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World Health Day 2025 special: जानिए मातृ-शिशु स्वास्थ्य की दिशा में कितनी प्रगति की है भारत ने

Updated at : 03 Apr 2025 7:18 PM (IST)
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Mother-Child Health

Mother-Child Health

भारत द्वारा उठाये गये महत्वपूर्ण कदमों के कारण मातृ मृत्यु दर व नवजात मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आयी है.

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World Health Day 2025 special: प्रतिवर्ष सात अप्रैल को विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है. यह दिवस हर वर्ष एक थीम को समर्पित होता है और उसी के इर्द-गिर्द स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता अभियान भी चलाया जाता है. इस वर्ष की थीम है, ‘हेल्दी बिगिनिंग्स, होपफुल फ्यूचर्स (स्वस्थ शुरुआत, आशापूर्ण भविष्य)’ जो मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य पर केंद्रित है. यह अभियान सात अप्रैल से शुरू होकर पूरे एक वर्ष तक चलेगा. हम सब बखूबी जानते हैं कि मांओं और शिशुओं का स्वास्थ्य स्वस्थ परिवारों और समुदायों की नींव है, मां और बच्चे का अच्छा स्वास्थ्य ही हमारे लिए अच्छा भविष्य सुनिश्चित करने में मदद करता है. इस अवसर पर जानते हैं भारत में मातृ एवं नवजात शिशु स्वास्थ्य की स्थिति के बारे में.

मां-बच्चे की मृत्यु दर में कमी

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्व 2020 के आंकड़े बताते हैं कि भारत में मातृ मृत्यु दर, नवजात मृत्यु दर और पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु में कमी लाने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाये गये हैं.

  • वर्ष 2014-2016 के बीच जहां मातृ मृत्यु दर प्रति एक लाख में 130 थी, वह 2018-2020 में घटकर 97 पर आ गयी. यह 33 अंको की उल्लेखनीय गिरावट दर्शाती है
  • देश में शिशु मृत्यु दर जहां 2014 में प्रति 1000 जीवित जन्मों पर 39 थी, वह 2020 में 28 पर आ गयी.
  • नवजात शिशु मृत्यु दर 2014 के प्रति एक हजार जीवित जन्मों पर 26 से कम होकर 2020 में 20 हो गयी.
  • पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में भी कमी आयी है. वर्ष 2014 में जहां 1000 बच्चों में 45 बच्चे पांच वर्ष से कम उम्र में मर जाते थे, वह घटकर 2020 में 32 पर आ गयी.
  • संयुक्त राष्ट्र मातृ मृत्यु अनुमान अंतर-एजेंसी समूह रिपोर्ट (यूएन-एमएमआइइजी-1990-2020) के अनुसार, बीते 30 वर्षों में भारत में मातृ मृत्यु अनुपात में 83 प्रतिशत की कमी देखी गयी है, जो वैश्विक स्तर की तुलना में कहीं बड़ी कमी दिखाती है. वैश्विक स्तर पर यह कमी 42 प्रतिशत की है.
  • इसी तरह, नवजात मृत्यु दर में 65 प्रतिशत की कमी आयी है, जबकि वैश्विक स्तर पर 51 प्रतिशत की कमी आयी है.
  • भारत में शिशु मृत्यु दर में भी 69 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई, जो वैश्विक स्तर के 55 प्रतिशत से अधिक की गिरावट है.
  • वहीं पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में 75 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है जो वैश्विक स्तर के 58 प्रतिशत से अधिक की कमी है.

बरकरार हैं चुनौतियां

यूनिसेफ की मानें, तो भारत द्वारा मातृ व शिशु देखभाल के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम उठाये जाने के बाद भी अभी चुनौतियां कम नहीं हुई हैं. हमारा देश दुनिया में पांच वर्ष से कम उम्र में होने वाली मृत्यु के मामले में दुनिया में छठे स्थान पर है. जबकि दुनियाभर में होने वाली नवजात शिशुओं की कुल मृत्यु का लगभग एक चौथाई हिस्से का बोझ आज भी भारत ही उठाता है. भारत में प्रतिदिन 67 हजार से अधिक बच्चों का जन्म होता है. इस प्रकार दुनिया में प्रतिदिन जितने भी बच्चे जन्म लेते हैं, उनका पांचवा हिस्सा भारत में जन्म लेता है. हालांकि प्रति मिनट इनमें से एक नवजात शिशु का जीवन समाप्त हो जाता है.

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Aarti Srivastava

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By Aarti Srivastava

Aarti Srivastava is a contributor at Prabhat Khabar.

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