Constitution Day 2023: संविधान निर्माण में इन महिलाओं का रहा अमूल्य योगदान

हर साल 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है. 26 नवंबर, 1949, वह 'पवित्र' दिन था जब स्वतंत्र भारत की संविधान सभा ने वर्तमान संविधान को विधिवत रूप से अपनाया और देश के कामकाज में इसके महत्व को बरकरार रखा. संविधान के निर्माण में कई महिलाओं का भी योगदान रहा है.
अम्मू स्वामीनाथन का जन्म केरल के पालघाट जिले के अनाकारा में हुआ था. वह 1946 में मद्रास निर्वाचन क्षेत्र से संविधान सभा का हिस्सा बनी थीं.
दक्षिणायनी वेलायुद्ध सविंधान सभा की एकमात्र दलित महिला थीं. कोच्चि के बोलगाटी द्वीप पर 4 जुलाई, 1912 को दक्षिणायनी वेलयुद्धन का जन्म हुआ था. वह समाज के शोषित और वंचित वर्गों की नेता थीं.
18 अगस्त, 1900 को इलाहाबाद में जन्मी पं जवाहरलाल नेहरू की बहन विजयलक्ष्मी पंडित भी संविधान निर्माण कमेटी की सदस्य थीं. उन्होंने राजनीतिक जीवन की शुरुआत इलाहाबाद नगर-निगम चुनाव से की थी.
संविधान सभा में एकमात्र मुस्लिम महिला बेगम एजाज रसूल थीं. साल 1950 में जब भारत में मुस्लिम लीग भंग हुई, तो बेगम एजाज कांग्रेस में शामिल हो गयीं. इसके बाद साल 1952 में वह राज्यसभा के लिए चुनी गयीं.
दुर्गा बाई देशमुख का जन्म 15 जुलाई, 1909 को हुआ था. 12 साल की उम्र से ही उन्होंने असहयोग आंदोलन में भाग लिया. साल 1936 में दुर्गाबाई ने आंध्र महिला सभा की स्थापना की. 1975 में उन्हें पद्म विभूषण सम्मान मिला.
लखनऊ के प्रतिष्ठित परिवार में 22 फरवरी 1908 को जन्मी कमला चौधरी भी संविधान सभा की सदस्य थीं. वे एक प्रसिद्ध लेखिका थीं. कमला गांधीजी से जुड़ी हुई थीं. वे अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की सदस्य भी थीं.
हंसा जिवराज मेहता संविधान निर्माण में अपना योगदान देने के साथ पत्रकारिता से भी जुड़ी हुई थीं. उनका जन्म 3 जुलाई 1887 को बड़ौदा में हुआ था.वह 1945-46 में अखिल भारतीय महिला सम्मेलन की अध्यक्ष बनीं.
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संविधान सभा की सदस्य मालती चौधरी का जन्म पूर्वी बंगाल में हुआ था. वे उड़ीसा के पूर्व मुख्यमंत्री नाबकृष्ण चौधरी की पत्नी थीं. उन्होंने महात्मा गांधी द्वारा चलाये गये नमक सत्याग्रह में भी बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया था.
सत्याग्रह और भारत छोड़ो आंदोलन से जुड़ी पूर्णिमा बनर्जी भी संविधान सभा की सदस्य थीं. समाजवादी विचारधारा से प्रेरित पूर्णिमा बनर्जी उत्तर प्रदेश में आजादी की लड़ाई के लिए बने महिलाओं के समूह की सदस्य थीं.
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तिरुवनंतपुरम में जन्मी एनी मसकैरिनी भी संविधान सभा की सदस्य थीं. एनी त्रावणकोर में चल रहे स्वतंत्रता संग्राम में शामिल थीं. साल 1951 के आम चुनावों में वे लोकसभा सदस्य के रूप में चुनी गयी थीं.
कपूरथला के पूर्व महाराजा हरनाम सिंह की पुत्री राजकुमारी अमृत कौर भी संविधान सभा की सदस्य थीं. उनका जन्म 2 फरवरी, 1889 को लखनऊ में हुआ था. इन्होंने ही देश में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान की स्थापना की थी.
रेणुका रे भी संविधान सभा की सदस्य थीं. वह आइसीएस अधिकारी संतीश चंद्र मुखर्जी और अखिल भारतीय महिला सम्मेलन की सदस्य चारूलता मुखर्जी की बेटी थीं. इन्होंने ही अखिल बंगाल महिला संघ का गठन किया था.
संविधान सभा की सदस्य लीला रॉय का जन्म असम के गोलपाड़ा जिले में 2 अक्तूबर, 1900 को हुआ था. साल 1923 में दीपाली संघ और स्कूलों की स्थापना कर उन्होंने देशभर में चर्चा पायी थी.
देश की पहली महिला के तौर पर राज्यपाल का पद संभालने वाली सरोजनी नायडू का जन्म 23 फरवरी, 1879 को हैदराबाद में हुआ था.नायडू संविधान सभा के उन सदस्यों में शामिल थीं, जिन्होंने संविधान का निर्माण किया था.
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By Prabhat Khabar News Desk
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