Mahashivratri की रात क्यों नहीं सोना चाहिए, क्या है इससे जुड़ी वैज्ञानिक और धार्मिक मान्यताएं

Mahashivratri Ki Rat Kyu Sona Nahi Chaiye, Mahashivratri Night Benefits, Shivaratri Puja Vidhi, Importance: महाशिवरात्रि की रात को सोना वर्जित होता है. इस बारे में अध्यात्मिक गुरु सद्गुरु बताते हैं कि इसका धार्मिक के साथ-साथ वैज्ञानिक कारण भी है. आपको बता दें कि साल में कुल 13 शिवरात्रि मनायी जाती है. जिसमें फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की शिवरात्रि अद्भूत होती है. यही कारण है कि इसे महाशिवरात्रि भी कहा जाता है.
Mahashivratri Ki Rat Kyu Sona Nahi Chaiye, Mahashivratri Night Benefits, Shivaratri Puja Vidhi, Importance: महाशिवरात्रि की रात को सोना वर्जित होता है. इस बारे में अध्यात्मिक गुरु सद्गुरु बताते हैं कि इसका धार्मिक के साथ-साथ वैज्ञानिक कारण भी है. आपको बता दें कि साल में कुल 13 शिवरात्रि मनायी जाती है. जिसमें फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की शिवरात्रि अद्भूत होती है. यही कारण है कि इसे महाशिवरात्रि भी कहा जाता है.
इस दिन रात काफी अंधेरी होती है. लेकिन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस अंधेरी रात की खास बात यह है कि इस दौरान ऊर्जा का संचार नीचे से ऊपर की ओर होता है. आदिमानव के रेंग कर चलने से पैरों के बल चलने वाले परिवर्तन का उदाहरण देते हुए सद्गुरु बताते हैं कि इस रात में विशेष ताकत होती है. जो शरीर में नीचे से ऊपर की ऊर्जा का संचार करती है. यही कारण है कि इस रात को रीड की हड्डी में ऊर्जा का संचार हो इसलिए सोना नहीं चाहिए.
इसका धार्मिक पक्ष भी है. मान्यताओं के अनुसार यह रात भगवान शिव और माता पार्वर्ती की विशेष रात होती है. ऐसा मानना है कि इस दिन दोनों संसार भ्रमण के लिए निकलते हैं. ऐसे में महाशिवरात्रि को पूरी रात जागरण करने की सलाह दी जाती है.
इन सब के अलावा कुछ और ग्रंथों में भी वर्णित है जो बताते हैं कि इस रात्रि को अकेले रहना चाहिए और भगवान शिव की पूजा में विलीन रहना चाहिए.
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रात्रि प्रथम प्रहर पूजा: 06:27 PM से 09:29 PM तक
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रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा: 09:29 PM से 12:31 AM, मार्च 12
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रात्रि तृतीय प्रहर पूजा: 12:31 AM से 03:32 AM, मार्च 12
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रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा: 03:32 AM से 06:34 AM, मार्च 12
Posted By: Sumit Kumar Verma
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