Baisakhi 2023: बैसाखी कल, सिख नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है यह दिन, जानें महत्व, इतिहास
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 13 Apr 2023 11:26 AM
Baisakhi 2023: बैसाखी सिख नव वर्ष के रूप में भी मनाये जाने के साथ ही फसल का त्योहार भी है. यह मुख्य रूप से उत्तरी भारत में मनाया जाता है, खासकर पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में. इस लोकप्रिय त्योहार का इतिहास, महत्व और सेलिब्रेट करने के तरीके जानें.
Baisakhi 2023: सिख नव वर्ष की शुरुआत 14 अप्रैल बैसाखी से हो रही है. बैसाखी को ‘वैसाखी’ या ‘बसोआ’ के नाम से भी जानते हैं और आमतौर पर यह पर्व वैशाख महीने के पहले दिन मनाया जाता है. बैसाखी मुख्य रूप से उत्तरी भारत में मनाई जाती है, जो वसंत की फसल के मौसम की शुरुआत का प्रतीक है. बैसाखी के दिन ही वैशाखी संक्रांति भी है. द्रिक पंचांग के अनुसार, 14 अप्रैल को, जब देश भर में बैसाखी मनाई जाएगी, वैशाखी संक्रांति उसी दिन दोपहर 03:12 बजे होगी. जानें इस दिन का महत्व.
वैसे तो बैसाखी पूरे देश में मनाई जाती है लेकिन यह मुख्य रूप से पंजाब के सिखों द्वारा मनाये जाने वाला उत्सव है. इसी दिन खालसा का गठन 1699 में हुआ था और दसवें और अंतिम सिख गुरु, गुरु गोबिंद सिंह द्वारा खालसा को स्थापित किया गया था. इस दिन, गुरु गोबिंद सिंह ने सभी जातियों के बीच के भेद को समाप्त कर दिया और सभी मनुष्यों को समान घोषित किया. गुरु ग्रंथ साहिब को शाश्वत मार्गदर्शक और सिख धर्म की पवित्र पुस्तक घोषित किया गया.
बैसाखी को सिख नव वर्ष या पंजाबी नव वर्ष के रूप में सेलिब्रेट किया जाता है. इसे हिंदू सौर कैलेंडर के आधार पर हिंदुओं का सौर नव वर्ष भी माना जाता है. कई लोग इस दिन को वैसाखी भी कहते हैं. इस दिन गुरुद्वारों में विशेष प्रार्थनाओं का आयोजन किया जाता है. बैसाखी मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हिंदुओं द्वारा मनाई जाती है. पश्चिम बंगाल में, इसे “नबा बर्शा” या बंगाली नव वर्ष के रूप में मनाया जाता है.
बैसाखी पंजाबी नव वर्ष की शुरुआत का दिन होने के साथ ही एक फसल उत्सव भी है और रबी फसलों की कटाई के समय का प्रतीक है. इस दिन किसान अपने परिवारों के साथ अपने खेतों में इकट्ठा होते हैं और फसल के चारों ओर ढोल की थाप पर नाचते हुए इसे सेलिब्रेट करते हैं. बैसाखी या वैशाखी, संस्कृत भाषा से लिया गया एक शब्द है, जिसका अर्थ अप्रैल-मई के अनुरूप हिंदू चंद्र वर्ष का एक महीना है, जिसे कुछ राज्यों में नए साल की शुरुआत के रूप में माना जाता है.
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ज्योतिषीय रूप से भी बैसाखी बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह मेष संक्रांति के साथ शुरू होती है, जो ओडिशा में पान संक्रांति, पश्चिम बंगाल में पोहेला बोइशाख, असम और मणिपुर में बोहाग बिहू, केरल में विशु और तमिलनाडु में पुथंडु जैसे कई क्षेत्रीय त्योहारों के साथ मेल खाती है. इसे ओडिशा में पाना संक्रांति के रूप में मनाया जाता है, जहां भक्त भगवान शिव, हनुमान या देवी शक्ति की पूजा करते हैं. वे तीर्थ यात्रा के दौरान पवित्र नदियों में स्नान करते हैं. सामाजिक उत्सव होते हैं और आम के गूदे से तैयार “पना” नामक एक विशेष पेय इस विशेष दिन पर लोगों द्वारा सेवन किया जाता है.
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