Jageshwar Temple Tour: Sawan में करें जागेश्नर धाम के दर्शन, ऐसे तय करें सफर
Published by : Shaurya Punj Updated At : 20 Jul 2023 7:42 AM
Jageshwar Temple Tour: धार्मिक लिहाज से महत्वपूर्ण अल्मोड़ा जिले में कई पौराणिक और एतिहासिक मंदिर हैं. इसमें पौराणिक जागेश्वर धाम विश्व में प्रसिद्ध मंदिरों में शामिल है. मंदिरों के समूह और ज्योतिर्लिंगों आदि के लिए जागेश्वर का नाम इतिहास में दर्ज है.
Jageshwar Temple Tour: सावन का महीना शुरू हो चुका है. इस पावन महीने में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और विशेष पूजा-अर्चना के लिए देश के अलग अलग मंदिर में आते हैं. धार्मिक लिहाज से महत्वपूर्ण अल्मोड़ा जिले में कई पौराणिक और एतिहासिक मंदिर हैं. इसमें पौराणिक जागेश्वर धाम विश्व में प्रसिद्ध मंदिरों में शामिल है. मंदिरों के समूह और ज्योतिर्लिंगों आदि के लिए जागेश्वर का नाम इतिहास में दर्ज है.
जागेश्वर धाम, उत्तरांचल के जंगल के ऊंचे इलाकों में जागेश्वर या नागेश के रूप में शिव का निवास है. यहां का पूरा शहर शिव मंदिरों को समर्पित है. यहां के ऊंचे -ऊंचे देवदार के पेड़ देखने में वास्तव में खूबसूरत लगते हैं साथ ही गहरे हरे रंग की पोषक पहने नज़र आते हैं. उत्तराखंड का हिमालयी राज्य माप से परे सुंदर है और फिर भी अपनी अधिक लोकप्रिय बहन, हिमाचल प्रदेश की तुलना में पर्यटकों को लुभाता है. जबकि ऋषिकेश, नैनीताल और मसूरी जैसे गंतव्य हमेशा सुर्खियों में रहे हैं, राज्य में अभी भी खजाने के अप्रकट होने की प्रतीक्षा है.
जागेश्वर धाम का वर्णन स्कंद पुराण और शिव पुराण में मिलता है. मान्यता है कि यह पहला मंदिर है जहां लिंग के रूप में शिवपूजन की परंपरा शुरू हुई थी. यह भी कहा जाता है कि यहां सप्तऋषियों ने तपस्या की थी. मान्यता है कि भगवान राम के पुत्रों लव-कुश ने भी यहां यज्ञ किया था और देवताओं को आमंत्रित किया था. जागेश्वर मंदिर परिसर में 124 मंदिरों का समूह है. जिनका निर्माण बड़ी-बड़ी शिलाओं से किया गया है.
उत्तराखंड में स्थित जागेश्वर धाम एक एक ऐसा धाम भी है जिसका नाम तो प्रसिद्ध है लेकिन इसका रहस्य कोई भी नहीं जानता है. भगवान शिव का यह मंदिर 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है और यह मंदिर लगभग 2500 वर्ष पुराना है. उत्तराखंड में स्थित इस मंदिर का पौराणिक कथाओं में भी उल्लेख किया गया है जिसका वर्णन शिव पुराण, लिंग पुराण और स्कंद पुराण में भी मिलता है.
शंकराचार्य ने केदारनाथ जाने से पहले जागेश्वर धाम में भगवान शिव के दर्शन किए और कई मंदिरों का जीर्णोद्धार और स्थापना की थी. शिव के इस प्रसिद्ध धाम को आठवें ज्योतिर्लिंग के रूप में जाना जाता है. मान्यता है कि यहां स्वयं भगवान शिव ने अनादिकाल तक तपस्या की थी.
जागेश्वर पहुंचने के लिए बस, ट्रेन आदि सुविधाएं उपलब्ध हैं. दिल्ली से जागेश्वर आने के लिए पहले 270 किमी हल्द्वानी तक ट्रेन या बस से आना होगा. इसके बाद हल्द्वानी से जागेश्वर लगभग 120 किमी बस या टैक्सी से यात्रा करनी होगी.
अल्मोड़ा के दर्शनीय स्थल
अल्मोड़ा हिल स्टेशन
अल्मोड़ा भारत के उत्तराखंड राज्य का एक शहर है . अल्मोड़ा की आकर्षक सुंदरता जैसे कि हिमालय का दृश्य, पहाड़ों की वादियां को देखकर आप लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करती है अगर देखा जाए तो अल्मोड़ा खाने के अलग-अलग व्यंजनों के लिए भी प्रसिद्ध है।
अल्मोड़ा का दुनागिरि मंदिर
मां दूनागिरी मंदिर हिंदुओं का एक प्रसिद्ध मंदिर है, जो उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा जिले में स्थित है।वैष्णो देवी के बाद अल्मोड़ा में “दूनागिरी” दूसरी वैष्णो शक्तिपीठ . दूनागिरी मंदिर के बारे में मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से यहां भक्ति करते हैं तो उनकी मुराद जरूर पूरी होती है . यदि आपको अल्मोड़ा घूमने का सौभाग्य मिले हो आप इस मंदिर एक बार जरूर जाइए दर्शन करने के लिए .
अल्मोड़ा का कसार देवी मंदिर
अल्मोड़ा पर्यटन स्थलों में सबसे पसंदीदा कसार देवी मंदिर है .अल्मोड़ा में एक छोटा सा गाँव है जो अपने प्रतिष्ठित कासर देवी मंदिर के लिए जाना जाता है। इस मंदिर परिसर में जीपीएस 8 ( GPS -8) पॉइंट मार्क किए गए हैं . यह पॉइंट अमेरिका के नासा के वैज्ञानिकों द्वारा मंदिर के मुख्य द्वार के लेफ्ट साइड मार्क किया गया है .
अल्मोड़ा का नंदादेवी मंदिर
नंदा देवी मंदिर का इतिहास दोस्तों 1000 साल से अधिक पुराना है .यह मंदिर समर्पित है चंद वंश को ,इस नंदा देवी मंदिर पर प्रत्येक वर्ष सितंबर महीने में मेला का आयोजन किया जाता है . नंदा देवी दुर्गा का अवतार है .यह मंदिर शहर से 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है .
अल्मोड़ा में जलना हिमालय की सुंदरता
जलना एक छोटा सा पहाड़ी शहर है.जो यात्रियों को कुछ एकांत स्थान प्रदान करता है.जालना अल्मोड़ा से 30 किमी दूर स्थित है.जालना 1,675 मीटर की ऊंचाई पर है.यह स्थिति हिमालयन रेंज की मनोरम दृष्टि प्रदान करती है.
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By Shaurya Punj
शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.
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