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भारत की गौरवशाली बौद्धिक परंपरा से जुड़े विद्यार्थी

Updated at : 14 Jul 2025 7:40 PM (IST)
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भारत की गौरवशाली बौद्धिक परंपरा से जुड़े विद्यार्थी

<P><H2>एमयू में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर संवादात्मक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का सफल आयोजन</H2><H2>वरीय संवाददाता, बोधगया. </H2> मगध विश्वविद्यालय के मन्नुलाल पुस्तकालय सभागार में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर केंद्रित संवादात्मक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता

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एमयू में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर संवादात्मक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का सफल आयोजन

वरीय संवाददाता, बोधगया.

मगध विश्वविद्यालय के मन्नुलाल पुस्तकालय सभागार में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 पर केंद्रित संवादात्मक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय शिक्षा नीति प्रकोष्ठ एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के संयुक्त तत्वावधान में हुआ. प्रतियोगिता में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से 100 से अधिक विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने भाग लिया. कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य था नयी शिक्षा नीति की अवधारणाओं और मूल्यों को विद्यार्थियों के बीच रोचक प्रश्नोत्तरी के माध्यम से प्रस्तुत करना. प्रतिभागियों को भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा के महान विद्वानों यथा अजातशत्रु, चाणक्य, चरक, गार्गी, सुश्रुत, वाग्भट और मैत्रेयी के नामों पर नामित टीमों में बांटा गया. प्रश्नोत्तरी को छह चरणों में विभाजित किया गया था, जिसमें शिक्षा नीति के उद्देश्य, नवाचार, मातृभाषा आधारित शिक्षा, बहुविषयकता, क्रियान्वयन की चुनौतियां और शोध से संबंधित विविध विषयों को शामिल किया गया. इससे प्रतिभागियों को न केवल नीति की गहराई से जानकारी मिली, बल्कि भारत की गौरवशाली बौद्धिक परंपरा से भी जुड़ाव बना. प्रतियोगिता के अंत में परिणाम घोषित किये गये, जिसमें सुलभ समूह के चंदन कुमार, मनोज कुमार, प्रिंस अमन और अभिषेक कुमार ने प्रथम स्थान प्राप्त किया. जीवक समूह के रवि रंजन, सोनाली, गुड़िया कुमारी और ऋतुराज को द्वितीय स्थान, जबकि आर्यभट समूह के ईशान, अर्चना कुमारी, आशीष शंकर व छोटू प्रसाद यादव को तृतीय स्थान से सम्मानित किया गया. विजेता प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया.

नयी शिक्षा नीति को किया रेखांकित

इस अवसर पर डॉ प्रियंका सिंह ने नयी शिक्षा नीति की प्रमुख विशेषताओं को विस्तार से रेखांकित किया. डॉ एकता वर्मा ने इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में बड़ा कदम बताया. प्रो मुकेश कुमार ने भारतीय ज्ञान परंपरा से इसे जोड़ते हुए प्रेरक उद्बोधन दिया. कार्यक्रम की संकल्पना डॉ वंदना कुमारी के बौद्धिक मार्गदर्शन में विकसित हुई, जिसे डॉ प्रियंका सिंह ने संवादात्मक रूप दिया और डॉ एकता वर्मा ने प्रशासनिक समन्वय से सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया. कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ पूनम सिंह, डॉ ममता मेहरा, डॉ कविता कुमारी, डॉ तरन्नुम जहां और डॉ दीपशिखा पांडे के साथ-साथ आइक्यूएसी के सहायक राज, सौम्या एवं प्रवीण का उल्लेखनीय सहयोग रहा.

अर्चना कुमारी को प्रथम पुरस्कार

मौके पर 28 अप्रैल को आयोजित निबंध प्रतियोगिता में भारतीय भाषाओं और संस्कृति को बढ़ावा देने में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भूमिका के परिणामों की घोषणा भी की गयी. इसमें अर्चना कुमारी (राजनीति विज्ञान विभाग) को प्रथम, सुमित कुमार (अंग्रेजी विभाग) को द्वितीय, और छोटू प्रसाद यादव (राजनीति विज्ञान विभाग) को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ. समापन सत्र में विजेताओं को प्रमाणपत्र एवं स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया. यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों के लिए एक ज्ञानवर्धक अनुभव रहा, बल्कि नीति विमर्श को संवादात्मक और जीवंत रूप देने की दिशा में एक प्रभावशाली पहल भी सिद्ध हुआ.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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KALENDRA PRATAP SINGH

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