आप भी राधा की तरह समाज से जुड़िए, मानवता से प्यार करिए

Published by : Shaurya Punj Updated At : 29 Jun 2024 12:42 AM

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rasha social worker

लखनऊ की राधा मेहता पिछले 14 साल से लखनऊ में राहगीरों को हर साल मई और जून में पानी पिला रही हैं.

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इस बार गर्मी ने अप्रैल में गर्म-गर्म तेवर दिखाने शुरू कर दिए थे, और अब तो जून भी बीतने को है. तब से लेकर आज तक हम इसमें झुलस रहे हैं. हमारे पास तो इससे उबरने के क्षणिक साधन हैं. उनका क्या जो मूक हैं या जो साधान विहीन हैं. गर्मी में सूरज की रोशनी दिनोंदिन प्रचंड होती जा रही है. पिछले एक महीने से ज्यादा समय से हीटवेव से आम और खास जन परेशान हैं. जो थोड़ा समर्थ हैं वे पहाड़ों की यात्रा पर निकल गये हैं और जो घरों में हैं, वे एयरकंडीशन से जी रहे हैं और इससे भी थोड़ा निचला वर्ग कूलर तो सबसे निचली पायदान पर बैठा आम आदमी का पंखे के बिना जीना मुहाल है. कहते हैं कि गर्मी ने पिछले अट्ठाइस साल बाद इतनी भयंकर दस्तक दी है कि दोपहर को अघोषित कर्फ्यू जैसी स्थिति देखने को मिल रही है. बाजार खाली दिखते हैं और गरीब पेड़ों की छाया ढूंढ रहे हैं. यह सारी हीटवेव की कहानी पेड़ों के इर्द गिर्द ही तो जुड़ी हुई है. सोशल मीडिया पर आ रहा है कि एक लकड़हारा पेड़ काटने आया लेकिन कड़ी धूप के चलते यह कह कर उसी की छाया में बैठ जाता है, यह कहते हुए कि अभी बहुत गर्मी है, बाद में पेड़ काटता हूं . है न कमाल. जो पेड़ हमें छाया और ठंडी हवा, फल और लकड़ी देते हैं, हम उन्हें ही काटने निकले हैं. कभी हरे भरे पेड़ों से जो पहाड़ बहुत खूबसूरत दिखते थे, वही पहाड़ अब नंगे दिखते हैं, जैसे कोई आदमी गंजा हो गया हो. वहां देवदारों की छाया कम हो गयी है और पहाड़ पर भी अब बिजली के पंखे चलते दिखाई देते हैं. इस गर्म मौसम में भी कुछ लोग ऐसे हैं जिनके लिए मानवता के आगे कुछ नहीं.

मानवता की मिसाल हैं राधा

ऐसी हैं लखनऊ की राधा मेहता. राधा, पिछले 14 साल से लखनऊ में राहगीरों को हर साल मई और जून में पानी पिला रही हैं. इस काम में सिर्फ मानवता ही उनकी सहायता करती हैं. राधा, घरेलू महिला हैं, जो अपने बल पर राहगीरों को पानी, शरबत और मठ्ठा पिलाती हैं. यह नेक काम वह सोमवार से शुक्रवार सुबह 10 से शाम 4 तक करती हैं. इस काम में उनके साथ उनकी टीम मदद करती है. पर्यावरण की चिंता हैं राधा को है. इसके तहत वो पानी प्लास्टिक या डिस्पोसेबल गिलास में पानी नहीं स्टील के गिलास में पिलाती हैं. उन्होंने बताया कि हर शनिवार को वह खुद हाथों से खाना बनाकर राहगीरों का पेट भरती हैं. सबसे खास बात है वह खाना भी पत्तों से बने दोने में खिलाती हैं, ताकि पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचे. सलाम है उनके जज्बे को. 77 साल में जो वो कर रही हैं, शायद कोई दूसरा हो तो वो उम्र और अन्य लाचारियों के आगे रखते हुए इस काम को अमली-जामा नहीं पहनाए. अब आपको भी आगे आना होगा. राधा, जैसा काम आपको भी अपने-अपने शहरों, कस्बों, मुहल्ले, चौक, बाजारों, गलियों में करना होगा. याद रहे भगवान मंदिरों में जाने से नहीं मानव सेवा से खुश होंगे. आपने जिसे शीतलता दी, वो कभी न कभी आपको शीतलता किसी न किसी रूप में लौटाएगा. कितना सटीक कहा है कबीरदास ने –
दान दिए धन ना घटे, नदी न घटे नीर.
अपनी आंखों देख लो, यों क्या कहे कबीर.

