Night Shift आपको बर्बाद कर देगा, शोध में खुलासा हो सकती है ये 6 गंभीर बीमारियां

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Night Shift Side Effects : नाइट शिफ्ट में लगातार काम करना आपके शरीर और दिमाग दोनों को नुकसान पहुंचा सकता है. शोधों के अनुसार इससे डिप्रेशन, हार्ट डिजीज, कैंसर और अनिद्रा जैसी 6 गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. जानिए इससे बचने के उपाय.\
Night Shift Side Effects: बेहतर करने की चाहत और काम के प्रेशर की वजह से बीपीओ, हेल्थकेयर, आईटी और मीडिया जैसे क्षेत्रों में नाइट शिफ्ट का चलन आम हो गया है. लेकिन लगातार रात की ड्यूटी करने से शरीर के प्राकृतिक सर्केडियन रिदम में गंभीर असंतुलन पैदा हो जाता है. विभिन्न अध्ययन यह संकेत देते हैं कि नाइट शिफ्ट का दीर्घकालिक असर न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ता है. आइए जानते हैं लगातार नाइट शिफ्ट में काम करने के क्या नुकसान हैं.
मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है प्रभाव
जर्नल ऑफ ऑक्यूपेशनल हेल्थ साइकोलॉजी की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि नाइट शिफ्ट में काम करने वालों में डिप्रेशन और एंग्जायटी के लक्षण दोगुने हो जाते हैं. लगातार नींद में कटौती से मूड डिसऑर्डर और इमोशनल डिसबैलेंस होने लगता है.
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हृदय रोग का खतरा
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल, 2016 की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नाइट शिफ्ट में काम करने वालों में हृदय रोग (जैसे हाई ब्लड प्रेशर, कोरोनरी हार्ट डिजीज) का खतरा 40 फीसदी तक बढ़ जाता है.
मेटाबॉलिक और वजन से जुड़ी समस्याएं
इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ओबेसिटी के अध्ययन में इस बात का खुलासा किया गया है कि रात में काम करने वाले लोगों में वजन बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है. साथ ही ऐसे लोगों में टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम का भी खतरा रहता है, क्योंकि उनका खानपान और नींद चक्र असामान्य होता है.
नींद की गुणवत्ता में गिरावट
स्लीप रिसर्च सोसाइटी की एक रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोगों में अनिद्रा की शिकायत अधिक होती है, जिससे उनका कार्य प्रदर्शन भी प्रभावित होता है.
कैंसर का जोखिम
डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के अनुसार लगातार नाइट शिफ्ट करने वाले लोगों में “कार्सिनोजेनिक” यानी कि कैंसर कारक का खतरा बढ़ जाता है. खासकर ब्रेस्ट कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर जैसे मामले बढ़ने लगते हैं.
कम हो जाती है निर्णय लेने की क्षमता
यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया स्टडी में कहा गया है कि लंबे समय तक नाइट शिफ्ट में काम करने से याददाश्त, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और निर्णय लेने की ताकत में कमी आती है. साथ ही कुछ रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि इसका असर प्रजनन क्षमता पर भी पड़ता है.
क्या है बचाव के उपाय
- शिफ्ट रोटेशन में संतुलन रखें
- दिन में 6–7 घंटे की गुणवत्ता वाली नींद लें
- नाइट शिफ्ट काम करते हैं तो कैफीन का सेवन सीमित मात्रा में करें
- अक्सर देखने को मिलता है कि नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोग अपने खानपान का ध्यान नहीं रखते हैं. इसलिए इस शिफ्ट में लगातार काम करने वाले लोगों को नियमित व्यायाम और सही डाइट अपनाने सलाह दी जाती है.
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By Sameer Oraon
इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.
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