गर्भपात का कारण बन सकता है एप्ला सिंड्रोम
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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यदि किसी महिला को बार-बार गर्भपात की शिकायत हो रही हो, तो यह एप्ला सिंड्रोम के लक्षण हो सकते हैं. इस अवस्था में बिना देरी किये डॉक्टर से इसका इलाज कराना चाहिए. यह समस्या उपचार के बाद ठीक हो जाती है. 29 वर्ष की एक महिला एक बार मुझसे इलाज कराने आयी थी. उसे 5 […]
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यदि किसी महिला को बार-बार गर्भपात की शिकायत हो रही हो, तो यह एप्ला सिंड्रोम के लक्षण हो सकते हैं. इस अवस्था में बिना देरी किये डॉक्टर से इसका इलाज कराना चाहिए. यह समस्या उपचार के बाद ठीक हो जाती है.
29 वर्ष की एक महिला एक बार मुझसे इलाज कराने आयी थी. उसे 5 सप्ताह का गर्भ था. उस महिला की पहले तीन असफल डिलिवरी हुई थी. चार साल पहले किसी पेरिफेरल हॉस्पिटल में उसकी डिलिवरी आठवें महीने में सीजेरियन से हुई थी. कराने का कारण हाइबीपी था. उसे एक लड़की हुई थी, जिसकी मृत्यु डिलिवरी के 24 घंटे के बाद हो गयी. इसके बाद उसने दो बार गर्भधारण किया था, लेकिन दोनों बार गर्भपात हो गया.
पहली बार गर्भपात तीन महीने का गर्भ होने पर और दूसरा साढ़े तीन महीने के बाद हुआ. दूसरा गर्भपात बच्चे में धड़कन नहीं होने के कारण कराना पड़ा था. जांच कराने पर पता चला कि उस महिला को एप्ला सिंड्रोम की समस्या है. उसका इलाज कम मात्र की एस्पिरिन (75 एमजी) और एलएमडब्ल्यूएच 40 यूनिट प्रतिदिन और ज्यादा मात्र में कैल्शियम देकर किया गया. मरीज की डिलिवरी सीजेरियन विधि से 37वें सप्ताह में की गयी. उससे स्वस्थ लड़की का जन्म हुआ. जच्चा और बच्चा दोनों को सात दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गयी. अब दोनों पूर्णत: स्वस्थ हैं.
रक्त जमाव रोकना है उपचार
इस समस्या का उचित इलाज रक्त के जमाव को रोकना है. एस्पिरिन और हेपरिन की सूई रोजाना लेने से सारे दुष्प्रभाव खत्म हो जाते हैं. चूंकि हेपरिन हड्डी को कमजोर करता है, अत: इसके साथ कैल्शियम का सेवन भी करना चाहिए. इसके अलावा समय-समय पर डॉक्टर की सलाह से जांच और अल्ट्रासाउंड कराते रहना चाहिए. अत: गर्भवती महिला को यहां दिये गये लक्षणों के अनुसार अपनी अवस्था को पहचान कर उपचार लेना चाहिए.
क्या है इसकी जांच
मरीज में उक्त लक्षणों का होना इस बीमारी को आधा ही सिद्ध करता है. इन लक्षणों के साथ ही साथ एंटीबॉडी की भी जांच करायी जाती है. तभी इसकी पुष्टि होती है.
क्या हैं लक्षण
यदि तीन या तीन से ज्यादा गर्भपात तीन महीने पुराने गर्भ का हुआ हो, एक या एक से ज्यादा गर्भपात तीसरे महीने के बाद हुआ हो, रक्त चाप ज्यादा होने की वजह से समय से पहले मरीज की डिलिवरी करा दी गयी हो, बच्चे की वृद्धि नहीं हो रही हो. इन सभी परिस्थितियों में मरीज इस बीमारी से ग्रसित हो सकता है. इसकी पुष्टि जांच से होती है.
डॉ प्रीति राय
स्त्री रोग विशेषज्ञ, इनसाइट केयर क्लिनिक, बूटी मोड़, रांची
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