Bokaro News : परिजन खुद से मरीज को व्हीलचेयर से ले जा रहे वार्ड, बाहर से खरीदनी पड़ रही दवा

Published by : ANAND KUMAR UPADHYAY Updated At : 20 Mar 2025 11:45 PM

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<P>बोकारो, सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर लोगों तक स्वास्थ्य व्यवस्था सुगमता के साथ पहुंचाना चाह रही है. लेकिन बोकारो के सदर अस्पताल की कहानी ही कुछ अलग है. यहां मरीजों

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बोकारो, सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर लोगों तक स्वास्थ्य व्यवस्था सुगमता के साथ पहुंचाना चाह रही है. लेकिन बोकारो के सदर अस्पताल की कहानी ही कुछ अलग है. यहां मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है. अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में दवा नहीं है. इलाजरत मरीजों को नर्स बाहर से दवा लाने के लिए कह रही है. नर्स मान रही है कि अस्पताल में इंट्राकैथ के साथ-साथ जरूरी दवा उपलब्ध नहीं है. अस्पताल में गंदगी का ढेर लगा हुआ है. बायोमेडिकल वेस्टेज कचरा के अलावे अन्य कचरा यूं ही वेस्टेज स्थल पर बिखरा पडा है. होली के बाद से ही बायोमेडिकल वेस्ट उठानेवाला वाहन तक अस्पताल में नहीं आया है. अस्पताल प्रबंधन को किसी बात की खबर नहीं है. गुरुवार को प्रभात खबर की टीम ने सदर अस्पताल का भ्रमण किया, तो कई मरीजों ने परेशानी बतायी.

अर्थों के चिकित्सक एक माह से अवकाश पर, 22 दिन से बेड़ पर है मरीज

सदर अस्पताल में तुपकाडीह के मानगो का रहनेवाला 35 वर्षीय समर कुमार महतो 22 दिनों से इलाजरत है. अर्थों की परेशानी को लेकर अस्पताल आया था. एक माह से अस्पताल में अर्थों के चिकित्सक अवकाश पर है. रोजाना ओपीडी में आनेवाला दर्जनों मरीज बिना इलाज के लौट रहे है. समर ने बताया कि रोजाना इलाज की गुहार लगा रहे है. कोई नहीं सुन रहा है. आर्थिक रूप से परेशान है. चास के रहनेवाले कुमार अपनी माता को लेकर अस्पताल आये. इलाज के लिए खुद ही व्हीलचेयर पर बैठा कर वार्ड आना-जाना पड़ रहा था. कोई उनकी बात सुन तक नहीं रहा था.

मरीज का आरोप : बेड पर देखने नहीं आते हैं चिकित्सक

बोकारो थर्मल की 21 वर्षीय शमा परवीन को लेकर परिजन 18 मार्च को अस्पताल इलाज के लिए लाये. सिर में चक्कर व दर्द की शिकायत है. परिजनों ने आरोप लगाया कि चिकित्सक बेड पर देखने नहीं आते हैं. बच्ची को चक्कर आता है. इसके बाद भी चिकित्सक के पास ओपीडी में जाकर दिखाना पड़ता है. दवा भी खरीदकर लाना पड़ रहा है. रेफर कर दिया गया है. दूसरे अस्पताल जाने की सलाह दी जा रही है. आर्थिक रूप से कमजोर है. कहां जाये.

लाल कार्ड होने के बाद भी अल्ट्रासाउंड जांच के लिए देने पड़े पैसे

पेटरवार की खुशबू थैलेसीमिया पीड़ित है. अस्पताल में इलाज के लिए दाखिल हुई है. परिजनों का आरोप है कि आर्थिक परेशानी से गुजर रहे है. लाल कार्ड होने के बाद भी अल्ट्रासाउंड जांच के लिए सदर अस्पताल के पीपीपी मोड में चल रहे जांच घर ने 425 रुपये लिये. अल्ट्रासाउंड जांच घर के प्रबंधक अमजद की दलील है कि चार साल से उन्हें कोई ऐसा निर्देश नहीं मिला है, जिससे कि वे लाल कार्ड धारियों को कोई नि:शुल्क सुविधा प्रदान करें.

बाहर से करानी पड़ी सभी जांच, अब दूसरे अस्पताल जाने की कही जा रही बात

मानगो की रहनेवाली मीना देवी ने बताया कि वे अपनी पुत्री के पीठ दर्द की शिकायत लेकर आयी है. बाहर से सभी जांच करानी पड़ी है. आर्थिक तंगी से गुजर रही है. सभी जांच करवाकर अब अस्पताल दूसरे जगह जाने को कह रहा है. कहां जायेंगे समझ में नहीं आ रहा है. बच्ची भी ठीक नहीं है. कोई सुनने को तैयार नहीं है. दवा भी बाहर से खरीदकर लाती है.

दवा खरीदने के अलावा कोई उपाय नहीं

चास की सुगीया देवी के पुत्र ने बीपी व चक्कर की शिकायत को लेकर अस्पताल में दाखिल कराया है. इलाज तो शुरू हुआ है, लेकिन कई दवा बाहर से खरीदकर लाना पड़ रहा है. पुत्र ने कहा कि नर्स से पूछने पर बताया जा रहा है कि कुछ दवा है और कुछ दवा खुद से खरीदनी पड़ेगी. अब दवा खरीदने के अलावा कोई उपाय नहीं है. यही हाल सेक्टर आठ के अरुण का भी है. बीपी की परेशानी को लेकर एडमिट है. कुछ दवा बाहर से खरीदना पड़ रही है.

समस्याओं का किया जायेगा समाधान

पूरी जिम्मेदारी सदर अस्पताल के उपाधीक्षक की है. मेरे संज्ञान में मामला आया है. निश्चित रूप से मरीजों की समस्याओं का समाधान किया जायेगा.

डॉ अभय भूषण प्रसाद

, सिविल सर्जन, बोकारो

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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