सिगरेट के खिलाफ माहौल

Updated at : 31 May 2016 1:13 PM (IST)
विज्ञापन
सिगरेट के खिलाफ माहौल

-हरिवंश- भारत का यहां के मीडिया में खास महत्व नहीं है. ‘वाशिंगटन पोस्ट’ रविवार को डेढ़ डॉलर में बिकता है. लगभग 47 रुपये में डेढ़-दो किलो वजन. इस पूरे अखबार में (25.9.94) भारत के बारे में एक छोटी खबर है. तसवीर भी. सूरत से प्लेग के कारण भागते लोगों की तसवीर और उसका विवरण. दिल्ली […]

विज्ञापन

-हरिवंश-

भारत का यहां के मीडिया में खास महत्व नहीं है. ‘वाशिंगटन पोस्ट’ रविवार को डेढ़ डॉलर में बिकता है. लगभग 47 रुपये में डेढ़-दो किलो वजन. इस पूरे अखबार में (25.9.94) भारत के बारे में एक छोटी खबर है. तसवीर भी. सूरत से प्लेग के कारण भागते लोगों की तसवीर और उसका विवरण. दिल्ली के अखबार जैसे बिहार को खारिज कर चुके हैं, लगता है, अमेरिका के अखबार वैसे ही भारत को मानते हैं. हां, सीएनएन पर अवश्य एक घोषणा है. सूरत में फैले प्लेग के कारण, भारतीय यात्रियों को अमेरिका आने से बरजने का निर्णय, जो आएंगे, उन्हें हवाई अड्डे से ही सीधे डॉक्टर के पास जाना पड़ेगा. डॉक्टर जांच कर अनुमति देंगे, तब बाहर.

अमेरिका में सिगरेट के खिलाफ माहौल है. भारत में भी जहां अमेरिकी दफ्तर या दूतावास है, वहां अंदर सिगरेट पीने की मनाही है. सिगरेट पीनेवालों के लिए कयामत है. वे अल्पसंख्यक बनते जा रहे हैं. दफ्तर या सार्वजनिक स्थलों पर प्रतिबंध है. सिगरेट न पीनेवाले प्रदर्शन करते हैं. विरोध प्रकट करते हैं कि उनके स्वास्थ्य को प्रभावित/दूषिक करने का हक दूसरे को नहीं है. न्यूयार्क में सार्वजनिक जगहों से सिगरेट को प्रतिबंधित करने की वहां बहस चल रही थी.

भारी समर्थन इस प्रस्ताव को है. पंक्तियों में खड़े और अनुशासित हो कर काम करते हैं. यहां बड़े-बड़े स्टोर हैं. अंदर जाइए. हर चीज मौजूद मिलेगी. डिब्बाबंद, पूर्ण सुरक्षित. सब्जियों-फलों के पैकेट मिलेंगे. जहां इनका उत्पादन होता है, वहां से सीधे स्टोर तक पैकेट में ही इन्हें पहुंचाते हैं. खुले में नहीं. स्टोर में जाइए, खुद टोकरी लीजिए, मनपसंद सामान रख लीजिए, कैश काउंटर पर जाकर पैसे दीजिए, सामान ले जाइए. विशाल स्टोर महज 2-4 लोग ही चलाते हैं. स्टोरों में कार्यरत काले लोगों की संख्या है. स्टोरों के बाहर कोई हाथ फैलाये भीख मांगता मिल जायेगा. अधिकतर काले, पर गोरे भी हैं.

अमेरिका भी गरीबी भगा नहीं पाया है. पार्कों में या बड़े भवनों के निचते तलों में कुछेक लोग सोये मिल जाएंगे, फटेहाल. हालांकि ऐसे लोगों के लिए सामाजिक सुरक्षा का बंदोबस्त है, पर उससे कुछ हो नहीं रहा. सुंदर फूलों से आच्छादित पार्कों में खाये फटेहाल अमेरिकी मिल जाएंगे. या तो दवाओं के नशे में होंगे या चुपचाप बैठे. खोयी निगाहें. कभी-कभार चिल्ला कर गा पड़ेंगे. चौराहों पर बक्से बने हैं. अखबारों के नाम खुदे हैं. इनमें अखबार रखे हैं. पैसा डालिये, अखबार निकल आयेगा. गंदगी-कूड़ा डालने के लिए बीच-बीच में स्थान निर्धारित हैं. सड़कें-पार्क वगैरह में खूबसूरत फूलों की क्यारियां हैं, खिले और गमकते.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola