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झारखंड के सरकारी अस्पताल में भी मिलेगी अमेरिका जैसी यह सुविधा, रंग लायी IIT (ISM) के वैज्ञानिकों की मेहनत

Updated at : 04 Apr 2020 8:32 AM (IST)
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झारखंड के सरकारी अस्पताल में भी मिलेगी अमेरिका जैसी यह सुविधा, रंग लायी IIT (ISM) के वैज्ञानिकों की मेहनत

government hospitals of jharkhand to provide facilities like united states soon रांची : झारखंड के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को अब अमेरिका की तरह एक सुविधा मिलने का रास्ता साफ हो गया है. आइआइटी (आइएसएम) धनबाद के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा उपकरण तैयार किया है, जो एक साथ चार मरीजों की जान बचा सकेगा. इन वैज्ञानिकों ने एक वेंटिलेटर एडाप्टर बनाया है, जिससे एक साथ चार रोगियों को ऑक्सीजन की सप्लाई होगी.

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रांची : झारखंड के वैज्ञानिकों ने एक अनूठा वेंटिलेटर तैयार किया है. एक मशीन से चार लोगों की जिंदगी बचायी जा सकेगी. यह कारनामा कर दिखाया है इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) का दर्जा प्राप्त करने वाले धनबाद स्थित इंडियन स्कूल ऑफ माइंस (ISM) के रिसर्च स्टूडेंट्स ने. कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच झारखंड के स्टूडेंट्स की यह खोज इस घातक बीमारी के मरीजों के लिए वरदान साबित होगी.

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कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों के इलाज के लिए वेंटिलेटर की आवश्यकता होती है. देश भर के अस्पतालों में फिलहाल वेंटिलेटर की काफी कमी बतायी जा रही है. ऐसे में आइएसएम के वैज्ञानिकों की यह खोज मरीजों के साथ-साथ सरकार को भी बहुत बड़ी राहत देगा. इस वेंटिलेटर की सबसे खास बात यह है कि इसके माध्यम से अलग-अलग मरीजों को उनकी जरूरत के मुताबिक ऑक्सीजन की सप्लाई होगी.

सबसे पहले इस वेंटिलेटर का इस्तेमाल धनबाद के पाटलिपुत्र मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (पीएमसीएच) में होगा. वैज्ञानिक आज-कल में ही यह वेंटिलेटर पीएमसीएच को दे देंगे. 14 वर्ष पहले वर्ष 2006 में अमेरिका में पहली बार एक से अधिक लोगों के लिए वेंटिलेटर बनाने का विचार वैज्ञानिकों के दिमाग में आया था. उस वक्त डॉ मेनिस के मार्गदर्शन में एक वेंटिलेटर से दो लोगों को ऑक्सीजन की सप्लाई की गयी थी.

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इससे कई लोगों की जान बची थी. अमेरिका के पास ऐसे वेंटिलेटर पहले से ही मौजूद हैं, जिसका उपयोग चार मरीजों के लिए किया जा सकता है. आइआइटी(आइएसएम) के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर अमित राज दीक्षित, आशीष कुमार और रिसर्च स्कॉलर रत्नेश कुमार ने स्वदेशी तकनीक से यह वेंटिलेटर तैयार की है. इन लोगों ने रिवर्स इंजीनियरिंग लैब में दो तरह के 3डी वेंटिलेटर बनाये हैं.

वैज्ञानिकों का कहना है कि इसमें वेंटिलेटर स्प्लिटर एडॉप्टर का इस्तेमाल किया गया है. एक वेंटिलेटर से ही चार मरीजों को ऑक्सीजन की सप्लाई की सुविधा दी जा सकेगी. एक को इंस्पिरेटरी लिंब के साथ और दूसरे को एक्सपिरेटरी लिंब के साथ जोड़कर एक साथ चार वेंटिलेटर सर्किट कनेक्ट किये गये हैं. वेंटिलेटर में अलग-अलग साइज के छिद्र हैं, जो ऑक्सीजन की सप्लाई को कंट्रोल करेंगे.

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वैज्ञानिकों ने बताया कि यह हर मरीज की जरूरत के मुताबिक ऑक्सीजन की सप्लाई करेगा. एक मरीज युवा है और दूसरा बुजुर्ग, तो बुजुर्ग को अधिक ऑक्सीजन की आवश्यकता होगी. अलग-अलग मरीजों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इसमें ऑक्जीजन फ्लो कंट्रोल वाल्ब की भी व्यवस्था की गयी है. इसमें कई और खूबियां भी हैं.

आइएसएम के निदेशक प्रोफेसर राजीव शेखर के निर्देश पर तैयार इस वेंटिलेटर का इस्तेमाल विषम परिस्थितियों में होता है. यह रोजाना इस्तेमाल के लिए नहीं है. अभी दो वेंटिलेटर तैयार किये गये हैं. लॉकडाउन की वजह से रॉ मैटेरियल का अभाव है. फिर भी कोशिशें जारी हैं कि ऐसे और कुछ वेंटिलेटर तैयार किये जा सकें, ताकि राज्य के लोगों की जान बचाने में डॉक्टरों को सहूलियत हो.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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