ePaper

Gita Updesh: खुद को जीतना है? तो श्रीकृष्ण की ये बात गांठ बांध लो

Updated at : 12 Apr 2025 7:36 AM (IST)
विज्ञापन
Gita Updesh

Gita Updesh

Gita Updesh: गीता सिखाती है कि कर्म करते रहो, फल की चिंता मत करो। यही सच्चे सुख और शांति का मार्ग है। मोह-माया में उलझकर हम खुद को भूल जाते हैं, लेकिन गीता आत्मा की पहचान कराकर हमें भीतर से मजबूत बनाती है।

विज्ञापन

Gita Updesh: श्रीमद्भगवद्गीता एक जीवनशैली है, जो सोचने और जीने का नजरिया बदल देती है. इसमें वह ज्ञान है जो इंसान को कठिन समय में स्थिर रहने की शक्ति देता है. गीता बताती है कि कर्म करते जाओ, परिणाम की चिंता छोड़ दो. यही शांति और सच्चे सुख का रास्ता है. मोह और माया में उलझकर हम अक्सर खुद को खो देते हैं, पर गीता आत्मा की पहचान कराती है. आज के समय में, जब रिश्ते कमजोर पड़ रहे हैं और जीवन में तनाव बढ़ गया है, तब गीता की सीख हमें मजबूत बनाने का काम करती है. यह न सिर्फ सही दिशा दिखाती है, बल्कि भीतर से मजबूत बनाकर हर स्थिति में संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा भी देती है.

इंसान को कमजोर बनाती हैं ये दो भाव

भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि सच्चा सुख पाने के लिए क्रोध और अहंकार पर नियंत्रण बहुत जरूरी है, क्योंकि यही दो भाव इंसान को अंदर से कमजोर कर देते हैं. श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है कि जो व्यक्ति अन्याय देखकर भी चुप रहता है, उसकी प्रतिभा का कोई मूल्य नहीं है. जीवन में संतुलन बनाए रखना, सत्य के पक्ष में खड़ा होना और शांत रहते हुए सही बात कहना ही असली बुद्धिमानी है.

यह भी पढ़ें- Gita Updesh: मन की शांति से रिश्तों की सुलह तक, गीता से समझे संतुलन का मूलमंत्र

यह भी पढ़ें- Gita Updesh: सही दिशा में कर्म ही सफलता की नींव, याद रखें गीता के ये 3 मंत्र

सही दिशा में काम जरूरी

श्रीकृष्ण गीता में कहते हैं कि यदि व्यक्ति खुद पर भरोसा रखे और लक्ष्य के प्रति समर्पित रहे, तो वह कोई भी मंजिल पा सकता है. सफलता के लिए आत्मविश्वास के साथ-साथ सही दिशा में लगातार कोशिश जरूरी है. जब मन में संकल्प मजबूत हो और कदम निश्चित दिशा में हों, तो कोई भी कठिनाई रास्ता नहीं रोक सकती है. कहा भी जाता है कि विश्वास, धैर्य और कर्म ही सफलता की सच्ची कुंजी हैं.

यहां से मिलेगी सफलता की शक्ति

गीता उपदेश के अनुसार, सच्ची प्रेरणा हमारे अपने विचारों से आती है. जैसा हम सोचते हैं, वैसा ही हमारा जीवन बनता है. इसलिए इंसान को हमेशा सकारात्मक और बड़ा सोचना चाहिए. श्रीकृष्ण कहते हैं कि खुद पर विजय पाना ही सबसे बड़ी जीत है. आत्म-प्रेरणा से ही आत्मबल मिलता है, जो हमें हर चुनौती का सामना करने की शक्ति देता है. भीतर की शक्ति को पहचानो, वहीं से सफलता की शुरुआत होती है.

यह भी पढ़ें- Gita Updesh: बेचैनी में संबल बनती है भगवद्गीता, मन में चल रही उथल-पुथल को करेगी शांत

Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. प्रभात खबर किसी भी तरह से इनकी पुष्टि नहीं करता है.

विज्ञापन
Shashank Baranwal

लेखक के बारे में

By Shashank Baranwal

जीवन का ज्ञान इलाहाबाद विश्वविद्यालय से, पेशे का ज्ञान MCU, भोपाल से. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के नेशनल डेस्क पर कार्य कर रहा हूँ. राजनीति पढ़ने, देखने और समझने का सिलसिला जारी है. खेल और लाइफस्टाइल की खबरें लिखने में भी दिलचस्पी है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola