क्या आपका खाना सुरक्षित है? FSSAI ने जंग लगे चाकुओं पर जारी किया बड़ा आदेश

Edited by Pushpanjali
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FSSAI Advisory On Rusted Kitchen Tools

FSSAI Advisory: FSSAI ने खाद्य उद्योग में जंग लगे और खराब क्वालिटी वाले चाकू, ब्लेड व कटिंग टूल्स के इस्तेमाल पर सख्त निर्देश जारी किए हैं. हैदराबाद के एक खाद्य सुरक्षा कार्यकर्ता की चार साल लंबी मुहिम के बाद यह फैसला लिया गया, जिसका उद्देश्य सुरक्षित भोजन सुनिश्चित करना है.

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FSSAI Advisory: हम रोजाना ब्रेड, केक, सब्जियां और अन्य खाद्य पदार्थ खाते हैं, लेकिन शायद ही कभी इस बात पर ध्यान देते हैं कि इन्हें काटने या तैयार करने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण कितने सुरक्षित हैं. अब भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाद्य उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है, जिसमें जंग लगे और खराब गुणवत्ता वाले चाकू तथा कटिंग उपकरणों के इस्तेमाल पर रोक लगाने की बात कही गई है.

क्या है FSSAI का नया निर्देश?

15 जून को जारी सलाह में FSSAI ने सभी फूड बिजनेस ऑपरेटर्स (FBOs) से कहा है कि वे केवल फूड-ग्रेड और जंग-रोधी (Corrosion Resistant) चाकू, ब्लेड और कटिंग उपकरणों का ही इस्तेमाल करें. प्राधिकरण का कहना है कि जंग लगे, टूटे-फूटे, पेंट उखड़े हुए या ठीक से साफ न किए गए उपकरण खाद्य पदार्थों को दूषित कर सकते हैं.

ऐसे उपकरणों के इस्तेमाल से खाने में धातु के कण, रासायनिक तत्व या हानिकारक सूक्ष्मजीव पहुंच सकते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकते हैं.

एक जागरूक नागरिक की मुहिम से आया बदलाव

हैदराबाद के खाद्य सुरक्षा कार्यकर्ता अनिरुद्ध गुप्ता पिछले चार वर्षों से इस मुद्दे को लगातार उठा रहे थे. खाद्य उद्योग से जुड़े कार्यक्रमों और उत्पादन इकाइयों के दौरे के दौरान उन्होंने देखा कि कई जगहों पर पुराने और जंग लगे ब्लेड तथा कटिंग उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है.

धातुओं की गुणवत्ता और बेकरी उद्योग की कार्यप्रणाली की जानकारी होने के कारण उन्होंने इस विषय पर गहराई से अध्ययन किया और संबंधित विभागों को लगातार पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की.

2022 से शुरू हुई थी पहल

बताया जाता है कि वर्ष 2022 में उन्होंने पहली बार FSSAI को पत्र लिखकर बड़े ब्रेड निर्माताओं की जांच कराने और ब्रेड स्लाइसर मशीनों में इस्तेमाल होने वाले ब्लेड के लिए स्पष्ट मानक तय करने की मांग की थी.

उनका कहना था कि कम गुणवत्ता वाले या बार-बार घिसकर इस्तेमाल किए गए ब्लेड खाने में धातु के सूक्ष्म कण मिला सकते हैं, जिससे लंबे समय में स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.

कई स्तरों पर उठाया गया मामला

पिछले कुछ वर्षों में इस विषय को लेकर कई बार संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया गया. जब अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने अपने दस्तावेज, तस्वीरें और अध्ययन रिपोर्ट को संकलित कर एक विस्तृत दस्तावेज तैयार किया और इसे उच्च स्तर तक पहुंचाया.

इसके बाद मामले पर दोबारा गंभीरता से विचार किया गया और अंततः FSSAI ने खाद्य उद्योग के लिए यह महत्वपूर्ण सलाह जारी की.

सिर्फ बेकरी नहीं, पूरे खाद्य उद्योग से जुड़ा मुद्दा

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समस्या केवल ब्रेड या बेकरी उत्पादों तक सीमित नहीं है. होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग सेवाओं और अन्य खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों में भी कटिंग उपकरणों की गुणवत्ता बेहद महत्वपूर्ण होती है.

यदि उपकरण समय पर बदले न जाएं या उनकी सही देखभाल न हो, तो वे खाद्य सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकते हैं.

अब होगी नियमों के पालन की चुनौती

हालांकि नया निर्देश जारी हो चुका है, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि खाद्य कारोबार से जुड़े संस्थान इन नियमों का कितनी गंभीरता से पालन करते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित निरीक्षण और जागरूकता अभियान के जरिए ही खाद्य सुरक्षा के मानकों को बेहतर बनाया जा सकता है.

खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में यह कदम उपभोक्ताओं को सुरक्षित भोजन उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है.

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मेरा नाम पुष्पांजलि है और मैं पिछले दो साल से प्रभात खबर डिजिटल के साथ जुड़ी हुई हूं। मैं लाइफस्टाइल और हेल्थ बीट कवर करती हूं, जहां फिटनेस, डाइट, वेट लॉस, स्किनकेयर, मेंटल वेलनेस और रोजमर्रा की हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखती हूं। मुझे ऐसी स्टोरीज पर काम करना पसंद है जो लोगों की डेली लाइफ से जुड़ी हों और उन्हें कुछ नया सीखने या अपनी लाइफस्टाइल को बेहतर बनाने में मदद करें। नए हेल्थ ट्रेंड्स, फिटनेस टिप्स, ब्यूटी हैक्स और वेलनेस से जुड़ी जरूरी जानकारियों को आसान तरीके से पाठकों तक पहुंचाना मेरी खास रुचि है। मैं हमेशा कोशिश करती हूं कि हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी जानकारी को बिना मुश्किल शब्दों के, आसान और रिलेटेबल अंदाज में पेश करूं। मेरा मकसद सिर्फ खबर बताना नहीं, बल्कि ऐसी जानकारी शेयर करना है जो पाठकों के लिए सच में काम की हो और उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को थोड़ा बेहतर बना सके।

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