World Tiger Day 2022: आज है विश्व टाइगर दिवस, यहां पढ़ें टाइगर डे से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

Updated at : 29 Jul 2022 7:24 AM (IST)
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World Tiger Day 2022: आज है विश्व टाइगर दिवस, यहां पढ़ें टाइगर डे से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य

World Tiger Day 2022: बाघों को संरक्षण देने और उनकी प्रजाती को विलुप्त होने से बचाने के लिए विश्व बाघ दिवस मनाया जाता है. दुनियाभर में 29 जुलाई के दिन विश्व बाघ दिवस मनाया जाता है.

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World Tiger Day 2022: वैश्विक बाघ दिवस (Global Tiger Day) या अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस (International Tiger Day) हर साल 29 जुलाई को जंगली बिल्लियों की घटती आबादी के बारे में जागरूकता बढ़ाने और उनके संरक्षण के प्रयासों के लिए मनाया जाता है. इसका लक्ष्य बाघों के प्राकृतिक आवासों (natural habitats) की रक्षा के लिए एक वैश्विक प्रणाली को बढ़ावा देना और बाघ संरक्षण के मुद्दों के लिए जन जागरूकता (public awareness) और समर्थन बढ़ाना है. इस वर्ष 12वां अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस (International Tiger Day) है.

विश्व बाघ दिवस (World Tiger Day) या अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस (International Tiger Day): महत्व

WWF विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले 100 सालों में दुनिया-भर में लगभग 97 फीसदी जंगली बाघों आबादी घट गई है. एक सदी पहले लगभग 100,000 बाघों की तुलना में वर्तमान में केवल 3,000 बाघ जीवित हैं. वर्ल्ड वाइल्डलाइफ फंड (WWF), इंटरनेशनल फंड फॉर एनिमल वेलफेयर (IFAW) और स्मिथसोनियन कंजर्वेशन बायोलॉजी इंस्टीट्यूट (SCBI) सहित कई अंतरराष्ट्रीय संगठन भी जंगली बाघों के संरक्षण में लगे हुए हैं. बाघ अलग-अलग रंगों के होते हैं जैसे सफेद बाघ, काली धारियों वाला सफेद बाघ, काली धारियों वाला भूरा बाघ और गोल्डन टाइगर और उन्हें चलते हुए देखना एक अद्भुत नजारा हो सकता है. अब तक बाली टाइगर, कैस्पियन टाइगर, जावन टाइगर और टाइगर हाइब्रिड ऐसी प्रजातियां हैं जो विलुप्त हो चुकी हैं.

अंतर्राष्ट्रीय बाघ दिवस का इतिहास

वैश्विक बाघ दिवस (Global Tiger Day) 2010 में रूस (Russia) में 13 टाइगर रेंज देशों द्वारा सेंट पीटर्सबर्ग (Saint Petersburg) घोषणा पर हस्ताक्षर के दौरान अस्तित्व में आया था. इन टाइगर रेंज देशों की सरकारों ने 2022 तक प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और बाघों की संख्या को दोगुना करने के लिए संरक्षण को प्रोत्साहित करने का संकल्प लिया था. अवैध शिकार और बाघ के शरीर के अंगों जैसे हड्डी (bone), त्वचा (skin) का अवैध व्यापार जंगली बाघों के लिए सबसे बड़ा खतरा है. बाघ के शरीर के अंगों की मांग ने जंगली बिल्लियों के अवैध शिकार और तस्करी को बढ़ा दिया है.

बाघों की विभिन्न प्रजातियां

साइबेरियाई बाघ, बंगाल बाघ, इंडोचाइनीज बाघ, मलय बाघ और दक्षिण चीन बाघ. बंगाल टाइगर मुख्य रूप से भारत में पाए जाते हैं, जिनकी आबादी बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, चीन और म्यांमार में भी कम है. यह बाघ की सभी उप-प्रजातियों में सबसे अधिक है, जिसमें 2,500 से अधिक जंगल में बचे हैं.

बाघ संरक्षण का महत्त्व

  • बाघ संरक्षण वनों के संरक्षण का प्रतीक है.

  • बाघ एक अनूठा जानवर है जो किसी स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र और उसकी विविधता में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

  • यह एक खाद्य शृंखला में उच्च उपभोक्ता है जो खाद्य शृंखला में शीर्ष पर होता है और जंगली (मुख्य रूप से बड़े स्तनपायी) आबादी को नियंत्रण में रखता है.

  • इस प्रकार बाघ शिकार द्वारा शाकाहारी जंतुओं और उस वनस्पति के मध्य संतुलन बनाए रखने में मदद करता है जिस पर वे भोजन के लिये निर्भर होते हैं.

  • बाघ संरक्षण का उद्देश्य मात्र एक खूबसूरत जानवर को बचाना नहीं है.

  • यह इस बात को सुनिश्चित करने में भी सहायक है कि हम अधिक समय तक जीवित रहें क्योंकि इस संरक्षण के परिणामस्वरूप हमें स्वच्छ हवा, पानी, परागण, तापमान विनियमन आदि जैसी पारिस्थितिक सेवाओं की प्राप्ति होती है.

  • इसके अलावा बाघ संरक्षण के महत्त्व को “तेंदुओं, सह-परभक्षियों और शाकभक्षियों की स्थिति-2018” (Status of Leopards, Co-predators and Megaherbivores- 2018) रिपोर्ट द्वारा दर्शाया जा सकता है.

  • यह वर्ष 2014 की तुलना में एक उल्लेखनीय वृद्धि है, जो कि देश के बाघों वाले 18 राज्यों के वनाच्छादित प्राकृतिक आवासों में 7,910 थी.

  • यह रिपोर्ट इस बात का प्रमाण है कि बाघों के संरक्षण से पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण होता है.

भारत में बाघ संरक्षण परियोजनाएँ

प्रोजेक्ट टाइगर 1973: यह वर्ष 1973 में शुरू की गई पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) की एक केंद्र प्रायोजित योजना है. यह देश के राष्ट्रीय उद्यानों में बाघों को आश्रय प्रदान करता है.

राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण: यह MoEFCC के अंतर्गत एक वैधानिक निकाय है और इसको वर्ष 2005 में टाइगर टास्क फोर्स की सिफारिशों के बाद स्थापित किया गया था.

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