ऐसा गांव जहां ड्राइंग रूम भारत और किचन म्यांमार में, यहां की परंपरा जानकर हिल जाएगा सिर
Published by : Sameer Oraon Updated At : 22 Jun 2025 4:13 PM
Pic Credit- Freepik, Only For Symbolism
Nagaland Tourism: लोंगवा गांव नागालैंड का एक अनोखा गांव है जहां एक ही घर भारत और म्यांमार दोनों देशों में फैला है. इस गांव में मुख्य रूप से कोंयाक जनजाति के लोग रहते हैं जहां कभी सिर काटकर लाने की अनोखी परंपरा रही थी. इसके अलावा द अंग की रियासत इस गांव को और खास बनाती है. जानिए इस रहस्यमयी गांव की अनसुनी बातें.
Nagaland Tourism: कल्पना कीजिए कि आप जिस घर में रहते हैं, उसकी एक दीवार किसी और देश में है और दूसरे दिवार किसी और देश में. आप भी सोच रहे होंगे ये कैसे हो सकता है. लेकिन ये सच है. हम बात कर रहे हैं नागालैंड के मोन जिले में स्थित लोंगवा गांव (Longwa village) की. यह गांव सिर्फ अपनी लोकेशन के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अनोखे रीति-रिवाजों और रहन-सहन के लिए भी दुनियाभर में मशहूर है.
एक गांव, दो देश
नव भारत टाइम्स और अमर उजाला की एक रिपोर्ट के मुताबिक लोंगवा गांव की सबसे अनोखी बात यह है कि भारत-म्यांमार की अंतरराष्ट्रीय सीमा इस गांव के बीचोंबीच से गुजरती है. यह कोई साधारण सीमा नहीं है, ये गांव के मुखिया यानी द अंग के घर को भी दो हिस्सों में बांटती है. इस घर का ड्राइंग रूम भारत में है तो किचन म्यांमार में! यहां रहने वाले लोग बिना किसी पासपोर्ट या वीजा के दोनों देशों में बे-रोकटोक आ-जा सकते हैं. यहां के लोग दोनों देशों में अपनी मर्जी से घूम सकते हैं.
कोंयाक जनजाति लोग रहते हैं मुख्य रूप से इस गांव में
लोंगवा गांव की आबादी मुख्य रूप से कोंयाक जनजाति (Konyak Tribe) की है, जिन्हें कभी भयंकर हेडहंटर्स के रूप में जाना जाता था. नव भारत टाइम्स की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 1960 के दशक तक सिर काटकर लाने की परंपरा यहां आम थी. इसे बहादुरी और वीरता की निशानी भी माना जाता था. आज भी कई परिवारों के पास पीतल की खोपड़ियों से बने हार मौजूद हैं, जो उनकी वीरता की याद दिलाते हैं.
Also Read: Relationship Tips: अगर रिश्ता बचाना है तो ये 5 बातें आज ही पार्टनर से कर लें, वरना पछताएंगे
द अंग की रियासत
नव भारत टाइम्स की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यहां के मुखिया द अंग का दबदबा म्यांमार और अरुणाचल के 70 से ज्यादा गांवों में माना जाता है. खास बात यह है कि द अंग की करीब 60 पत्नियां हैं. उनका प्रभाव दोनों देशों में समान रूप से महसूस किया जाता है. लोंगवा गांव की सत्ता और संस्कृति पर द अंग का वर्चस्व आज भी कायम है.
गांव की खूबसूरती के बीच छुपी है कड़वी सच्चाई
रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया है कि लोंगवा गांव की खूबसूरती के बीच एक कड़वी सच्चाई भी छुपी है. यहां बड़े पैमाने पर अफीम का सेवन होता है. हालांकि इसकी खेती गांव में नहीं होती, यह म्यांमार से अवैध रूप से तस्करी कर लाया जाता है.
लोंगवा का दिल जीतने वाला अंदाज
लोंगवा गांव के लोग अपने मेहमानों का दिल खोलकर स्वागत करते हैं. चाहे भारत से आएं या म्यांमार से, हर अतिथियों को यहां अपनापन महसूस होता है. गांव की शांति, प्राकृतिक सुंदरता और अनोखा जीवन का अनुभव इसे हर यात्री के लिए यादगार बना देता है.
Also Read: Parenting Tips: सुबह से शाम तक बच्चों के चेहरे पर बनी रहेगी मुस्कान, हर दिन जरूर करें ये काम
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Sameer Oraon
समीर उरांव, डिजिटल मीडिया में सीनियर जर्नलिस्ट हैं और वर्तमान में प्रभात खबर.कॉम में सीनियर कटेंट राइटर के पद पर हैं. झारखंड, लाइफ स्टाइल और स्पोर्ट्स जगत की खबरों के अनुभवी लेखक समीर को न्यूज वर्ल्ड में 5 साल से ज्यादा का वर्क एक्सपीरियंस है. वह खबरों की नब्ज पकड़कर आसान शब्दों में रीडर्स तक पहुंचाना बखूबी जानते हैं. साल 2019 में बतौर भारतीय जनसंचार संस्थान से पत्रकारिता करने के बाद उन्होंने हिंदी खबर चैनल में बतौर इंटर्न अपना करियर शुरू किया. इसके बाद समीर ने डेली हंट से होते हुए प्रभात खबर जा पहुंचे. जहां उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और वैल्यू ऐडेड आर्टिकल्स लिखे, जो रीडर्स के लिए उपयोगी है. कई साल के अनुभव से समीर पाठकों की जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हुए SEO-ऑप्टिमाइज्ड, डेटा ड्रिवन और मल्टीपल एंगल्स पर रीडर्स फर्स्ट अप्रोच राइटिंग कर रहे हैं.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










