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Chanakya Niti: किसके सामने सच बोलना पड़ सकता है भारी? जान लें चाणक्य की सबसे बड़ी चेतावनी

Updated at : 17 Feb 2026 7:03 AM (IST)
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chanakya niti on speaking truth

किसके सामने सच बोलना पड़ सकता है भारी AI image

Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य के अनुसार हर परिस्थिति में सच बोलना समझदारी नहीं होती. कई बार कड़वी सच्चाई रिश्ते तोड़ सकती है, सम्मान घटा सकती है और मुसीबत भी खड़ी कर सकती है. यह लेख बताता है कि कब सच कहना फायदेमंद है और कब चुप रहना ही बुद्धिमानी है.

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Chanakya Niti: आचार्य चाणक्य को अपने समय के सबसे ज्ञानी और बुद्धिमान पुरुष के तौर पर भी जाना जाता है. कहा जाता है अगर किसी भी व्यक्ति को एक सुखद, समृद्ध और सफल जीवन की तलाश है तो उन्हें चाणक्य की बताई बातों का पालन जरूर करना चाहिए. चाणक्य सिर्फ एक महान पॉलिटिशियन ही नहीं थे बल्कि उन्हें मानव स्वभाव की भी गहरी समझ थी. अपनी नीतियों में उन्होंने जिन बातों का जिक्र किया है वे आज के समय में भी मानवजाति को एक सही रास्ता दिखाने का काम कर रहे हैं. अपनी नीतियों में चाणक्य ने सच कहने को लेकर भी कुछ खास नियम बताये हैं. वे कहते हैं कि, सच कहना काफी अच्छी आदत है और यही आदत किसी भी व्यक्ति के चरित्र को मजबूत बनाने का काम भी करता है. लेकिन, आपके लिए हर समय सिर्फ सच कहना कभी भी बुद्धिमानी नहीं है. कुछ ऐसे हालात भी होते हैं जिनमें बिना सोचे-समझे कही गयी सच्ची बातें फायदे की जगह पर आपको नुकसान ही पहुंचा सकते हैं. आज इस आर्टिकल में हम आपक इन्हीं हालातों, स्थान और व्यक्तियों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनमें और जिनके सामने आपको सच बोलने से बचना चाहिए. तो चलिए जानते हैं विस्तार से.

जब सामने वाला सच समझने की स्थिति में न हो

आचार्य चाणक्य कहते हैं कि हर इंसान सच सुनने के लिए तैयार नहीं होता है. कुछ लोग इमोशनल होते हैं तो कुछ लोग गुस्सैल और अहंकार से भरे हुए. अगर आप इस तरह के लोगों के सामने सच बोल देते हैं तो वे सुधरने की जगह पर आपकी ही बातों का विरोध करने लग जाते हैं. उदहारण के लिए, अगर कोई इंसान सच्चाई सुनने के बाद चीजों को सीखता नहीं बल्कि आपसे दूर हो सकता तो ऐसे हालात में आपको उस सच्चाई को नरमी से और सही तरीके से कहने की कोशिश करनी चाहिए। ऐसा करना ही आपके लिए समझदारी भरा कदम हो सकता है.

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रिश्तों को बचाने के लिए कभी-कभी चुप रहना बेहतर

चाणक्य नीति के अनुसार आपके लिए हर बार सच ही बोलना बिलकुल जरूरी नहीं है. खासकर उस समय जब आपके ससच से कोई रिश्ता टूट सकता है. परिवार और रिश्तों में कई तरह की छोटी-छोटी बातें होती हैं जिन्हें अगर आप बिना सोचे-समझे कह देते हैं तो रिश्तों में विवाद भी पैदा हो सकता है. अगर आपका सच किसी का सिर्फ दिल दुखा रहा है और इसके अलावा कोई फायदा नहीं दे रहा है तो, आपके लिए चुप रहना ही समझदारी है. इन जगहों पर आपको झूठ कहने की जरूरत नहीं है, बल्कि चुप रहने में आपकी समझदारी है.

कार्यस्थल पर सच्चाई से हो सकता है नुकसान

आचार्य चाणक्य के अनुसार आप जिस जगह पर काम कर रहे हैं उस जगह पर भी खुलकर सच बोल देना आपके लिए नुकसानदेह हो सकता है. मान लीजिये आप अपने मालिक या फिर साथ में काम करने वाले इंसान की किसी कमी या फिर कमजोरी को बिना सोचे-समझे सभी के सामने कह देते हैं, तो इसकी वजह से सिर्फ सामने वाले की नहीं बल्कि आपकी छवि भी दुनिया के सामने खराब हो सकती है. चाणक्य नीति के अनुसार एक समझदार व्यक्ति वही होता है जो सच को सही समय और सही जगह पर बोलना जानता हो. जब आप पर्सनली किसी से कुछ बात कहते हैं तो उसे सुधारा जा सकता है, लेकिन सभी के सामने कही गयी बातें बदनामी का कारण बनती है.

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जब सच कहने से खतरा बढ़ जाए

कई बार हालात ऐसे भी होते हैं कि आपकी कही गयी सच्चाई आपके लिए ही मुसीबत बन जाती है और परेशानियां खड़ी कर देती हैं. चाणक्य के अनुसार गुस्से से भरे व्यक्ति, दुश्मन या फिर चालाक इंसान के सामने अपने विचारों और कमजोरियों को उजागर करना आपके लिए बुद्धिमानी भरा फैसला नहीं होता है. चाणक्य नीति के अनुसार आपके लिए अपनी सुरक्षा और सम्मान सबसे पहले होना चाहिए. ऐसे हालातों में चुप रहना या फिर टॉपिक बदल देना भी एक तरह की नीति है.

सही सच वही है जो फायदेमंद हो

आचार्य चाणक्य के अनुसार वही सच सबसे श्रेष्ठ है जो आपके लिए फायदेमंद हो. ऐसा सच जो सुधर, शांति और आपके लिए फायदा लेकर आए, वही आपको सच कहना चाहिए. अगर सच कहकर किसी को दुखी करदे तो यह आपकी बुद्धिमानी नहीं बल्कि मूर्खता है. एक समझदार व्यक्ति सच कहने से पहले कुछ सवालों पर जरूर ध्यान देता है जैसे कि, क्या बोलना जरूरी है, किससे बोलना है और कब बोलना है.

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Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. प्रभात खबर इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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Saurabh Poddar

लेखक के बारे में

By Saurabh Poddar

मैं सौरभ पोद्दार, पिछले लगभग 3 सालों से लाइफस्टाइल बीट पर लेखन कर रहा हूं. इस दौरान मैंने लाइफस्टाइल से जुड़े कई ऐसे विषयों को कवर किया है, जो न सिर्फ ट्रेंड में रहते हैं बल्कि आम पाठकों की रोजमर्रा की जिंदगी से भी सीधे जुड़े होते हैं. मेरी लेखनी का फोकस हमेशा सरल, यूजर-फ्रेंडली और भरोसेमंद भाषा में जानकारी देना रहा है, ताकि हर वर्ग का पाठक कंटेंट को आसानी से समझ सके. फैशन, हेल्थ, फिटनेस, ब्यूटी, रिलेशनशिप, ट्रैवल और सोशल ट्रेंड्स जैसे विषयों पर लिखना मुझे खास तौर पर पसंद है.

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