ePaper

उत्तराखंडः राजशाही के दौर की यादें, राजदरबार में 4 से 5 दिन तक होती थी होली, आमंत्रित होते थे जागीरदार भी

Updated at : 18 Mar 2022 8:43 AM (IST)
विज्ञापन
उत्तराखंडः राजशाही के दौर की यादें, राजदरबार में 4 से 5 दिन तक होती थी होली, आमंत्रित होते थे जागीरदार भी

Holi 2022 : हल्दी सहित पेड़-पौधों से अलग-अलग रंग बनाए जाते थे. रंग फेंकने के लिए बांस की पिचकारी बनाई जाती थी. इस काम को विशेष वर्ग के लोग करते थे. रंग के साथ ही गीतों और नृत्य पर जोर रहता था. राजा और जागीरदार होली खेलने के साथ ही नृत्य और गीत का लुत्फ लेते थे.

विज्ञापन

श्रीनगर (उत्तराखंड) : पुराने लोगों को होली (Holi 2022 ) पर राजशाही के दौर में होने वाली होली याद आ जाती है। गढ़वाल की राजधानी श्रीनगर में होली उत्सव चार से पांच दिन तक चलता था. राजा की ओर से राजदरबार में होली खेलने के लिए अपने सामंत (जागीरदार) आमंत्रित किए जाते थे. इस दौरान रंग लगाने के साथ ही नाच-गाने का आयोजन होता था. खास बात यह भी है कि होली त्योहार से लगान (कर) वसूलने निकलते थे. साथ ही राजा सामंतों के साथ युद्ध की रणनीति तय करते थे.

कभी अलकनंदा नदी के तट पर बसा श्रीनगर गढ़वाल के राजाओं की राजधानी हुआ करती थी. होली का त्योहार यहां बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता रहा है. यहां होली एक या दो दिन नहीं बल्कि चार से पांच दिन तक मनाई जाती थी. राजा और सामंतों के लिए होली मनोरंजन के साथ ही आगामी रणनीति तय करने का अवसर भी थी. गढ़वाल के इतिहास पर शोध कर रहे युवा इतिहासकार कमल रावत बताते हैं कि राजा की ओर से होली खेलने के लिए अपने जागीरदारों को बुलावा भेजा जाता था. राजदरबार से बुलावा आने पर खाली हाथ जाने का सवाल नहीं होता था. जागीरदार राजा को प्रसन्न करने के लिए तरह-तरह के उपहार लाते थे.

हल्दी सहित पेड़-पौधों से अलग-अलग रंग बनाए जाते थे. रंग फेंकने के लिए बांस की पिचकारी बनाई जाती थी. इस काम को विशेष वर्ग के लोग करते थे. रंग के साथ ही गीतों और नृत्य पर जोर रहता था. राजा और जागीरदार होली खेलने के साथ ही नृत्य और गीत का लुत्फ लेते थे. इस दौरान राजा की पाकशाला में तरह-तरह के व्यजंन बनाए जाते थे.

Also Read: Happy Holi Wishes 2022 LIVE: गुलाल का रंग… होली पर अपने दोस्तों और परिजनों दें यहां से बधाई

इसी मौके पर राजा और जागीरदार पड़ोसी देशों की सामरिक स्थिति पर चर्चा करते हुए युद्ध की रणनीति भी तय करते थे. साथ ही जागीरदार अपने पाल्यों व रिश्तेदारों का रिश्ता भी तय करते थे. चार से पांच दिन तक चले उत्सव के बाद राजा जागीरदारों को विदा करते थे. वहीं वे लगान वसूलने निकल पड़ते थे जबकि प्रजा नई बैलों की जोड़ी, हल व मवेशी खरीदना शुरू करती थी.

विज्ञापन
संवाद न्यूज

लेखक के बारे में

By संवाद न्यूज

संवाद न्यूज is a contributor at Prabhat Khabar.

Tags

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola