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नशे की गिरफ्त में झारखंड के युवा, नशे का क्या है बॉलीवुड कनेक्शन

Updated at : 23 Nov 2020 4:32 PM (IST)
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नशे की गिरफ्त में झारखंड के युवा, नशे का क्या है बॉलीवुड कनेक्शन

जमशेदपुर (प्रियरंजन/विकास श्रीवास्तव) : फिल्म इंडस्ट्री की कॉमेडी क्वीन भारती सिंह और उनके पति हर्ष की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर से ड्रग कारोबार की चर्चा जोरों पर शुरू हो गई है. युवा पीढ़ी नशे की जरूरत को पूरा करने के लिए अपराध भी कर रही है. चोरी, छिनतई में शामिल पकड़ाये कई अपराधियों ने यह स्वीकार किया है कि उन्हें नशे की लत है. उसे खरीदने के लिए चोरी, छिनतई करते हैं. छेड़खानी की घटना भी नशे की हालत में खूब बढ़ी है.

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जमशेदपुर (प्रियरंजन/विकास श्रीवास्तव) : फिल्म इंडस्ट्री की कॉमेडी क्वीन भारती सिंह और उनके पति हर्ष की गिरफ्तारी के बाद एक बार फिर से ड्रग कारोबार की चर्चा जोरों पर शुरू हो गई है. युवा पीढ़ी नशे की जरूरत को पूरा करने के लिए अपराध भी कर रही है. चोरी, छिनतई में शामिल पकड़ाये कई अपराधियों ने यह स्वीकार किया है कि उन्हें नशे की लत है. उसे खरीदने के लिए चोरी, छिनतई करते हैं. छेड़खानी की घटना भी नशे की हालत में खूब बढ़ी है.

नशे का कारोबार जुआ से जुड़ा है. नशा को पूरा करने के लिए युवा जुआ खेलते हैं. वहीं नशे के कई ऐसे अड्डे हैं जहां जुआरियों का ही जमावड़ा लग रहा है. नशा और जुआ का खेल एक साथ चलता है. जैसे-जैसे नशा चढ़ता है जुआ में जीत-हार का दाव भी उसी के अनुसार बढ़ता जाता है. ऐसा बताया जा रहा है कि इस कारोबार में महिलाएं भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. पुलिस सूत्रों के अनुसार ब्राउन शुगर की सरगना डॉली परवीन व उनके बाद उसके भाई मेहंदी हसन, अख्तर, अफसर व बिस्मिल्ला की गिरफ्तारी के बाद भी छापामारी जारी है. ब्राउन शुगर के विक्रेता व क्रेता अब काफी सावधानी बरतते हुए एक दूसरे से मिल रहे हैं. इन लोगों ने अब अपना मार्ग बदल लिया है.

नशे का कारोबार जुआ से जुड़ा है. नशा को पूरा करने के लिए युवा जुआ खेलते हैं. वहीं नशे के कई ऐसे अड्डे हैं जहां जुआरियों का ही जमावड़ा लग रहा है. नशा और जुआ का खेल एक साथ चलता है. जैसे-जैसे नशा चढ़ता है जुआ में जीत-हार का दाव भी उसी के अनुसार बढ़ता जाता है. ऐसा बताया जा रहा है कि इस कारोबार में महिलाएं भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं. पुलिस सूत्रों के अनुसार ब्राउन शुगर की सरगना डॉली परवीन व उनके बाद उसके भाई मेहंदी हसन, अख्तर, अफसर व बिस्मिल्ला की गिरफ्तारी के बाद भी छापामारी जारी है. ब्राउन शुगर के विक्रेता व क्रेता अब काफी सावधानी बरतते हुए एक दूसरे से मिल रहे हैं. इन लोगों ने अब अपना मार्ग बदल लिया है.

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इस नशे में केवल युवक ही नहीं है बल्कि युवतियां भी इसकी लत में फंसती जा रही हैं. देर रात शहर की सड़कों पर नशे की हालत में युवकों के साथ घूमती युवतियों को देखा जा सकता है. सिगरेट में गांजा और अफीम भरकर खुलेआम छल्ला उड़ाते हुए ऐसे युवक युवतियों दिख जाते हैं. बात यह नहीं कि ये नशा कर रहे हैं सवाल यह है कि यह सारी प्रतिबंधित नशे की वस्तु शहर में बिक कैसे रही है. शहर की एक सामाजिक संस्था के सर्वे में यह बात सामने आयी थी कि पूर्वी सिंहभूम जिले में 30,735 बच्चे (दस वर्ष से 16 वर्ष तक) विभिन्न तरह के नशे के शिकार हैं.

इस नशे में केवल युवक ही नहीं है बल्कि युवतियां भी इसकी लत में फंसती जा रही हैं. देर रात शहर की सड़कों पर नशे की हालत में युवकों के साथ घूमती युवतियों को देखा जा सकता है. सिगरेट में गांजा और अफीम भरकर खुलेआम छल्ला उड़ाते हुए ऐसे युवक युवतियों दिख जाते हैं. बात यह नहीं कि ये नशा कर रहे हैं सवाल यह है कि यह सारी प्रतिबंधित नशे की वस्तु शहर में बिक कैसे रही है. शहर की एक सामाजिक संस्था के सर्वे में यह बात सामने आयी थी कि पूर्वी सिंहभूम जिले में 30,735 बच्चे (दस वर्ष से 16 वर्ष तक) विभिन्न तरह के नशे के शिकार हैं. इस नशे में केवल युवक ही नहीं है बल्कि युवतियां भी इसकी लत में फंसती जा रही हैं. देर रात शहर की सड़कों पर नशे की हालत में युवकों के साथ घूमती युवतियों को देखा जा सकता है. सिगरेट में गांजा और अफीम भरकर खुलेआम छल्ला उड़ाते हुए ऐसे युवक युवतियों दिख जाते हैं. बात यह नहीं कि ये नशा कर रहे हैं सवाल यह है कि यह सारी प्रतिबंधित नशे की वस्तु शहर में बिक कैसे रही है. शहर की एक सामाजिक संस्था के सर्वे में यह बात सामने आयी थी कि पूर्वी सिंहभूम जिले में 30,735 बच्चे (दस वर्ष से 16 वर्ष तक) विभिन्न तरह के नशे के शिकार हैं.

