चौंका देगी पानी में रहने वाले इस जनजाति की लाइफ स्टाइल, लंबे समय तक सांस रोकने की अद्भुत क्षमता

Bajau Tribe, Pic Credit- Freepik
Bajau Tribe Lifestyle: बाजाऊ जनजाति एक अनोखी समुद्री जनजाति है जो मुख्य रूप से इंडोनेशिया, मलेशिया और फिलीपींस में पाई जाती है. ये लोग पीढ़ियों से नावों पर जीवन बिता रहे हैं और बिना किसी उपकरण के समुद्र में 70 मीटर तक गोता लगा सकते हैं. वैज्ञानिक भी इनकी शारीरिक क्षमताओं और अनुवांशिक विशेषताओं को लेकर चकित हैं.
Bajau Tribe: भारत में कई जनजातियां पायी जाती हैं. उनका रहन सहन और खान पान और संस्कृति लोगों से अलग है. ऐसी ही दुनिया की एक ऐसी जनजाति है- बाजाऊ. जो अक्सर में ही अपना घर बसाते हैं. ये मुख्य रूप से इंडोनेशिया, मलेशिया और फिलीपींस में पाए जाते हैं. ये लोग न सिर्फ समुद्र के साथ जीते हैं, बल्कि उसे अपनी आत्मा की तरह अपनाते हैं. आज, तकनीक के सहारे हम गहराइयों को छूने की कोशिश करते हैं, लेकिन वो ऐसे लोग हैं जो बिना किसी उपकरण के 70 मीटर तक गोता लगा लेते हैं. आधुनिक विज्ञान भी इनकी शारीरिक क्षमता को देख हैरान है.
कौन हैं बाजाऊ जनजाति?
बाजाऊ (Bajau) जनजाति को “सी नोमैड्स” यानी समुद्री खानाबदोश कहा जाता है. ये लोग पीढ़ियों से नावों पर जीवन बिता रहे हैं. कई परिवारों के पास स्थायी घर नहीं होते, बल्कि उनका नाव ही उनका आशियाना होता है. मछली पकड़ना, समुद्री भोजन इकट्ठा करना और गोताखोरी करना उनकी रोजमर्रा की दिनचर्या है.
विज्ञान भी हैरान
यूनिवर्सिटी ऑफ कोपेनहेगन के एक शोध में सामने आया कि बाजाऊ लोगों की तिल्ली जो इंसान के पेट के ऊपर बांए ओर के हिस्से में होता है वह आम लोगों की तुलना में 50 प्रतिशत बड़ी होती है. यह अंग शरीर में ऑक्सीजन युक्त रक्त को संग्रहित करता है और गहरे पानी में डाइविंग के दौरान उसे छोड़ता है. इसका मतलब यह है कि बाजाऊ बिना सांस लिए लंबे समय तक पानी में रह सकते हैं.
बाजाऊ की अनुवांशिक विशेषताएं
शोधकर्ताओं को उनके जीन में कुछ खास बदलाव मिले हैं, जो उन्हें अत्यधिक ऑक्सीजन की कमी में भी सामान्य बनाए रखते हैं. PDE10A और BDKRB2 जैसे जीन उनके शरीर को गहराई और दबाव के अनुकूल बना देते हैं.
समुद्र से गहरा रिश्ता
बाजाऊ लोगों के लिए समुद्र केवल जीवनयापन का माध्यम नहीं है. यह उनकी संस्कृति, परंपरा और अस्तित्व का केंद्र है. वे समुद्र को एक जीवित प्राणी मानते हैं और इसलिए उसकी पूजा भी करते हैं. उनके लिए हर डाइव एक आध्यात्मिक अनुभव होता है.
खतरे में है पारंपरिक जीवनशैली
विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो तेजी से बदलते वैश्विक परिवेश में बाजाऊ की पारंपरिक जीवनशैली खतरे में है. जलवायु परिवर्तन, मछलियों की घटती संख्या और आधुनिकीकरण की लहर ने उन्हें किनारों की ओर धकेल दिया है. अब कई युवा बाजाऊ जनजातियों के लोग स्थायी जीवन, शिक्षा और रोजगार की तलाश में शहरों की ओर जा रहे हैं.
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लेखक के बारे में
By Sameer Oraon
इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.
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