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झारखंड की इन महिलाओं के खाते में आज से सरकार भेजेगी 500-500 रुपये

Updated at : 03 Apr 2020 8:27 AM (IST)
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झारखंड की इन महिलाओं के खाते में आज से सरकार भेजेगी 500-500 रुपये

women of jharkhand having jan dhan account will get rs 500 per month upto three months from today रांची : प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत केंद्र सरकार के द्वारा जन-धन महिला खाताधारकों को तीन माह तक 500 रुपये प्रति माह देने की योजना शुक्रवार (3 अप्रैल, 2020) से शुरू हो जायेगी. खाताधारक अपने खातों से शुक्रवार से ही धन की निकासी भी कर सकेंगी.

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रांची : प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत केंद्र सरकार के द्वारा जन-धन महिला खाताधारकों को तीन माह तक 500 रुपये प्रति माह देने की योजना शुक्रवार (3 अप्रैल, 2020) से शुरू हो जायेगी. खाताधारक अपने खातों से शुक्रवार से ही धन की निकासी भी कर सकेंगी.

राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि इस योजना के तहत महिला जनधन खाताधारकों को अगले तीन महीने तक 500 रुपये हर महीने दिये जायेंगे, ताकि उन्हें आवश्यक वस्तुओं को खरीदने और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने में परेशानी का सामना न करना पड़े. इस योजना का लाभ झारखंड राज्य के सभी जन-धन महिला खाताधारक महिलाओं को मिलेगा.

कोरोना वायरस के संक्रमण को ध्यान में रखते हुए तथा प्रधानमंत्री जन-धन योजना (पीएमजेडीवाई) महिला खाताधारकों के पैसे की सुगम निकासी तथा सामाजिक दूरी बनाये रखने के वास्ते सभी खाताधारियों के लिए खाता संख्या के अंतिम अंक के आधार पर दिनों का निर्धारण किया गया है.

उल्लेखनीय है कि लॉकडाउन की वजह से लोगों का रोजगार भी चौपट हो गया है. दैनिक मजदूरी करने वालों के लिए यह बेहद मुश्किल घड़ी है. उनकी कमाई बंद हो गयी है और वे कहीं अन्यत्र जा भी नहीं सकते. इसलिए सरकार ने उनकी स्थिति को देखते हुए जनधन खाताधारकों के खाते में कुछ पैसे डालने की योजना शुरू की है, ताकि मुश्किल की इस घड़ी में उन्हें कुछ सहूलियत मिल सके.

जानलेवा कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सरकार ने 14 अप्रैल तक पूरे देश में लॉकडाउन कर दिया है. इस दौरान लोगों से कहा गया है कि वे जहां हैं, वहीं रहें. कोरोना वायरसे संक्रमित लोगों से बचें, क्योंकि यदि उनके संपर्क में कोई दूसरा व्यक्ति आता है, तो वह भी इस घातक विषाणु की चपेट में आ जायेगा.

अब तक इस बीमारी का इलाज नहीं मिल पाया है. इसका टीका भी दुनिया के किसी देश में अब तक उपलब्ध नहीं है. इसलिए इस बीमारी से पीड़ित लोगों से दूरी बनाये रखना ही इस विषाणु से बचने का एकमात्र उपाय है. हालांकि, अपने घर से दूर मुश्किलों में फंसे सरकार के इन आदेशों की अवहेलना करके काफी संख्या में लोग एक राज्य से दूसरे राज्य में आ-जा रहे हैं.

ऐसे लोगों का कहना है कि लॉकडाउन की वजह से उनका रोजगार चौपट हो गया है. खाने के लाले पड़ रहे हैं. मकान का किराया कहां से देंगे. इन तमाम मुश्किलों को देखते हुए वे अपने गांव-घर जा रहे हैं, ताकि परेशानी के इस वक्त में वे अपने परिवार के पास रह सकें. भूखों मरने से अच्छा है कि अपने परिवार के साथ बीमारी से मरें.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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