उदासी के लिए ‘दिल’ नहीं ‘दिमाग’ है कसूरवार: रिसर्च

Updated at : 28 Jan 2016 4:08 PM (IST)
विज्ञापन
उदासी के लिए ‘दिल’ नहीं ‘दिमाग’ है कसूरवार: रिसर्च

कभी कोई मन का काम न हो या प्रियजन के कारण दुखी होने से यदि मन उदास हो जाता है तो इसमें आपके दिल का कोई कसूर नहीं है बल्कि यह आपके दिमाग का कसूर है. जी हाँ, यह खुलासा हुआ है हालिया किए गये एक शोध में. और इस दिमागी हरकत के लिए कोई […]

विज्ञापन

कभी कोई मन का काम न हो या प्रियजन के कारण दुखी होने से यदि मन उदास हो जाता है तो इसमें आपके दिल का कोई कसूर नहीं है बल्कि यह आपके दिमाग का कसूर है. जी हाँ, यह खुलासा हुआ है हालिया किए गये एक शोध में. और इस दिमागी हरकत के लिए कोई और नहीं बल्कि हमारे दिमाग में मौजूद दो रसायन- डोपामिन और सेरोटोनिन जिम्मेदार हैं.

डोपामिन रसायन हमारे मूड को संतुलित रख हमें अवसाद से बचाता है और सेरोटोनिन शांति और भावनात्मक स्तर पर ठीक रहने के लिए महत्वपूर्ण है. यह हमारे आत्मविश्वास के स्तर को भी बढ़ाता है. यही महत्वपूर्ण रसायन हमारे शरीर की प्रतिकूल स्थितियों के लिए भी जिम्मेदार भी माने जाते हैं. इनके स्तर में उतार-चढ़ाव ही हमारे स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव के लिए जिम्मेदार होता है. अवसाद के कारण चिंता, तनाव, भ्रम, माया और कभी-कभी आत्महत्या के विचार वाली स्थितियां भी उत्पन्न हो जाती हैं.

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में रॉब रटलेज द्वारा किए गए अध्ययन में पता चला था कि स्वस्थ वयस्कों में डोपामिन का अधिक स्तर उन्हें जुआ खेलते वक्त अधिक जोखिम उठाने को प्रेरित करता है. डोपामिन रसायन सेरोटोनिन के साथ मिलकर मूड, भूख, नींद, सीखने की प्रवृत्ति और याददाश्त संबंधी कार्यो को नियंत्रित करता है. इसकी वृद्धि से हाई ब्लड प्रेशर और माइग्रेन हो सकता है.

इन दोनों रसायनों का असंतुलित स्तर हमारी लगातार बदलती लाइफस्टाइल की ही देन है. हमारी लाइफस्टाइल इन दोनों रसायनों को प्रभावित करती है और इन रसायनों का असंतुलन हमें प्रभावित करता है. अगर हम अपने जीने के तरीकों में थोड़ा बदलाव करते हैं तो इससे हमें मदद मिल सकती है. प्राणायाम, योग से इन रसायनों के सही स्तर में मदद मिल सकती है.

विज्ञान ने इस बात की पुष्टि की है कि हमारी नकारात्मक सोच हमारे लिए हानिकारक है. सुख और दुख हमारे दिमाग की ही उपज है.

विशेषज्ञों के अनुसार, कार्बोहाइड्रेट, विटमिन बी, और ओमेगा-3 फैटी एसिड में ये रसायन प्रचूर मात्रा में होते हैं. इसके अलावा गेहूं के ब्रेड, पास्ता, आलू, अनाज और ब्राउन राइस में ट्रिप्टोफैन होते हैं, जो मस्तिष्क में जाकर सेरोटोनिन में परिवर्तित हो जाता है.

अगर फिर भी कभी उदासी से सामना होता है तो देर न लगाएं तुरंत डॉक्टर के पास जाएं. डॉक्टर के पास जाकर अपनी परेशानी साझा करें. इन दोनों रसायनों का संतुलन करने की कोशिश करें. यकीनन आपकी उदासी आपसे कोसों दूर चली जाएगी.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola