयू में शामिल होने से यहां भी सियासी हलचल तेज है. क्योंकि दो बार के विधायक तथा पूर्व मंत्री नौशाद आलम के भी चुनावी मैदान में उतरने के आसार हैं. वहीं एआईएमआईएम किसी नए चेहरे को मैदान में उतार सकता है.टिकट को लेकर सबसे ज्यादा उठा पटक किशनगंज सदर सीट पर है जहां अभी कांग्रेस के विधायक इजहारुल हुसैन है. जबकि भाजपा के टिकट पर दो चुनाव में जीत के दहलीज तक पहुंच कर कुछ वोट से पराजित होने वाली स्वीटी सिंह एक बार फिर मैदान में उतरने की तैयारी में हैं. वहीं कुछ अन्य उम्मीदवार भी चुनाव लड़ने की तैयारी में है. जबकि एआईएमआईएम को बिहार में पहली जीत दिलवाने वाले पूर्व विधायक कमरुल होदा राजद होते हुए कांग्रेस का दामन थाम लिया है ऐसे में कांग्रेस किस उम्मीदवार पर भरोसा करेगी ये अगले कुछ महीने में तय हो जाएगा. वहीं प्रशांत किशोर की जनसुराज भी चारों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में हैं.

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