Hemkund Sahib Opening Date 2024 : हेमकुंड साहिब की है प्लानिंग, जानें कब शुरू होगी यात्रा और कैसे होगा यात्रा पंजीकरण
Published by : Preeti Singh Parihar Updated At : 03 May 2024 2:47 PM
Hemkund Sahib Yatra 2025 :
उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र मे स्थित सिखों के एक प्रमुख तीर्थ हेमकुंड साहिब की यात्रा आगामी 25 मई से शुरू होनेवाली है. आप अगर इस पवित्र और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर जगह की यात्रा का मन बना रहे हैं, तो जानें कहां कराना होगा रजिस्ट्रेशन, कैसे पहुंच सकते हैं यहां और कितना लंबा है पैदल ट्रैक ...
Hemkund Sahib Opening Date 2024 : सिख समुदाय के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल हेमकुंड साहिब के रास्ते में जमी बर्फ को हटाने का काम बहुत तेजी से चल रहा है. आप अगर इस साल हेमकुंड साहिब दर्शन का प्लान बना रहे हैं, तो अपनी यात्रा के लिए तैयार हो जाएं. हेमकुंड साहिब को 25 मई 2024 को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया जायेगा. यहां पहुंचने के लिए लंबी ट्रैकिंग करनी पड़ती है, जानें कैसे आप यहां पहुंच सकते हैं.
सरकारी वेबसाइट से कराएं यात्रा का रजिस्ट्रेशन
हेमकुंड साहिब जाने के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू हो गयी है. आप अगर यहां जाने की योजना बना रहे हैं, तो आप उत्तराखंड सरकार टूरिस्ट केयर वेबसाइट https://registrationandtouristcare.uk.gov.in/ से घर बैठे ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं. पर्यटक पंजीकरण प्रक्रिया में कोई शुल्क शामिल नहीं है. लेकिन यात्रा के दौरान यात्रियों को वैध व्यक्तिगत आईडी प्रमाण साथ रखने की सलाह दी गयी है. उत्तराखंड सरकार की यात्रा नीति के अनुसार, चार धाम और हेमकुंड साहिब की यात्रा शुरू करने से पहले अपना और अपने वाहनों का पंजीकरण कराना आवश्यक है.
विश्व में सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित गुरुद्वारा
हेमकुंड साहिब विश्व में सबसे अधिक ऊंचाई पर स्थित गुरुद्वारा है. उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित यह गुरुद्वारा हिमालय में 4632 मीटर की ऊंचाई पर एक बर्फीली झील के किनारे सात पहाड़ों के बीच स्थित है. उत्तर भारत की हिमालयी श्रृंखला में मौजूद इस गुरुद्वारे में ठंड के मौसम में यात्रियों की आवाजाही बंद रहती है. चारधाम यात्रा की शुरुआत के आस-पास ही हेमकुंड साहिब की यात्रा भी शुरू हो जाती है. बीते 23 अप्रैल से सेना के जवान गुरुद्वारा के सेवादारों के साथ मिलकर यात्रा मार्ग से बर्फ हटाने का काम कर रहे थे. बीच-बीच में हो रही बर्फबारी के बावजूद रास्ता बना लिया गया है और अरदास के बाद गुरुद्वारे प्रांगण के मुख्य द्वार को खोल लिया गया है.

गुरु गोबिंद सिंह ने यहां ध्यान में बिताये थे 10 साल
हेमकुंड को गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब के नाम से भी जाना जाता है. सिख समुदाय के लिए यह आस्था एक बड़ा केंद्र है. ऐसा माना जाता है कि सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह जी ने यहां ध्यान में 10 साल बिताये थे. गढ़वाल के हिमालय क्षेत्र में स्थित हेमकुंड साहिब हेमकुंड पर्वत की चोटियों के बीच है. गुरुद्वारे के सामने हेमकुंड नाम की एक झील है, जिसका पानी बर्फ जैसा ठंडा होता है और हर साल यहां आनेवाले लाखों श्रद्धालु इस झील में पवित्र स्नान करते हैं. ऐसा कहा जाता है कि महाकाव्य रामायण में भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण ने युद्ध में गंभीर चोटों के बाद हेमकुंड के तट पर ध्यान करके अपना स्वास्थ्य वापस पा लिया था. कहा जाता है कि हेमकुंड में स्थित लक्ष्मण मंदिर उस स्थान पर बनाया गया है कि जहां लक्ष्मण ने तपस्या की थी. गुरुद्वारे के आसपास एक विशेष किस्म का फूल उगता है, जिसे ब्रह्म कमल कहा जाता है.
जानें, कैसे पहुंच सकते हैं यहां
हेमकुंड जाने के लिए आप अगर रेल मार्ग का विकल्प चुनते हैं, तो आपको उत्तराखंड स्थित हरिद्वार तक आप रेल मार्ग से पहुंचना होगा. इसके बाद आगे की दूरी आपको सड़क मार्ग से तय करनी होगी. हरिद्वार से प्राइवेट टैक्सी या उत्तराखंड परिवहन निगम की बस के माध्यम से आप हरिद्वार से जोशीमठ पहुंच सकते हैं. जोशीमठ से हेमकुंड साहिब के प्रवेश द्वार गोविंदघाट की दूरी महज 24 किलोमीटर है. गोविंदघाट से हेमकुंड साहिब की दूरी 20 किमी है. शुरुआत के पांच किमी पुलना गांव तक वाहन से पहुंचना होता है और यहां से हेमकुंड तक पहुंचने के लिए 15 किमी पैदल चलना पड़ता है. इस ट्रैक पर पड़नेवाले घांघरिया में यात्री रात्रि विश्राम के लिए रुकते हैं. फूलों की घाटी की ट्रेकिंग भी यहीं से शुरू होती है.
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By Preeti Singh Parihar
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