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भारत का अनोखा भगवान गणेश का मंदिर, जहां चिठ्ठी लिख मांगी जाती हैं मन्नत, रहस्य जान होंगे हैरान!

Updated at : 26 Aug 2025 5:45 PM (IST)
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Garh Ganesh Temple

गढ़ गणेश मंदिर की प्रतिमा, Pic Credit- Garh Ganesh Website

Garh Ganesh Temple: जयपुर के गढ़ गणेश मंदिर की अनोखी परंपराओं और इतिहास को जानें. यहां भगवान गणेश बाल स्वरूप में विराजते हैं और भक्त मन्नत पूरी करने के लिए चिट्ठियां भेजते हैं. 365 सीढ़ियों के ऊपर से जयपुर का मनोरम दृश्य देखें और आस्था का अद्भुत अनुभव लें.

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Garh Ganesh Temple: भारत में गणेश चतुर्थी का पर्व हर साल बेहद धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है. जगह जगह पर बप्पा की प्रतिमा स्थापित की जाती है. पंडालों को आकर्षक ढंग से सजा दिया जाता है. यूं तो भगवान गणेश की देशभर में कई मंदिर हैं, जहां सालों भर उनकी पूजा होती है. लेकिन क्या आपने कभी ऐसे मंदिर के बारे में सुना है यहां भगवान गणेश की प्रतिमा पर सूंढ़ ही नहीं है. जहां भक्त अपनी मन्नत पूरी करने के लिए चिठ्ठियां भेजते हैं. जीं हां यहां हम बात कर रहे हैं जयपुर के गढ़ गणेश मंदिर की. यह मंदिर अपनी कई खास परंपराओं के लिए देशभर में प्रसिद्ध है. यहां भगवान गणेश की प्रतिमा बाल स्वरूप में स्थापित है. खास बात यह है कि इस रूप में भगवान के पास सूंड नहीं है. भक्त मानते हैं कि यहां गणेश जी ‘पुरुषकृति स्वरूप’ में विराजते हैं.

300 साल पुराना इतिहास

गढ़ गणेश मंदिर का इतिहास 18वीं सदी से जुड़ा है. इसका निर्माण महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने कराया था. मान्यता है कि जयपुर बसाने से पहले जब उन्होंने अश्वमेध यज्ञ किया, उसी समय इस मंदिर की स्थापना की गई. उन्होंने मंदिर की स्थापना इस प्रकार करवाई कि सिटी पैलेस के चंद्र महल से दूरबीन की मदद से गणपति के दर्शन हो सकें. यह उनकी आस्था और स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण है.

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मूषकों से संवाद की अनोखी परंपरा

मंदिर परिसर में दो विशाल मूषक स्थापित हैं. भक्त अपनी परेशानियां और इच्छाएं इनके कानों में कहते हैं. मान्यता है कि ये मूषक सीधे गणेश जी तक भक्तों की बात पहुंचाते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी होती हैं.

चिट्ठियों के जरिए पहुंचती है श्रद्धा

गढ़ गणेश मंदिर की सबसे अनोखी परंपरा है मन्नत पूरी करने के लिए चिट्ठियां भेजना. भक्त यहां शादी, नए घर, नौकरी या बच्चे के जन्म जैसे शुभ अवसरों पर सबसे पहले गणपति को निमंत्रण भेजते हैं. हर रोज मंदिर के पते पर सैकड़ों चिट्ठियां पहुंचती हैं और इन्हें भगवान के चरणों में रखा जाता है.

365 सीढ़ियां और अद्भुत नजारा

गढ़ गणेश मंदिर तक पहुंचने के लिए 365 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जो साल के 365 दिनों का प्रतीक मानी जाती हैं. ऊपर पहुंचकर भक्तों को न केवल बप्पा के दर्शन होते हैं, बल्कि जयपुर शहर का मनोरम दृश्य भी दिखाई देता है. विशेषकर सूर्यास्त का दृश्य यहां बेहद मनमोहक होता है.

आस्था का अद्भुत केंद्र

गढ़ गणेश मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि आस्था और परंपराओं का जीवंत प्रतीक है. यदि आप जयपुर जाते हैं, तो इस मंदिर के दर्शन अवश्य करें. यहां का शांत वातावरण और भक्तों का विश्वास आपको एक अलग ही अनुभव देगा.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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