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पहला केस

11 अप्रैल 2020 को आदित्यपुर से डॉली को पुलिस ने गिरफ्तार किया था. हालांकि उस दौरान पुलिस को उसके पास से नशे का कोई सामान नहीं मिला था. लेकिन बाद में पुलिस ने जब जांच व पूछताछ की, तो यह बात सामने आयी कि वह इस खेल में शामिल है.

दूसरा केस

1 नवंबर 2020 को आदित्यपुर से मेहंदी हसन को आदित्यपुर थाना की पुलिस ने 29 पुड़िया ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार किया था. मेहंदी ड्रग्स तस्कर डॉली परवीन का भाई है.

तीसरा केस
मानगो आजादनगर 2 नंबर से एक युवक को पुलिस ने ब्राउन शुगर की तीस पुड़िया के साथ गिरफ्तार किया था. युवक ने इसे बेचने की नियत से अपने पास रखा था. इसी तरह सीतारामडेरा थाना के भुइयांडीह से एक युवक को पुलिस ने ब्राउन शुगर की पुड़िया के साथ गिरफ्तार किया था.

ब्राउन शुगर-स्मैक की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में सवा करोड़ रुपये किलो है. इसकी छोटी छोटी पुड़िया बना कर बेची जाती है. एक ग्राम से दस ग्राम तक के पैकेट बना कर बेचे जाते हैं. जानकारी के अनुसार एक ग्राम की पुड़िया 80 से 100 रुपये में बिक्री होती है. जबकि यही पुड़िया होटलों में दोगुनी, तिगुनी कीमत पर बेची जाती है. कोरेक्स, टैबलेट बिलियम 10, न्यूट्रासन जैसी प्रतिबंधित दवा की बिक्री भी बगैर डॉक्टर के पर्ची की हो रही है. इन दवाओं की बिक्री भी लाखों रुपये में है. इसके अलावा डेंड्राइट और व्हाइटनर की बिक्री भी नशे के लिए खूब होती है. 20 से 30 रुपये में यह आसानी से स्टेशनरी और हार्ड वेयर की दुकानों में मिल जाती है.

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नशे के इस कारोबार की लंबी चेन में बनावटी ब्रेक को नहीं जोड़ पा रही पुलिस, इसलिए एक के पकड़े जाने के बाद दूसरा जारी रखता है सप्लाइ का खेल. शहर में नशे का यह सामान ओड़िशा और पश्चिम बंगाल के अलग-अलग शहरों से पहुंच रहा है. वहीं झारखंड में भी नशे की खेती धड़ल्ले से हो रही है. चतरा, लातेहार, पांकी, गढ़वा, पलामू के कई ऐसे ग्रामीण क्षेत्र हैं जहां इसकी खेती हो रही है. पूर्व में भी इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर गैर कानूनी तरीके से पोस्तू (ब्राउन शुगर) और गांजे की खेती होने का खुलासा पुलिस ने किया था. 2009 में बड़े पैमाने पर खेती को नष्ट भी किया गया था. लेकिन वर्तमान में इन क्षेत्रों के वन भूमि में फिर से खेती हो रही है. झारखंड में ब्राउन शुगर की खपत को अपने राज्य से ही पूरी हो जाती है. एटीएस सूत्रों की माने तो झारखंड में इसकी खेती हो रही है. कोलकाता से भी ब्राउन शुगर-स्मैक की खेप मंगा कर आपूर्ति की जा रही है.

नशे के इस कारोबार की लंबी चेन में बनावटी ब्रेक को नहीं जोड़ पा रही पुलिस, इसलिए एक के पकड़े जाने के बाद दूसरा जारी रखता है सप्लाइ का खेल. शहर में नशे का यह सामान ओड़िशा और पश्चिम बंगाल के अलग-अलग शहरों से पहुंच रहा है. वहीं झारखंड में भी नशे की खेती धड़ल्ले से हो रही है. चतरा, लातेहार, पांकी, गढ़वा, पलामू के कई ऐसे ग्रामीण क्षेत्र हैं जहां इसकी खेती हो रही है. पूर्व में भी इन क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर गैर कानूनी तरीके से पोस्तू (ब्राउन शुगर) और गांजे की खेती होने का खुलासा पुलिस ने किया था. 2009 में बड़े पैमाने पर खेती को नष्ट भी किया गया था. लेकिन वर्तमान में इन क्षेत्रों के वन भूमि में फिर से खेती हो रही है. झारखंड में ब्राउन शुगर की खपत को अपने राज्य से ही पूरी हो जाती है. एटीएस सूत्रों की माने तो झारखंड में इसकी खेती हो रही है. कोलकाता से भी ब्राउन शुगर-स्मैक की खेप मंगा कर आपूर्ति की जा रही है.

Posted By : Guru Swarup Mishra

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