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Storytelling से बच्चों में बढ़ती है कल्पना और रचनात्मकता, इस तरह बच्चों में डेवलप करें Storytelling Habit

Updated at : 02 Oct 2025 1:16 PM (IST)
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Storytelling Habit in Kids

बच्चों में Storytelling की आदत डालना उनकी कल्पना, भाषा और आत्मविश्वास को बढ़ाता है. जानें आसान टिप्स और फायदे.

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Storytelling Habit in Kids: आजकल बच्चे अपना ज्यादातर समय मोबाइल, टीवी और गेम्स में बिताते हैं. इससे उनकी कल्पना (Imagination Power) और रचनात्मक सोच (Creative Thinking) कम हो सकती है. आज जरूरी हो गया है कि बच्चों में कुछ जरूरी स्किल डेवेलप की जाएं जिससे उनके अंदर आत्मविश्वास जागें जैसे कि स्टोरीटेलिंग.

एक्सपर्ट कहते हैं कि बच्चों में कहानिया सुनने और सुनाने की आदत डालना बच्चों के साथ साथ बड़ों के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है. इससे उनकी सोचने-समझने की क्षमता बढ़ती है, भाषा सुधारती है और व्यक्तित्व निखरता है. साथ ही बच्चे अपनी बात को बेहतर तरीके से समझाने की कोशिश करते है.

बच्चों में Storytelling की आदत डालने के फायदे

Importance of storytelling in child development
  1. कल्पना शक्ति बढ़ती है – कहानी सुनते और बनाते समय बच्चे नई-नई चीजें सोचते हैं जिससे उनकी कल्पना और रचनात्मकता मजबूत होती है.
  2. भाषा और शब्दावली सुधरती है – अलग-अलग कहानियों से बच्चे नए शब्द और वाक्य सीखते हैं.
  3. आत्मविश्वास बढ़ता है  – जब बच्चे खुद कहानी सुनाते हैं, तो बोलने और दूसरों से संवाद करने का आत्मविश्वास आता है.
  4. सोचने और समझने की क्षमता विकसित होती है – कहानियों से बच्चे अच्छे-बुरे का फर्क समझते हैं और समस्याओं को हल करना सीखते हैं.
  5. भावनात्मक जुड़ाव बढ़ता है – जब माता-पिता बच्चों को कहानियां सुनाते हैं, तो परिवार के बीच एक गहरा रिश्ता बनता है.

बच्चों में कैसे डालें Storytelling की आदत

Storytelling to improve imagination in kids
  1. रोजाना थोड़ा समय निकालें
    बच्चे के लिए रोजाना 15-20 मिनट कहानी सुनाने का समय तय करें. चाहे आप सुनाएं या बच्चा खुद बनाए, इससे उन्हें मजा आएगा और आदत भी बन जाएगी.
  2. कहानियों को मजेदार बनाएं
    कहानियों में रंग-बिरंगे पात्र (Colorful Character) , आवाज़ें, छोटे अभिनय या चित्र दिखाएं. इससे बच्चे की कल्पना और ध्यान दोनों बढ़ेंगे.
  3. बच्चों को खुद कहानी बनाने दें
    बच्चे को प्रोत्साहित करें कि वे अपनी कल्पना से छोटी-छोटी कहानियां बनाएं. यह उनकी रचनात्मक सोच और सोच-समझने की क्षमता को बढ़ाता है. चित्र देखकर कहानी बनाओं इस तरह की एक्टिविटी बच्चों की सिखाएं.
  4. सवाल पूछें और बातें करें
    कहानी सुनने के बाद बच्चे से पूछें, अगर तुम इस कहानी के हीरो होते तो क्या करते? आपको इस कहानी में क्या अच्छा लगा लगा? क्या सीख मिली? इससे उनका सोचने और निर्णय लेने का तरीका मजबूत होगा.
  5. कहानियों में सीख जोड़ें
    कहानियों में नैतिकता और सही-सलाह शामिल करें. इससे बच्चे सही और गलत को समझते हैं और उनका मानसिक विकास होता है.
  6. डिजिटल कहानियों का सही इस्तेमाल करें
    ऑडियो बुक्स और एनिमेटेड कहानियां कभी-कभी मदद कर सकती हैं. बस ध्यान रखें कि इसे संतुलित रूप से ही इस्तेमाल करें.

Storytelling सिर्फ मनोरंजन नहीं है, यह बच्चों के मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक विकास का बेहतरीन तरीका है. माता-पिता अगर रोज़ थोड़ा समय निकालकर कहानियां साझा करें, तो यह आदत बच्चों की सोच, कल्पना और रचनात्मकता को लंबे समय तक मजबूत बनाएगी.

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Pratishtha Pawar

लेखक के बारे में

By Pratishtha Pawar

मैं लाइफस्टाइल कंटेंट राइटर हूं, मीडिया जगत में 5 साल का अनुभव है. मुझे लाइफस्टाइल, फैशन, ब्यूटी, वेलनेस और आध्यात्मिक विषयों पर आकर्षक और दिलचस्प कंटेंट लिखना पसंद है, जो पाठकों तक सही और सटीक जानकारी पहुंचा सके.

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