राधा मेहता की उदारता

लखनऊ की साधारण सी गृहिणी राधा मेहता ऐसी ही भावना का उदाहरण हैं, जो असाधारण दृढ़ संकल्प के साथ समाज सेवा के लिए तत्पर है. इसी सोच के साथ वे पिछले 14 सालों से हर गर्मी में मई-जून के महीने में राहत शिविर चलाती हैं, इस दौरान वे ज़रूरतमंद लोगों को भोजन, पानी और पेय पदार्थ मुहैया कराती हैं उनकी कहानी समाज सेवा, सहानुभूति, समर्पण का पर्याय है, जो भीषण गर्मी में लोगों के लिए उम्मीद की किरण बन जाती हैं.

14 सालों से सेवा

हर साल तापमान बढ़ने के साथ राधा मेहता इस शिविर की शुरूआत कर देती हैं. वे अपने इन कार्यों से समाज को शक्तिशाली संदेश देती हैं कि मनुष्य को हमेशा एक दूसरे का सहयोग करना चाहिए. उनकी प्रतिबद्धता दूसरे लोगों को भी स्वेच्छा से मानव सेवा एवं दान के लिए प्रेरित करती है. पिछले 14 सालों के दौरान राधा हर साल दो महीने अपने इसी मिशन को समर्पित करती आई हैं, जो सबसे चुनौतीपूर्ण समय में दयालुता और उदारता का बेहतरीन उदाहरण है.

77 वर्षीय राधा को सलाम

77 वर्षीय राधा मेहता की एनर्जी युवाओं को भी मात देती है. वह इंदिरा ब्रिज से निशातगंज की ओर जाने वाले फ्लायओवर के सामने दो महीने तक भोजन वितरण शिविर लगाती हैं. हालांकि एक दिन के लिए भी इस तरह का कैम्प लगाना अपने आप में मेहनत का काम है, लेकिन राधा दो महीने तक इसे जारी रखती है. उनका उत्साह, बहादुरी और दृढ़ इरादा सही मायनों में प्रेरणादायी है.

राधा हैं पर्यावरण प्रेमी

राधा पर्यावरण को लेकर चिंतित हैं. इस कैम्प में वे प्लास्टिक या डिस्पोज़ेबल गिलास में नहीं बल्कि स्टील के गिलास में पान पिलाती हैं. हर शनिवार को वह खुद खाना बनाकर, आस-पास से गुजरने वाले राहगीरों का पेट भरती हैं. उनके बारे में सबसे अच्छी बात यह है कि वह भोजन भी पत्तलों में परोसती हैं, ताकि पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे. इसके अलावा खाना बांटने की प्रक्रिया भी ठीक तरह से होती है, लोग कतार में लगकर खाना लेते हैं, पूरी प्रक्रिया में पर्यावरण की सफाई और सुरक्षा को ध्यान में रखा जाता है.

भोला करता है मदद

राधा मेहता की टीम में कॉलेज के छात्र, महिलाएं और स्वयंसेवी शामिल हैं. मधुबनी, बिहार से भोला मंडल दो महीने इस कैम्प में उनकी सहायता करते हैं. इसी तरह छात्र जैसे सुमित, आयूष और अमन भी अपनी पढ़ाई के साथ-साथ उनके साथ समाज सेवा में योगदान देते हैं. अक्सर कैम्प में दान देने वालों की इच्छा के मुताबिक कुछ खास चीज़ें भी बांटी जाती हैं, जो निरंतर हो रहे चैरिटेबल प्रयासों को दर्शाता है.

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Shaurya Punj

लेखक के बारे में

By Shaurya Punj

शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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