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New Research: सुनने की क्षमता में कमी और अकेलापन हमारी स्मरण शक्ति को कर सकते हैं कमजोर, रिसर्च से सामने आया सच

Updated at : 19 Jul 2025 4:56 PM (IST)
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mental health

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क्षीण होती श्रवण शक्ति और अकेलापन का हमारी कमजाेर होती स्मरण शक्ति के साथ गहरा संबंध है. नयी रिसर्च में इसका खुलासा हुआ है.

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New Research: अकेलापन, दूसरों के साथ बताचीत करने में कठिनाई महसूस होना, सजगता और सुनने की क्षमता में कमी या बहरापन उम्रदराज लोगों के लिए बड़ी चुनौती होती है. समय के साथ ये समस्याएं संज्ञानात्मक गिरावट का कारक भी बन सकती हैं. यूरोप में हुए एक नये अध्ययन से खुलासा हुआ है कि बहरापन, अकेलापन और स्मृति लोप (मेमोरी लॉस) के बीच गहरा संबंध है. जेनेवा विश्वविद्यालय के शोधार्थियों की एक टीम ने अपने अध्ययन के दौरान पाया कि वैसे उम्रदराज व्यक्ति जो बहरेपन का शिकार हैं, या जिन्हें सुनने में कठिनाई होती है, इसके साथ ही वे अपने आप को अकेला भी महसूस करते हैं, उनकी संज्ञानात्मक क्षमता में तेजी से कमी आती है. संज्ञानात्मक क्षमता में कमी का अर्थ है व्यक्ति के सोचन, याद रखने, ध्यान केंद्रित करने और समस्याओं को हल करने की क्षमता का कमजोर हो जाना.

तीन हजार से अधिक लोगों के आंकड़ों की जांच के बाद निकला निष्कर्ष

स्विट्जरलैंड स्थित जेनेवा विश्वविद्यालय के लाइफस्पैन साइकोलॉजिकल डेवलपमेंटल लैब और कॉग्निटिव एजिंग लैब की संयुक्त टीम ने श्रवण शक्ति में कमी और अकेलेपन के स्मरण शक्ति पर पड़ने वाले प्रभावों की जांच के लिए स्विट्जरलैंड समेत 12 यूरोपीय देशों के 50 वर्ष और उससे अधिक उम्र के 33,000 लोगों के आंकड़ों का विश्लेषण किया. अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि बहरापन या श्रवण शक्ति का कमजोर होना संज्ञानात्मक क्षमता (व्यक्ति के सोचन, याद रखने, ध्यान केंद्रित करने और समस्याओं को हल करने की क्षमता) में गिरावट को तेज करती है, खासकर उन बुजुर्गों में जो अकेलापन महसूस करते हैं. इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि वे सामाजिक रूप से अलग-थलग हैं या नहीं. यह अध्ययन कम्युनिकेशन साइकोलॉजी में प्रकाशित हुआ है.

इन उपायों से दूर हो सकती है परेशानी

निष्कर्ष बताते हैं कि व्यक्ति की संज्ञानात्मक क्षमता में आने वाली कमी को रोकने के प्रयासों के दौरान उनकी कमजाेर श्रवण क्षमता और सामाजिक एवं भावनात्मक पहलुओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि ये सब एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं. ऐसा करना उन लोगों के लिए विशेष रूप से जरूरी है जो सामाजिक रूप से अलग-थलग नहीं हैं, पर फिर भी अकेलापन महसूस करते हैं. ऐसे लोगों के लिए हियरिंग एड का प्रबंध किया जा सकता है, ताकि वे आवाजों को सुनने में सक्षम हो सकें. यह उपाय उन्हें फिर से सामाजिक जीवन में पूरी तरह से घुलने-मिलने में मदद कर सकता है, क्योंकि ऐसे लोग महज अपनी कमजोर श्रवण क्षमता के कारण स्वयं को अलग-थलग और अकेला महसूस करते हैं. इस तरह उनका अकेलापन भी दूर होगा और उनकी संज्ञानात्मक गिरावट भी रुकेगी.

क्या कहते हैं विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़े

विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, 2050 तक लगभग 2.5 अरब लोग या तो बहरे हो जायेंगे या उनकी श्रवण शक्ति कम हो जायेगी. संगठन की मानें, तो साठ वर्ष से अधिक उम्र के 25 प्रतिशत से अधिक लोग सुनने में कठिनाई का अनुभव करते हैं, यानी ऐसे लोगों की सुनने की क्षमता कमजोर हो जाती है. ऐसे लोग यदि अकेलेपन से जूझ रहे हैं, तो उनके याद्दाश्त के प्रभावित होने की संभावना बढ़ जाती है.

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Aarti Srivastava

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By Aarti Srivastava

Aarti Srivastava is a contributor at Prabhat Khabar.

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